PM Modi CM Meeting: PM मोदी राज्यों के CM के साथ कर रहे मीटिंग, ममता बनर्जी क्यों नहीं हुईं शामिल?
PM Modi CM Meeting: पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) 27 मार्च की शाम राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ एक अहम वर्चुअल बैठक की। इस मीटिंग में देश की सप्लाई व्यवस्था और आपात तैयारी की समीक्षा की गई। ईरान-इजरायल और अमेरिका में जारी जंग की वजह से दुनियाभर में आई एनर्जी संकट को लेकर सभी मुख्यमंत्रियों से तैयारियों के बारे में जायजा लिया गया।
वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए मुख्यमंत्रियों के साथ मीटिंग में पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी (Mamata Banerjee) समेत कुछ सीएम नहीं दिखे। ऐसे में सवाल है कि आखिर ममता बनर्जी, एमके स्टालिन समेत पांच राज्यों के सीएम बैठक में क्यों शामिल नहीं हुए। असल में इन सभी नेताओं के बैठक में शामिल न होने की वजह राजनीतिक नहीं, बल्कि चुनावी नियम हैं। जिन राज्यों में इस समय चुनाव हो रहे हैं, वहां आचार संहिता (Model Code of Conduct) लागू है। इसी कारण चुनाव वाले राज्यों के मुख्यमंत्रियों को इस बैठक से बाहर रखा गया।

सरकार के मुताबिक, इन राज्यों के लिए अलग से मुख्य सचिव स्तर की बैठक कैबिनेट सचिवालय के जरिए आयोजित की जाएगी, ताकि जरूरी समन्वय बना रहे और चुनावी नियमों का भी पालन हो। इसी वजह से पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा, तमिलनाडु सीएम एमके स्टालिन, केरल सीएम पिनाराई विजयन और पुडुचेरी सीएम एन. रंगासामी बैठक में शामिल नहीं हुए हैं। इन पांचों राज्यों में अप्रैल में चुनाव होने वाले हैं और वोटों की गिनती 4 मई को होगी।
क्यों बुलाई गई पीएम मोदी और सीएम की मीटिंग?
यह बैठक ऐसे समय पर बुलाई गई है जब पश्चिम एशिया में संघर्ष गहरा रहा है और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के बंद होने का खतरा भी मंडरा रहा है। यह रास्ता भारत के लिए तेल सप्लाई का बड़ा जरिया है। बैठक का साफ मकसद था कि अंतरराष्ट्रीय संकट के बावजूद भारत में पेट्रोल, डीजल, गैस और जरूरी चीजों की सप्लाई पर कोई असर न पड़े। प्रधानमंत्री ने राज्यों से अपील की कि वे जमीनी स्तर पर तैयारियां मजबूत रखें, ताकि आम लोगों को किसी तरह की परेशानी न हो।
प्रधानमंत्री मोदी ने इस स्थिति की तुलना कोविड-19 महामारी के दौर से की। उन्होंने कहा कि जैसे 2020 में केंद्र और राज्यों ने मिलकर काम किया था, वैसे ही इस बार भी एकजुट होकर काम करना जरूरी है। उन्होंने याद दिलाया कि कोरोना के समय लगातार मुख्यमंत्रियों के साथ बैठकें कर देश को संकट से बाहर निकाला गया था। अब फिर उसी तालमेल की जरूरत है।
सरकार का साफ संदेश: देश में लॉकडाउन नहीं लगेगा
इस बीच केंद्र सरकार ने साफ कर दिया है कि देश में लॉकडाउन लगाने की कोई योजना नहीं है। केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू समेत कई मंत्रियों ने ऐसी खबरों को अफवाह बताया है। इस बयान के बाद लोगों में फैली चिंता काफी हद तक कम हुई है, खासकर तब जब सोशल मीडिया पर "एनर्जी लॉकडाउन" जैसी बातें चल रही थीं।
पेट्रोल, डीजल और LPG पर सरकार की बड़ी बातें
- सरकार ने सप्लाई को लेकर कई अहम जानकारियां भी दीं। पश्चिम एशिया संकट के कारण कच्चे तेल की कीमतें जरूर बढ़ी हैं और सप्लाई चेन पर दबाव पड़ा है।
- लेकिन अच्छी बात यह है कि भारत के पास अगले दो महीनों के लिए पर्याप्त कच्चे तेल का स्टॉक मौजूद है। एलपीजी, एलएनजी और पीएनजी की सप्लाई सामान्य रूप से जारी है।
- सरकार ने यह भी बताया कि सभी रिफाइनरियां 100 प्रतिशत क्षमता पर काम कर रही हैं और एलपीजी उत्पादन में 40 प्रतिशत की बढ़ोतरी की गई है।
- कमर्शियल गैस सप्लाई को पहले कम किया गया था, लेकिन अब इसे बढ़ाकर 70 प्रतिशत तक कर दिया गया है। 14 मार्च से अब तक करीब 30,000 टन एलपीजी की सप्लाई की जा चुकी है, जिसमें रेस्टोरेंट और ढाबों को प्राथमिकता दी गई है।
- कुछ जगहों पर पेट्रोल पंपों पर लंबी कतारें देखी गईं, लेकिन सरकार ने साफ किया है कि देश में किसी भी तरह की कमी नहीं है। लोगों से अपील की गई है कि वे अफवाहों पर ध्यान न दें और सामान्य तरीके से खरीदारी करें।












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