ग्लासगो COP26: पीएम मोदी का पंचामृत फॉर्मूला, पूरे विश्व को दिया 'लाइफ' मंत्र

ग्लासगो, 01 नवंबर: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार रात को ग्लासगो में आयोजित 'वर्ल्ड लीडर समिट ऑफ कोप-26' को संबोधित किया। इस दौरान अपने संबोधन में पीएम मोदी ने क्लाइमेट चेंज पर 'पंचामृत' फॉर्मूल का जिक्र किया तो साथ ही दुनिया को दिया 'LIFE' मंत्र भी दिया। पढ़िए कोप-26 में पीएम मोदी का पूरा भाषण...

Prime Minister Narendra Modi

'पेरिस का आयोजन समिट नहीं बल्कि सेंटीमेंट'

वर्ल्ड लीडर समिट ऑफ कोप-26 को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि मेरे लिए पेरिस में हुआ आयोजन एक समिट नहीं बल्कि सेंटीमेंट था, एक कमिटमेंट था और भारत वो वादे विश्व से नहीं कर रहा था, बल्कि वो वादे सवा सौ करोड़ भारतवासी अपने आप से कर रहे थे। आज विश्व की आबादी का 17 प्रतिशत होने के बावजूद जिसकी इमिशन में दायित्व सिर्फ 5 प्रतिशत रही है, उस भारत ने अपना कर्तव्य पूरा करके दिखाने में कोई कोर कसर बाकी नहीं छोड़ी है।

'संगच्छध्वं संवदध्वं सं वो मनांसि जानताम्'

अपने भाषण पीएम मोदी ने कहा कि आज मैं आपके बीच उस भूमि का प्रतिनिधित्व कर रहा हूं, जिस भूमि ने हजारों वर्षों पहले ये मंत्र दिया था 'संगच्छध्वं संवदध्वं सं वो मनांसि जानताम्' आज 21वीं सदी में ये मंत्र और भी ज्यादा प्रासंगिक हो गया है। पीएम ने इस मंत्र का हिंदी अर्थ भी बताया, उन्होंने कहा कि 'संगच्छध्वं' यानी सभी साथ मिलकर चले, संवदध्वं यानी सभी मिलजुल कर आपस में संवाद करें और सं वो मनांसि जानताम् यानी सभी के मन भी आपस में मिले रहे।

'भारत रिन्यूएबल एनर्जी क्षमता में विश्व में चौथे नंबर पर'

पीएम मोदी ने आगे कहा कि आज जब मैं आपके बीच आया हूं तो भारत के ट्रैक रिकॉर्ड को भी लेकर आया हूं। मेरी बातें, सिर्फ शब्द नहीं हैं, ये भावी पीढ़ी के उज्जवल भविष्य का जयघोष हैं। आज भारत स्थापित रिन्यूएबल एनर्जी क्षमता में विश्व में चौथे नंबर पर है। विश्व की पूरी आबादी से भी अधिक यात्री, भारतीय रेल से हर वर्ष यात्रा करते हैं। इस विशाल रेलवे सिस्टम ने अपने आप को 2030 तक 'नेट जीरो' बनाने का लक्ष्य रखा है। अकेली इस पहल से सालाना 60 मिलियन टन एमिशन की कमी होगी।

मोदी ने दिया दुनिया को दिया 'LIFE' मंत्र

इसी के साथ पीएम मोदी ने कहा कि मैं आज आपके सामने एक, वन वर्ड मूवमेंट का प्रस्ताव रखता हूं। यह एक शब्द क्लाइमेट के संदर्भ में एक विश्व का मूल आधार बन सकता है, अधिष्ठान बन सकता है। ये एक शब्द है- लाइफ... एल, आई, एफ, ई, यानि लाइफस्टाइल फॉर एनवायरनमेंट।

क्लाइमेट चेंज पर 'पंचामृत' फॉर्मूल

वहीं उन्होंने कहा कि क्लाइमेट चेंज पर इस वैश्विक मंथन के बीच मैं भारत की ओर से, इस चुनौती से निपटने के लिए पांच अमृत तत्व रखना चाहता हूं, पंचामृत की सौगात देना चाहता हूं। पहला- भारत, 2030 तक अपनी गैर-जीवाश्म ऊर्जा क्षमता को 500 गीगावाट तक पहुंचाएगा। दूसरा- भारत, 2030 तक अपनी 50 प्रतिशत ऊर्जा आवश्यकताओं, नवीकरणीय ऊर्जा से पूरी करेगा। तीसरा- भारत अब से लेकर 2030 तक के कुल प्रोजेक्टेड कार्बन एमिशन में एक बिलियन टन की कमी करेगा। चौथा- 2030 तक भारत, अपनी अर्थव्यवस्था की कार्बन इंटेन्सिटी को 45 प्रतिशत से भी कम करेगा और पांचवा- वर्ष 2070 तक भारत, नेट जीरो का लक्ष्य हासिल करेगा।

वहीं अपने संबोधन में पीएम मोदी ने जोर देते हुए कहा कि जलवायु परिवर्तन कई विकासशील देशों के अस्तित्व के लिए एक बड़ा खतरा है। हमें दुनिया को बचाने के लिए बड़े कदम उठाने चाहिए। यह समय की मांग है और यह इस मंच की प्रासंगिकता को साबित करेगा। मुझे उम्मीद है कि ग्लासगो में लिए गए फैसले हमारी अगली पीढ़ियों के भविष्य को बचाएंगे।

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