Modi in Varanasi: जानिए पीएम मोदी को सोशल मीडिया पर क्यों पड़ी डांट?
वाराणसी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज अपने संसदीय क्षेत्र वाराणसी से अपना नामांकन करेंगें, इससे पहले शुक्रवार सुबह वाराणसी में पार्टी के कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि जनता 5 साल के अनुभव के आधार पर अनेक आशा, आकांक्षा लेकर हमसे जुड़ गई है। जनता ने पूरे देश के राजनीतिक चरित्र को बदल दिया है, हमारे देश में इतने चुनाव हुए, लेकिन ये चुनाव होने के बाद पॉलिटिकल पंडितों को माथापच्ची करनी पड़ेगी क्योंकि आजादी के बाद पहली बार प्रो- इंकम्बैंसी लहर दिखाई दे रही है।
पीएम को लोगों ने सोशल मीडिया पर लगाई डांट
इस दौरान अपने से जुड़ी बातों को शेयर करते हुए पीएम ने कहा कि कल सोशल मीडिया पर लोगों ने मुझे बहुत डांटा कि रोड शो बंद कर दीजिए, अपनी सुरक्षा का ध्यान रखिए लेकिन मोदी का कोई ध्यान रखता है तो इस देश की करोड़ों माताएं, वे शक्ति बनकर मेरी सुरक्षाकवच बनती हैं, देश के कोने-कोने में मेरी माताएं हैं, कोई पूजा कर रहा है, कोई व्रत कर रहा है, जिसके पास मां की दुआएं हो, भला उसे किसी बात का डर हो सकता है क्या।

प्रधानमंत्री मोदी ने वाराणसी में रोड शो किया था
आपको बता दें कि इससे पहले गुरुवार को प्रधानमंत्री मोदी ने वाराणसी में रोड शो किया था, जिसमे काफी बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए थे और आज भी उनके नामांकन के दौरान एनडीए अपनी पूरी शक्ति दिखाएगी, अपने रोड शो के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोगों को संबोधित करते हुए कहा कि अगर आप लोगों की इजाजत हो तो मैं कल पर्चा भर दूं। जिसके बाद काफी बड़ी संख्या में लोग मोदी-मोदी के नारे लगाने लगे।

मेरा एक ही मंत्र है और वही मंत्र लेकर मैं जिया हूं-PM
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि चाहे कुछ भी हो जाए देशहित के अलावा किसी और का हित नहीं सोचूंगा। चाहेंगे वो पुलवामा का संकेत हो, उरी की घटना हो या फिर मेरे जीवन का अन्य कोई पल, मेरा एक ही मंत्र है और वही मंत्र लेकर मैं जिया हूं, इंडिया फर्स्ट।

परिवर्तन तभी सार्थक और स्थायी होता है, जब जन-मन बदलता है-PM
पीएम ने कहा कि काशी ने मुझे सिर्फ एमपी नहीं पीएम बनने का आशीर्वाद दिया। मुझे 130 करोड़ भारतीयों के विश्वास की ताकत दी। समर्थ, सम्पन्न और सुखी भारत के लिए विकास के साथ-साथ सुरक्षा अहम है। साथियों, मेरा ये मत रहा है कि परिवर्तन तभी सार्थक और स्थायी होता है, जब जन-मन बदलता है। इस जन-मन को साधने के लिए तपस्या करनी पड़ती है। मैं मानता हूं कि इस समय भारत भी तपस्या के दौर में है। वो खुद को साध रहा है और इस साधना में हम सब एक सेवक हैं, साधक हैं। जो सपना मन में है वो पूरा हो गया ऐसा मैं कभी दवा नहीं करता हू लेकिन उस सपने को पूरा करने की दिशा में हमारा रास्ता और रफ़्तार सही है ये मैं ज़रूर कह सकता हूं।
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