संसद में पीएम मोदी बोले, सामाजिक न्याय को आगे बढ़ाना जरूरी
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संसद में सांसदों की कांफ्रेंस को संबोधित करते हुए देश के समग्र विकास व सामाजिक न्याय की बात की। उन्होंने कहा कि कोई मुझे बताए कि एक घर में बिजली है और बगल वाले घर में नहीं है, क्या सामाजिक न्याय की हमारी यह जिम्मेदारी नहीं है कि उसे घर में भी बिजली पहुंचायी जाए। हर गांव, शहर में सामाजिक न्याय का यह सिद्धांत लागू होना चाहिए। सामाजिक न्याय का यह सिद्धांत हम सबको प्रेरित करता है कि हमे यह करना होगा। देश की पांच राज्य अगर आगे बढ़ गए हैं और तीन आगे नहीं बढ़ पाएं है तो हमे उसे बराबर लाना होगा।

प्रतिस्पर्धा का माहौल जरूरी
हम सोचते हैं कि अगर हम भूगोल में कमजोर हैं तो गणित में इतनी मेहनत करुंगा कि फर्स्ट क्लास में पास हो जाउंगा। हमारी सोच ही यही रही है, लेकिन इसका परिणाम यह होता है कि जो अच्छा करते हैं वह अच्छा करते जाते हैं, लेकिन जो पिछड़ गए हैं वो और पिछड़ने की दशा में आ जाते हैं। हम राज्यों के हिसाब से देखें तो प्रतिस्पर्धा का माहौल बढ़ा है। यह संघीय ढांचे के लिए अच्छा है। देश जो अपेक्षाएं करता है, हमे उसे पूरा करना होगा।
पिछड़े जिलों पर ध्यान देने की जरूरत
115 जिलों में डीएम की उम्र 40-45 वर्ष हैं। यहां ऐसे डीएम को ही भेजा जाता है जिससे कि काम चल जाए, इस सोच की वजह से ये जिले पीछे रह जाते हैं। जबकि डीएम की औसत उम्र 27-30 वर्ष होती है। इस सोच में गड़बड़ी है, हमे ऐसे लोगों को इन जिलो में भेजना चाहिए जो इन जिलों के विकास में अहम भूमिका निभा सके। एक जमाना था कि देश में आंदोलन की राजनीतिक बहुत काम आती थी, आज वक्त बदल गया है, आप सत्ता में हैं या विपक्ष में, आप जनता के काम आते हैं कि नहीं यह जनता देखती है। आज स्थिति बदल चुकी है, लोग यह नहीं देखते हैं कि आपने कितने संघर्ष किए, कितने आंदोलन किए। हमे भी कोशिश करनी होगी कि लोगों के जीवन में बदलाव लाने के लिए काम करे। लोग चाहते हैं कि उनके जीवन में बदलाव के लिए नेता क्या काम कर रहे हैं।
सामाजिक भागीदारी की जरूरत
पहले हमारे यहां टीकाकरण 30-40 फीसदी होती थी, लेकिन जनभागीदारी के अभाव में यह 90 फीसदी तक नहीं हो पाता था। अगर हम टीकाकरण को बेहतर तरीके से लागू कर सके तो पोलियो समेत तमाम बीमारियां दूर हो सकती है। पीएम ने कहा कि इसके लिए किसी भी बजट, संसाधन की जरूरत नहीं है। इसके लिए लोगों को सामने आने की जरूरत है।
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जिन जगहों पर गरीबी अधिक है वहां मनरेगा कम पहुंचता है, जबकि जो जगह समृद्ध हैं वहां वहां अधिक मनरेगा पहुंच रहा है। इसकी बड़ी वजह यह है कि यहां गुड गवर्नेंस की कमी है, जिसके चलते गरीब व कम समृद्ध इलाकों में अधिक मनरेगा का पैसा नहीं पहुंचता है। लिहाजा हमे कोशिश करनी होगी कि इन जगहों पर गवर्नेंस को बेहतर किया जाए।












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