Middle East Crisis पर PM मोदी ने CM संग बुलाई इमरजेंसी मीटिंग, क्या है सरकार का 7 एम्पावर्ड ग्रुप्स प्लान?
PM Modi Virtual Meeting with CM: पश्चिम एशिया (West Asia) में जारी भीषण संघर्ष और ईरान-अमेरिका युद्ध की गंभीर स्थिति के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक बड़ा कदम उठाया है। प्रधानमंत्री शुक्रवार को सभी राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ एक वर्चुअल बैठक (Virtual Meeting) करेंगे।
इस बैठक का मुख्य उद्देश्य वैश्विक संकट के कारण भारत में पैदा होने वाली संभावित चुनौतियों और उनके समाधान के लिए 'टीम इंडिया' की भावना के साथ एक साझा रणनीति तैयार करना है।

हालांकि, सूत्रों के अनुसार, जिन राज्यों में आगामी विधानसभा चुनाव होने वाले हैं, वहां के मुख्यमंत्रियों के इस महत्वपूर्ण चर्चा में शामिल होने की संभावना कम है।
सप्लाई चेन और ऊर्जा सुरक्षा पर होगा फोकस
इस बैठक का एजेंडा पूरी तरह से युद्ध के आर्थिक और रणनीतिक प्रभावों पर केंद्रित रहेगा। केंद्र सरकार चाहती है कि राज्य सरकारों के साथ मिलकर एक एकीकृत दृष्टिकोण (Unified Approach) अपनाया जाए ताकि देश के आम नागरिकों, विशेषकर गरीबों और किसानों को इस वैश्विक संकट की आंच से बचाया जा सके।
बैठक के मुख्य बिंदु:
ईंधन और गैस: कच्चे तेल की कीमतों में उछाल और सप्लाई चेन में बाधाओं को प्रबंधित करना।
खाद और उर्वरक: किसानों के लिए उर्वरकों की निरंतर उपलब्धता सुनिश्चित करना।
महंगाई पर लगाम: आवश्यक वस्तुओं की कीमतों को नियंत्रित रखने के लिए राज्यों के साथ समन्वय।
चुनावी राज्यों के CM क्यों रहेंगे नदारद?
अप्रैल और मई 2026 में पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, केरल, असम और पुडुचेरी में विधानसभा चुनाव होने हैं। चुनाव आयोग के नियमों के अनुसार इन राज्यों के मुख्यमंत्री इस बैठक में हिस्सा नहीं लेंगे। प्रशासनिक निरंतरता बनाए रखने के लिए इन राज्यों के मुख्य सचिव (Chief Secretaries) के साथ कैबिनेट सचिवालय अलग से बातचीत करेगा। जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने इस बैठक में शामिल होने की पुष्टि की है और लोगों से ईंधन की पैनिक बुकिंग न करने की अपील की है।
7 Empowered Groups India Energy Security: कोरोना की तर्ज पर '7 एम्पावर्ड ग्रुप्स' सक्रिय
प्रधानमंत्री मोदी ने इस संकट से निपटने के लिए एक मजबूत ढांचा तैयार किया है। सरकार ने सात अधिकार प्राप्त समूहों (Empowered Groups) का गठन किया है, जो ठीक उसी तरह काम करेंगे जैसे कोविड-19 महामारी के दौरान किया गया था। ये समूह ईंधन, आपूर्ति श्रृंखला (Supply Chain), उर्वरक और मुद्रास्फीति (Inflation) जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों की बारीकी से निगरानी कर रहे हैं।
पीएम मोदी का संसद में देश के नाम संदेश: तर्कता ही बचाव है
हाल ही में संसद को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने पश्चिम एशिया के संघर्ष पर एक सतर्क लेकिन दृढ़ रुख अपनाया। उन्होंने चेतावनी दी कि यह युद्ध एक गंभीर वैश्विक ऊर्जा संकट को जन्म दे सकता है, जिसके परिणाम लंबे समय तक झेलने पड़ सकते हैं।
पीएम ने देशवासियों से संभावित व्यवधानों के लिए तैयार रहने का आग्रह किया, साथ ही यह आश्वासन भी दिया कि सरकार भारत पर पड़ने वाले प्रभाव को कम करने के लिए सक्रिय रूप से काम कर रही है। भारत लगातार कूटनीति और तनाव कम करने (De-escalation) के पक्ष में आवाज उठा रहा है।
प्रधानमंत्री ने विशेष रूप से जोर दिया है कि संकट के इस दौर में किसानों को ढाल देना और गरीब व प्रवासी श्रमिकों तक आवश्यक वस्तुओं की पहुंच सुनिश्चित करना अनिवार्य है। राज्यों से सहयोग मांगते हुए उन्होंने कहा कि हमें घरेलू स्तर पर अपनी अर्थव्यवस्था को लचीला और आत्मनिर्भर बनाए रखना होगा।












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