विवेकानंद से लेकर महात्मा गांधी तक का कन्याकुमारी से रहा है गहरा रिश्ता, जानिए इस शहर से जुड़ी 10 खास बातें
Kanyakumari Interesting Facts: लोकसभा चुनाव के सातवें चरण का मतदान 1 जून को होना है। आज यानी गुरुवार, 30 मई को चुनाव प्रचार थम जाएगा। आज प्रचार अभियान के अंतिम दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तमिलनाडु के कन्याकुमारी जाएंगे और विवेकानंद रॉक मेमोरियल में ध्यान करेंगे।
प्रधानमंत्री रॉक मेमोरियल के ध्यान मंडपम में 30 मई की शाम से 1 जून की शाम तक दिन रात ध्यान (मेडिटेशन) करेंगे। बता दें, यह वही जगह है जहां स्वामी विवेकानंद जी ने तीन दिन तक ध्यान किया था और एक विकसित भारत का सपना देखा था।

2019 के लोकसभा चुनाव खत्म होने के बाद पीएम मोदी ध्यान के लिए महादेव की शरण में केदारनाथ पहुंचे थे। इस बार पीएम मोदी माता पार्वती की शरण में कन्याकुमारी जा रहे हैं। आइए जानते हैं कन्याकुमारी से जुड़ी कुछ खास बातों को...
- कन्याकुमारी को पहले केप कमोरी के नाम से जाना जाता था। ऐसी मान्यता है कि माता पार्वती के कुमारी (जिनका विवाह नहीं हुआ हो) रूप ने यहां असुर वाणासुर का वध किया था, जिसके बाद से इस जगह को कन्याकुमारी के नाम से जाना जाने लगा।
- तमिलनाडु का यह खूबसूरत शहर तीन-तीन महासागरों का संगम स्थल भी है। कन्याकुमारी अरब सागर (Arabian Sea), बंगाल की खाड़ी (Bay of Bengal) और हिंद महासागर (Indian Ocean) से घिरा हुआ है। इन तीनों सागरों का संगम कन्याकुमारी में होता है।
- कन्याकुमारी को लैंड्स एंड यानी धरती के अंत के रूप में भी जाना जाता है। यह भारतीय उपमहाद्वीप का सबसे दक्षिणी छोर और मुख्य भूमि भारत का सबसे दक्षिणी शहर है, और इसलिए इसे "द लैंड्स एंड" कहा जाता है।
- कन्याकुमारी में 'गांधी स्मारक' स्थित है। यह महात्मा गांधी के जीवन के प्रति एक जीवंत श्रद्धांजलि है। कन्याकुमारी के तट पर स्थित सभी हलचल भरे पर्यटन स्थलों से पास में ही गांधी स्मारक एक शांत वातावरण में स्थित है। विसर्जन से पहले महात्मा गांधी की अस्थियां इसी स्थान पर रखी गईं थी।
- कन्याकुमारी शहर का उल्लेख पुराने तमिल आलेखों में भी मिलता है। शहर में स्थित तिरुवल्लुवर की प्रतिमा या वल्लुवर प्रतिमा, तमिल कवि और दार्शनिक वल्लुवर की 41 मीटर ऊंची पत्थर की मूर्ति है, जिन्हें तिरुवल्लुवर के नाम से जाना जाता है। वो तिरुक्कुरल के लेखक थे, जो धर्म और नैतिकता पर एक प्राचीन तमिल कृति है। इस शहर की कला पीढ़ियों तक देखने और संजो कर रखने योग्य है।
- पौराणिक कथाओं और मान्यताओं के अनुसार तमिल भाषा का उदय कन्याकुमारी से ही माना जाता है। तमिल, तमिलनाडु की प्रमुख भाषा है और ऐसा कहा जाता है कि तमिल भाषा की शुरुआत कन्याकुमारी से ही हुई थी।
- कन्याकुमारी में 3000 साल पुराना एक मंदिर स्थित है जिसकी मुख्य भगवान एक देवी हैं। कुमारी को देवी शक्ति का अंश माना जाता है, मान्यताओं के अनुसार वो देवी पार्वती का रूप हैं। समुद्री तटों पर कुमारी देवी का मंदिर है, जहां देवी पार्वती की कन्या रूप में पूजी जाती हैं।
- पौराणिक कथाओं के अनुसार कुमारी देवी का भगवान शिव से विवाह होना था जिसकी तैयारियां चल रही थी। नारद मुनि नहीं चाहते थे कि यह विवाह संपन्न हो। वो चाहते थे कि कुमारी के हाथों वाणासुर का वध हो जाए जिसे शिव ने यह वरदान दिया था कि केवल कुवांरी कन्या के हाथों ही उसकी मृत्यु हो सकती है। इस वजह से कुमारी और भगवान शिव का विवाह नहीं हो पाया था। विवाह संपन्न ना हो पाने की वजह से शादी समारोह के बचे हुए दाल-चावल कंकर बन गए। यह कंकर समुद्र तट की रेत में दाल और चावल के आकार में बड़ी मात्रा में आज भी दिखाई देते हैं।
- कन्याकुमारी में शक्तिपीठ भी स्थित है। मान्यताओं के अनुसार यहां माता सती का पृष्ठ भाग (पीठ) गिरा था। ऐसी मान्यता भी है कि यहां माता का ऊर्ध्व दांत गिरा था। इस स्थान को शक्ति सर्वाणि और शिव का निमिष कहते हैं।
- यहां श्रीपद पराई भी स्थित है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस स्थान पर देवी पार्वती ने एक पैर पर बैठकर भगवान शिव के लिए तपस्या की थी। इस स्थान पर कुमारी देवी के पैरों के निशान भी हैं, जो ठीक विवेकानंद रॉक मेमोरियल के सामने स्थित हैं।












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