अगले 25 वर्षों में उर्जा की प्रमुख कुंजी होगा भारत: पीएम मोदी
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नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा है कि भारत के ऊर्जा भविष्य के लिए मेरे दृष्टिकोण के चार स्तंभ हैं - ऊर्जा पहुंच, ऊर्जा दक्षता, ऊर्जा स्थिरता और ऊर्जा सुरक्षा। यह बात उन्होंने आज दिल्ली में आयोजित 18वें International Energy Forum Ministerial Meeting में कही। उन्होंने कहा कि हमारी सरकार मेक इन इंडिया के माध्यम से स्थानीय विनिर्माण को बढ़ावा दे रही है और युवाओं को वस्त्र, पेट्रोकेमिकल, इंजीनियरिंग जैसे उद्योगों में डाल रही है। पीएम ने कहा कि अगले 25 वर्षों में ऊर्जा क्षेत्र में भारत एक प्रमुख कुंजी होगा। पीएम ने कहा कि अगले 25 वर्षों में भारत की ऊर्जा खपत हर साल 4.5% बढ़ेगी। हम ऊर्जा बहुतायत के युग में प्रवेश कर रहे हैं लोगों को स्वच्छ, सस्ती, टिकाऊ और न्यायसंगत उर्जा की आपूर्ति तक पहुंच होगी। पीएम ने कहा कि हमारी सरकार ऊर्जा नियोजन के लिए एक एकीकृत दृष्टिकोण में विश्वास करती है और हमारे ऊर्जा एजेंडा समावेशी है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि पिछले महीने एक एजेंसी द्वारा तैयार की ऊर्जा भविष्यवाणी मुझे देखने को मिली, जिसके अनुसार भारत अगले 25 वर्षों में वैश्विक ऊर्जा मांग का प्रमुख प्रेरक होगा। अगले 25 वर्षों में भारत की ऊर्जा खपत प्रति वर्ष 4.2 प्रतिशत बढ़ेगी। यह विश्व की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में सबसे तेज है। रिपोर्ट में इस बात का जिक्र भी है कि 2040 तक गैस की मांग तिगुनी हो जाएगी। 2030 तक बिजली से चलने वाले वाहनों की संख्या बढ़कर 320 मिलियन हो जाएगी। आज यह संख्या 3 मिलियन है।
उन्होंने कहा कि हम ऊर्जा पर्याप्तता के युग में प्रवेश कर रहे हैं, फिर भी 1.2 बिलियन लोगों को अभी भी बिजली नहीं मिल रही है। काफी अधिक लोगों के पास स्वच्छ रसोई ईंधन नहीं है। हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि यह स्थिति वंचित लोगों के लिए अहितकर न हो और लोगों को सार्वभौमिक रूप से स्वच्छ, किफायती सतत और समान ऊर्जा सप्लाई हो।मुझे हाइड्रोकार्बन क्षेत्र और ऊर्जा सुरक्षा हासिल करने के हमारे प्रयासों पर अपना विचार साझा करने का अवसर दें। तेल और गैस कारोबार की सामग्री है, लेकिन आवश्यकता की भी। चाहे साधारण आदमी के लिए रसोई हो या विमान हो ऊर्जा आवश्यक है।
पीएम ने कहा कि भारत के भविष्य के लिए साधारण रूप से ऊर्जा और विशेष रूप से हाइड्रो कार्बन मेरे विजन के महत्वपूर्ण हिस्से हैं। भारत को वैसी ऊर्जा की आवश्यकता है जो प्राप्त होने योग्य और गरीबों के लिए किफायती हो। ऊर्जा के उपयोग में सक्षमता आवश्यक है। देशों के समूह में उत्तरदायी वैश्विक सदस्य के रूप में भारत जलवायु परिवर्तन से मुकाबला,उत्सर्जन नियंत्रण और सतत भविष्य सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन की स्थापना इस संकल्प को पूरा करने की दिशा में एक कदम है।
न्वहोंने कहा किर्तमान में भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्था है। सभी प्रमुख एजेंसियां जैसे - अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष, विश्व बैंक और एशियाई विकास बैंक (एडीबी) ने निकट भविष्य में भारत की विकास दर 7 से 8 प्रतिशत होने का अनुमान लगाया है। सरकार मु्द्रा स्फीति की दर कम करने, वित्तीय घाटे पर नियंत्रण और विनिमय दर को स्थिर करने के साथ उच्च विकास दर हासिल करने में सक्षम हुई है। वृहद अर्थनीति में इस स्थिरता ने अर्थव्यवस्था में उपभोग और निवेश को बढ़ावा दिया है।
पीएम ने कहा कि भारत के पास जनसंख्या के ढांचे में परिवर्तन के परिणामस्वरूप आर्थिक विकास की संभावना है, खासतौर से जब कार्यशील आबादी का आयु वर्ग, गैर-कार्यशील आबादी से बड़ा है। हमारी सरकार मेक इन इंडिया और वस्त्र, पेट्रो रसायन, रक्षा, इंजीनियरिंग जैसे उद्योगों में युवाओं को कौशल विकास प्रदान करने के जरिये स्थानीय निर्माण को प्रोत्साहन दे रही है। परिणामस्वरूप ऊर्जा के उपयोग को भी बढ़ावा मिला है।












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