Wuhan Summit: जब राजीव गांधी पहुंचे चीन तो आया था नया मोड़, क्या मोदी-जिनपिंग की मुलाकात के बाद होगा ऐसा!
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शुक्रवार को चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग से हुबई प्रांत की राजधानी वुहान में मुलाकात करेंगे। पीएम मोदी शाम को चीन के लिए रवाना होंगे तो जिनपिंग वुहान पहुंच चुके हैं। चीन की ओर से इस तरह की मुलाकात का निमंत्रण साल 1988 में दिया गया था और राजीव गांधी पीएम थे।
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शुक्रवार को चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग से हुबई प्रांत की राजधानी वुहान में मुलाकात करेंगे। पीएम मोदी शाम को चीन के लिए रवाना होंगे तो जिनपिंग वुहान पहुंच चुके हैं। पीएम मोदी को जिनपिंग की ओर अनौपचारिक मुलाकात का निमंत्रण दिया गया था। साल 2015 में पीएम मोदी और जिनपिंग के बीच पहली द्विपक्षीय मुलाकात हुई थी और यह दूसरी द्विपक्षीय मुलाकात है। मोदी चार बार चीन जा चुके हैं। पीएम मोदी से पहले चीन की ओर से इस तरह की मुलाकात का निमंत्रण साल 1988 में दिया गया था। उस समय राजीव गांधी देश के प्रधानमंत्री थे। राजीव के उस दौरे को दोनों देशों के बीच रिश्तों पर जमी बर्फ को पिघलाने वाला करार दिया जाता है। अब उम्मीद है कि पीएम मोदी की यह वुहान यात्रा भी उसी तरह से दोनों देशों के बीच रिश्तों को एक नए स्तर पर लेकर जाएगी।

क्या हुआ था साल 1988 में
साल 1988 में चीन के प्रधानमंत्री ली पेंग की ओर से तत्कालीन भारतीय प्रधानमंत्री राजीव गांधी को 19 से 23 दिसंबर के बीच चीन की यात्रा का न्यौता दिया गया था। 34 वर्षों में किसी भारतीय पीएम की यह पहली चीन यात्रा थी। चीन के विदेश मंत्रालय की वेबसाइट की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक उस यात्रा को भारत-चीन के रिश्तों में एक बड़ी घटना माना गया था। चीनी पीएम ली पेंग ने राजीव गांधी के साथ वार्ता की। इसके अलावा उस समय के चीनी राष्ट्रपति यांग शांगकुन और चीन के सेंट्रल मिलिट्री कमीशन के चेयरमैन डेंग जियाओपिंग ने भी राजीव से मुलाकात की थी। दोनों के बीच द्विपक्षीय संबंधों और आपसी हितों से जुड़े अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर चर्चा हुई थी। दोनों देशों के नेताओं की ओर से व्यापार, संस्कृति, साइंस एंड टेक्नोलॉजी, एविएशन और दूसरे क्षेत्रों में द्विपक्षीय सहयोग और आदान-प्रदान में हुई प्रगति की तारीफ की गई थी।

सीमा विवाद पर क्या हुई थी बात
चीनी विदेश मंत्रालय की वेबसाइट की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक उस समय भारत और चीन दोनों देशों ने साथ-साथ मौजूदगी के शांतिपूर्ण तरीके के लिए पांच सिद्धांतों पर जोर दिया था। इन सिद्धांतों की पहल चीन और भारत दोनों की तरफ से की गई थी। इसके अलावा दोनों देशों के बीच सीमा विवाद पर भी चर्चा हुई थी। सीमा विवाद पर चीन के पीएम ली पेंग ने कहा था लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल (एलएसी) पर चीन मानता है कि दोनों देशों की आपसी समझ से ही इस मुद्दे को सुलझाया जा सकता है। दोनों देश इस बात को लेकर राजी भी हुए थे कि शांति और मित्रता के माहौल में सीमा विवाद को सुलझाया जाएगा। इसके अलावा राजीव गांधी के चीन दौरे पर दोनों देशों के बीच साइंस एंड टेक्नोलॉजी में आपसी सहयोग और सिविल एविएशन ट्रांसपोर्टेशन को लेकर समझौता हुआ था। इसके साथ ही 1988 से 1990 तक दोनों देशों ने आपस में सांस्कृतिक आदान-प्रदान पर एक द्विपक्षीय समझौते को साइन किया था। अंत में राजीव और ली पेंग ने एक ज्वॉइन्ट प्रेस कांफ्रेंस भी की थी।

चीनी मीडिया ने दी मुलाकात को अहमियत
चीनी मीडिया की मानें तो मोदी-जिनपिंग की मुलाकात भी उतनी ही महत्वपूर्ण है जितनी 1988 में राजीव गांधी और चीनी राष्ट्रपति डेंग जियाओपिंग के बीच हुई मीटिंग थी। ग्लोबल टाइम्स ने मंगलवार को लिखा, 'मोदी और जिनपिंग की मुलाकात द्विपक्षीय संबंधों में एक नया अध्याय जोड़ेगी।' वहीं एक और आधिकारिक अखबार चाइना डेली ने लिखा है कि अभी यह देखना बाकी है कि मोदी-जिनपिंग की मुलाकात उसी तरह के असाधारण मुकाम को छु पाएगी जो 1988 में राजीव और डेंग की मुलाकात ने छुआ था। चाइना डेली के मुताबिक राजीव और डेंग की मुलाकात तब हुई जब दोनों देश अपनी लड़ाईयों को पीछे छोड़ने पर सहमत हो गए थे। हालांकि चाइना डेली ने लिखा है कि मोदी-जिनपिंग की मुलाकात से उम्मीद लगाने की कई वजहें हैं। चाइना डेली के मुताबिक पिछले वर्ष सितंबर में जब सियामेन में दोनों नेता मिले थे तो इनकी मुलाकात के बाद डोकलाम विवाद का अंत हुआ था जिसने कई दिनों तक चीन-भारत के रिश्तों को तनावपूर्ण बना रखा था।

डोकलाम विवाद ने पैदा किया तनाव
भारत और चीन के बीच संबंध पिछले वर्ष यूं तो जून से बिगड़ने शुरू हुए जब चीन-भूटान-भारत के बीच स्थित डोकलाम में दोनों देशों की सीमाएं सड़क निर्माण के बाद आमने-सामने थीं। लेकिन संबंधों के बिगड़ने की शुरुआत अप्रैल से ही हो चुकी थी जब भारत ने तिब्बितयों के धर्मगुरु दलाई लामा को अरुणाचल प्रदेश का दौरा करने की इजाजत दी। कई लोग इस बात को मानते हैं कि पिछले वर्ष दलाई लामा के अरुणाचल दौरे ने चीन की भावनाओं को भड़का दिया था। इसके बाद साल 2017 में चीन की तरफ से एक के बाद एक गुस्ताखियां जारी रहीं। इसके बाद जून में डोकलाम विवाद हुआ जो 73 दिन बाद अगस्त माह में खत्म हो सका। चीन के साथ संबंधों को सुधारने की कोशिशें फरवरी माह से ही चीन के साथ संबंधों को सुधारने की प्रक्रिया जारी है। 22 फरवरी को भारत की ओर से सरकार के मंत्रियों और सरकारी अधिकारियों को एक नोट जारी किया गया था। इस नोट में कहा गया था दलाई लामा के भारत पहुंचने के 60 वर्ष पूरे होने के मौके पर जो भी कार्यक्रम आयोजित हो रहे हैं, उसमें शामिल होने से बचा जाए।












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