'मन की बात' में पीएम मोदी ने किया जगन्नाथ रथ यात्रा का जिक्र, बताया धार्मिक महत्व

नई दिल्ली, 26 जून: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को अपने 'मन की बात' कार्यक्रम की जरिए पुरी की जगन्नाथ रथ यात्रा की जिक्र किया। पीएम मोदी की 'मन की बात' का यह 90वां एपिसोड था। इस दौरान उन्होंने 1975 में इंदिरा गांधी सरकार की तरफ से लगाई गई इमरजेंसी का जिक्र किया। साथ ही धार्मिक यात्राओं का महत्व बताते हुए कई विषय पर देशवासियों को संबोधित किया।

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    'मन की बात' में पीएम मोदी ने कहा कि अभी कुछ ही दिनों में 1 जुलाई से भगवान जगन्नाथ की प्रसिद्ध यात्रा शुरू होने जा रही है। ओड़िसा में, पुरी की यात्रा से तो हर देशवासी परिचित है। लोगों का प्रयास रहता है कि इस अवसर पर पुरी जाने का सौभाग्य मिले। दूसरे राज्यों में भी जगन्नाथ यात्रा खूब धूमधाम से निकाली जाती हैं। भगवान जगन्नाथ यात्रा आषाढ़ महीने की द्वितीया से शुरू होती है।

    पीएम मोदी ने आगे कहा कि हमारे ग्रंथों में 'आषाढस्य द्वितीयदिवसे...रथयात्रा', इस तरह संस्कृत श्लोकों में वर्णन मिलता है। गुजरात के अहमदाबाद में भी हर वर्ष आषाढ़ द्वितीया से रथयात्रा चलती है | मैं गुजरात में था, तो मुझे भी हर वर्ष इस यात्रा में सेवा का सौभाग्य मिलता था।

    'आपातकाल के काले दौर को नहीं भूलना चाहिए'

    मन की बात के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि आज जब देश आजादी की 75वीं वर्षगांठ मना रहा है, हमें आपातकाल के काले दौर को नहीं भूलना चाहिए। अमृत महोत्सव न केवल हमें विदेशी शासन से आजादी की कहानियां बताता है बल्कि हमें आजादी के 75 साल की यात्रा भी बताता है। मैं आज की पीढ़ी के नौजवानों से एक सवाल पूछना चाहता हूं और मेरा सवाल बहुत गंभीर है। क्या आपको पता है कि आपके माता-पिता जब आपकी उम्र के थे तब एक बार उनसे जीवन का भी अधिकार छीन लिया गया था। ये वर्षों पहले 1975 में जून की बात है जब इमरजेंसी लगाई गई थी। देश की अदालतें, हर संवैधानिक संस्था, प्रेस आदि सब पर नियंत्रण लगा दिया गया था। सेंसरशिप की ये हालत थी कि बिना स्वीकृति कुछ भी छापा नहीं जा सकता था। कई कोशिशों, हजारों गिरफ्तारियों और लाखों लोगों पर अत्याचार के बाद भी लोगों का लोकतंत्र से विश्वास कम नहीं हुआ। लोगों में सदियों से लोकतंत्र की जो भावना रग-रग में है अंत में जीत उसी की हुई। भारत के लोगों ने लोकतांत्रिक तरीके से ही इमरजेंसी को हटाकर वापस लोकतंत्र की स्थापना की।

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