PM Modi Birthday: मोदी के जन्मदिन पर 87000 लोगों ने किया रक्तदान, बना वर्ल्ड रिकॉर्ड
नई दिल्ली, 17 सितंबर: केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मंडाविया ने कहा कि शनिवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन पर शुरू हुए रक्तदान अभियान के पहले दिन 87,137 लोगों ने रक्तदान किया। जो अपने आप में एक विश्व रिकॉर्ड है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मंडाविया ने आज सफदरजंग अस्पताल में स्थापित एक शिविर में भी रक्तदान किया। उन्होंने नागरिकों से आरोग्य सेतु ऐप या ई-रक्तकोश पोर्टल पर रक्तदान करने के लिए 'रक्तदान अमृत महोत्सव' के तहत पंजीकरण करने का आग्रह किया, जो 1 अक्टूबर तक चलेगा।

पीएम मोदी के जन्मदिन मौके पर शुरू रक्तदान अभियान की जानकारी देते हुए मनसुख मंडाविया ने ट्वीट कर लिखा कि, नया विश्व कीर्तिमान!आज मुझे बताते हुए हर्ष है की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन पर रक्तदान अमृत महोत्सव के तहत 87 हज़ार से अधिक लोगो ने अब तक स्वेच्छा से रक्तदान किया है, जो की एक नया विश्व कीर्तिमान है। अपने प्रिय प्रधानसेवक को देश की तरफ से यह एक अमूल्य भेंट है।
मंडाविया ने अगले ट्वीट में लिखा कि, यह नया कीर्तिमान है, लेकिन गिनती अभी भी जारी है, संख्या और बढ़ रही है। पिछला रिकॉर्ड सबसे बड़े रक्तदान (कई स्थानों) में 87,059 प्रतिभागी शामिल हुए थे। इसे अखिल भारतीय तेरापंथ युवा परिषद (भारत) द्वारा 6 सितंबर 2014 को भारत के 300 शहरों में 556 रक्तदान शिविरों में हासिल किया गया था।
एक अधिकारी ने कहा कि देश भर में अब तक, 6,136 शिविर स्वीकृत किए गए हैं और लगभग 1,95,925 दाताओं ने पंजीकरण कराया है, 81,000 से अधिक लोगों ने रक्तदान किया है।
मांडविया ने कहा, रक्तदान एक महान काम है और हमारी समृद्ध संस्कृति तथा सेवा और सहयोग की परंपरा को देखते हुए मैं, सभी नागरिकों से आगे आने तथा देशभर में विशाल स्वैच्छिक रक्तदान अभियान - रक्तदान अमृत महोत्सव के तौर पर रक्त दान करने की अपील करता हूं। रक्तदान से न केवल राष्ट्रीय आवश्यकता पूरी होती है बल्कि यह समाज एवं मानवता के प्रति एक बड़ी सेवा भी है।
उन्होंने स्वैच्छिक रक्तदान के महत्व पर जोर देते हुए कहा, रक्तदान अमृत महोसत्व, आजादी का अमृत महोत्सव के जश्न समारोहों का हिस्सा है। मांडविया ने कहा कि भारत में 2021 के आंकड़ों के मुताबिक सालाना करीब 1.5 करोड़ यूनिट रक्त की आवश्यकता होती है। उन्होंने कहा कि हर दो सेकंड में भारत में एक मरीज को रक्त की आवश्यकता होती है और प्रत्येक तीन में से एक व्यक्ति को अपने जीवन में कभी न कभी रक्त की आवश्यकता पड़ती है।












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