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V Shalini कौन हैं ? कभी पीएम मोदी की सिक्योरिटी का हिस्सा थीं, अब लाठी से बैरक संभालती हैं

एक महिला पुलिसकर्मी जो कभी पीएम मोदी की सिक्योरिटी एसपीजी की क्लोज प्रोटेक्शन टीम का हिस्सा थी, अब तमिलनाडु पुलिस में हेड कॉन्स्टेबल बनकर काम कर रही है। इस बदलाव की एक बड़ी वजह है।

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तमिलनाड की एक महिला पुलिसकर्मी वी शालिनी आज हाथों में लाठी लेकर 10वीं बटालियन की बैरक संभाल रही हैं। लेकिन, करियर के मामले में यह उनकी ऊंचाई नहीं है। कुछ साल पहले तक वह देश की सबसे ज्यादा सुरक्षा वाली शख्सियत को करीब से सिक्योरिटी देती थीं। वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की एसपीजी सुरक्षा में भी क्लोज प्रोटेक्शन टीम का हिस्सा थीं, जो दस्ता पीएम को चारों ओर से कवर किए रहता है। पीएम की सुरक्षा में होने से ही स्पष्ट है कि वह तमाम अत्याधुनिक हथियार चलाने में पारंगत रही हैं। लेकिन, वक्त ने ऐसी करवट ली कि वी शालिनी को मजबूरन हाई प्रोफाइल सीपीजी सुरक्षा से निकलकर तमिलनाडु पुलिस की सेवा में लौटने को मजबूर होना पड़ा है। (पहली तस्वीर में वी शालिनी वाली फोटो सौजन्य: टीओआई अखबार)

कौन हैं वी शालिनी ?

कौन हैं वी शालिनी ?

कुछ साल पहले तक जिन हाथों में अत्याधुनिक पी-90 सबमशीन गन होते थे आज लाठी थमा दी गई है। 36 साल की वी शालिनी कभी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सुरक्षा में तैनात स्पेशल प्रोटेक्शन ग्रुप की क्लोज प्रोटेक्शन टीम (CPT) का हिस्सा होती थीं। शालिनी इस समय तमिलनाडु के उलुंडुरपेट में तमिलनाडु स्पेशल पुलिस की 10वीं बटालियन में हेड कॉन्स्टेबल पद पर तैनात हैं। देश के एक सबसे हाई-क्लास सिक्योरिटी टीम का हिस्सा रहने के बाद हाथों में लाठी लेकर अपनी ड्यूटी निभाने जैसी जिम्मेदारी में बदलाव अपने आप में अनोखी घटना लगती है।

करीब चार पीएम की सुरक्षा में तैनात रहीं

करीब चार पीएम की सुरक्षा में तैनात रहीं

वी शालिनी तमिलनाडु पुलिस की पहली महिला हैं, जो साल 2015 से लेकर 2018 तक देश के प्रधानमंत्री की क्लोज प्रोटेक्शन टीम में शामिल रह चुकी हैं। उस जिम्मेदारी को निभाने से पहले उनके हाथों को अत्याधुनिक हथियारों को चलाने के लिए प्रशिक्षित किया गया था। तब उनकी जिम्मेदारी प्रोटेक्टी की नजदीकी सुरक्षा से लेकर घर पर सुरक्षा देने तक की थी। पीएम सिक्योरिटी में होने की वजह से वह तमिलनाडु ही नहीं देश की कई महिला पुलिसकर्मियों के लिए एक प्रेरणा रह चुकी हैं। क्योंकि,एक सुरक्षाकर्मी के लिए यह एक बहुत ही सम्मान की बात है।

2005 में तमिलनाडु पुलिस में शामिल हुईं

2005 में तमिलनाडु पुलिस में शामिल हुईं

गरीब परिवार से आईं वी शालिनी 2005 में तमिलनाडु स्पेशल पुलिस में कॉन्स्टेबल के तौर पर शामिल हुई थीं। बाद में उन्होंने मैथमेटिक्स में ग्रैजुएशन पूरा किया। उन्होंने टाइम्स ऑफ इंडिया से कहा, '2008 में तमिलनाडु में एक पुलिस ट्रेनिंग कॉलेज में कंप्यूटर ऑपरेटर के तौर पर काम करते हुए, मुझे नवगठित तमिलनाडु पुलिस अकैडमी में परेड इंस्ट्रक्टर के तौर पर तैनात किया गया था।' वहां जब प्रोबेशनरों को ट्रेनिंग दे रही थीं तो एसपीजी के कुछ अफसरों की उनपर नजर पड़ी, जिन्होंने उनसे कहा कि एक परीक्षा मे शामिल हों और फिजिकल टेस्ट दें।

2013 में एसपीजी के लिए चुनी गईं

2013 में एसपीजी के लिए चुनी गईं

शालिनी कहती हैं, '2013 में मेरे सीनियर इंस्पेक्टर भक्तन मुझे टीएनपीए एसपी पी नागाराजन के पास ले गए और उन्होंने मुझसे कहा कि मुझे एसपीजी के लिए चुन लिया गया था। मैं दिल्ली आई और फिर से टेस्ट से गुजरी, क्योंकि सेलेक्शन प्रक्रिया पूरी होने के दो साल बाद ज्वाइन कर रही थी।' 35 पुरुषों के साथ 4 महीनों की कड़ी ट्रेनिंग के बाद उन्हें पहले तो सोनिया गांधी के आवास पर तैनात किया गया, जिन्हें तब एसपीजी सुरक्षा ही मिलती थी। इसके बारे में उन्होंने बताया, '2014 के अंत में मेरे अधिकारियों ने बताया कि वे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सीपीटी के लिए कुछ लोगों की भर्ती करने जा रहे हैं और मैंने भी इच्छा जता दी।'

निजी कारणों से पीएम की सुरक्षा से हटना पड़ा

निजी कारणों से पीएम की सुरक्षा से हटना पड़ा

शालिनी को एक बार फिर से 5 महीने तक कठिन प्रशिक्षण के दौर से गुजरना पड़ा और आखिकार वो सभ्रांत मानी जाने वाली सीपीटी का हिस्सा बनीं। वो कहती हैं, 'जब पीएम के साथ मेरी शुरुआती इंट्रोडक्टरी मीटिंग हुई तो मैंने खुद के बारे में बताया कि तमिलनाडु पुलिस से शालिनी.......यह मेरे लिए गर्व का क्षण था।' करीब चार तीन साल तक पीएम मोदी की नजदीकी सुरक्षा में रहने के बाद निजी वजहों से उन्हें इस चुनौतीपूर्ण फोर्स को छोड़ना पड़ गया।

आयरन लेडी कहकर बुलाते थे अफसर

आयरन लेडी कहकर बुलाते थे अफसर

दरअसल, शालिनी को अपनी मां की देखभाल करनी थी, जिसके चलते उन्हें 2018 में सीपीटी से निलना पड़ गया। वो कहती हैं, 'कई वरिष्ठ अधिकारी नहीं चाहते कि मैं छोड़कर जाऊं। मुझे वे आयरन लेडी कहकर बुलाते थे। लेकिन, मेरे पास कोई विकल्प नहीं था।' आज वही आयरन लेडी सिर्फ डंडे के सहारे अपनी ड्यूटी में लगी हुई हैं, हालांकि अपने काम के प्रति उनके समर्पण में कमी नहीं आई है।


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