क्यों अब अमेरिका में पीएम मोदी नहीं करेंगे मैडीसन स्क्वायर जैसा कोई इवेंट
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने पांचवें अमेरिकी दौरे के लिए 25 जून को वॉशिंगटन रवाना होंगे। 26 जून को उनकी अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से मुलाकात होगी। खास बात है कि इस बार पीएम मोदी के अमेरिकी दौरे पर कोई भी बड़ा कार्यक्रम उनके लिए नहीं होगा। इस बार का यह अमेरिकी दौरा पूरी तरह से बिजनेस दौरा होगा और पिछले सभी विदेशी दौरों से अलग होगा।

मोदी की अहम विदेश नीति का हिस्सा
प्रधानमंत्री बनने के बाद पहले दो वर्षों के अंदर पीएम मोदी अमेरिका, यूनाइटेड किंगडम, ऑस्ट्रलिया और यूएई जैसे देशों के दौरे पर गए और यहां पर बसे भारतीयों से रूबरू हुए। जो कार्यक्रम इस मकसद से आयोजित होते उनमें बड़ी संख्या में भारतीय इकट्ठा होते। विदेशी दौरों पर वहां पर बसे भारतीयों को संबोधित करना और उनसे बातचीत करना अब तक पीएम मोदी की विदेश नीति का सबसे अहम हिस्सा रहा है।

मैडीसन स्क्वायर से हुई शुरुआत
इसकी शुरुआत वर्ष 2014 में न्यूयॉर्क स्थित मैडीसन स्क्वायर गार्डन के इवेंट से हुई। इसके बाद ऑस्ट्रेलिया में पीएम मोदी ने सिडनी के एलफोंस एरिना में भारतीयों को संबोधित किया। ब्रिटेन की यात्रा पर गए तो वम्बले एरिना में भारतीयों से मुखातिब हुए। हर जगह पर मौजूद भारतीयों ने भी पीएम मोदी का दिल खोलकर स्वागत किया।

ह्यूस्टन का प्रोग्राम कैंसिल
इस बार पीएम मोदी का कार्यक्रम ह्यूस्टन में होना था लेकिन उसे कैंसिल कर दिया गया है। पिछले कुछ दिनों में अमेरिका ने एच1बी वीजा को लेकर जो सख्त अपनाई है, माना जा रहा है कि इसकी वजह से ही पीएम मोदी इस बार किसी भी बड़े कार्यक्रम का हिस्सा नहीं बनेंगे। राष्ट्रपति ट्रंप की नई वीजा नीति की वजह से भारत की आईटी कंपनियों और भारतीय प्रोफेशनल्स के बीच काफी चिंता है।

अमेरिका के बाद इजरायल
पीएम मोदी अमेरिका से आने के बाद जुलाई में इजरायल के पहले दौरे पर जाएंगे। इस दौरे पर हो सकता है कि पीएम मोदी इजरायल में एक बड़े कार्यक्रम के तहत भारतीयों को संबोधित करें। पीएमओ और बीजेपी की विदेशों में मौजूद ईकाइयां इस योजना पर काम कर रहे हैं। इजरायल में इस समय 80,000 भारतीय हैं। कुछ संख्या भारत के आईटी प्रोफेशनल्स की भी है।

ट्रंप के साथ केमेस्ट्री अहम
पीएम मोदी इस बार अमेरिकी यात्रा पर जा रहे हैं तो उनका पहला मकसद राष्ट्रपति ट्रंप के साथ उस तरह की केमेस्ट्री बनाना है जो पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा के साथ थी। पीएम मोदी ने बराक ओबामा से आठ बार मुलाकात की थी और इन मुलाकातों की वजह से भारत-अमेरिका संबंध एक नए स्तर पर पहुंचे थे।

मजबूत संबंध सबसे अहम
ट्रंप के साथ बातचीत में पीएम मोदी भारत-अमेरिका के संबंधों को और मजबूत करने की दिशा में बढ़ाना चाहते हैं। ट्रंप ने पिछले दिनों भारत के मसले पर यू-टर्न लिया है और पेरिस जलवायु समझौते से अमेरिका के बाहर होने के बाद उन्होंने भारत को दोषी ठहराया है।

सिर्फ आतंकवाद पर भारत के साथ ट्रंप
पीएम मोदी जब ट्रंप से बातचीत करेंगे तो उनके दिमाग में दो मुद्दे ही अहम होंगे, एच1बी वीजा और पेरिस जलवायु समझौता। अभी तक सिर्फ एक ही मुद्दा ऐसा है जिस पर ट्रंप भारत के साथ नजर आते हैं, वह है आतंकवाद का मुद्दा। ट्रंप ने रिपब्लिकन हिंदु महासभा और उसके नेता भारतीय उद्योगपति शलभ कुमार की ओर से चुनावों में मिले समर्थन की जमकर तारीफ की है।












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