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    पश्चिम बंगाल: आख़िर क्यों मचा है मोदी के दौरे से पहले घमासान?

    By Bbc Hindi
    PM Modi to address rally in Midnapore town on July 16, TMC Ready for counter attack
    भाजपा अध्यक्ष अमित शाह अपने 'मिशन बंगाल' के तहत पिछले महीने यहां पश्चिम बंगाल के नेताओं को राज्य की 42 लोकसभा सीटों में से कम से कम 22 पर जीत का लक्ष्य दे गए थे.

    अब उसी लक्ष्य की दिशा में पहला क़दम बढ़ाने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 16 जुलाई को राज्य के मेदिनीपुर ज़िले में एक किसान कल्याण रैली को संबोधित करेंगे.

    लेकिन मोदी के इस दौरे से पहले सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस और भाजपा के बीच पोस्टरयुद्ध और वाक युद्ध शुरू हो गया है.

    तृणमूल कांग्रेस ने उस इलाक़े को ममता बनर्जी के पोस्टरों से पाटना शुरू कर दिया है जहां 16 जुलाई को मोदी की सभा होनी है.

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    'मिशन बंगाल' अभियान

    वैसे, तृणमूल की दलील है कि वह 21 जुलाई को होने वाली पार्टी की शहीद रैली का प्रचार कर रही है. लेकिन दरअसल उसके निशाने पर मोदी हैं.

    पार्टी का कहना है कि खुद भाजपा के शासन वाले महाराष्ट्र में किसानों की आत्महत्याएं थमने का नाम नहीं ले रही हैं और मोदी यहां कृषक कल्याण समावेश यानी रैली के नाम पर किसानों का हितैषी बनने का प्रयास कर रहे हैं.

    पार्टी का आरोप है कि भाजपा यहां ममता के ख़िलाफ़ अफ़वाह फैलाने और धर्म के नाम पर लोगों को बांटने की राजनीति के तहत ही मोदी को ला रही है.

    दूसरी ओर, राजनीतिक पर्यवेक्षकों का कहना है कि जंगल महल इलाक़े में शामिल मेदिनीपुर ज़िले में बीते पंचायत चुनावों में मिली कामयाबी के सहारे अपनी ज़मीन और मज़बूत करने के लिए ही पार्टी मोदी को यहां ला रही है. दरअसल, ये उसके 'मिशन बंगाल' अभियान की शुरुआत है.

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    शाह और मोदी की रैलियां

    'मिशन बंगाल' के तहत पार्टी के नेताओं और कार्यकर्ताओं में नया जोश भरने के लिए केंद्रीय मंत्रियों और भाजपा नेताओं के दौरे अचानक बढ़ गए हैं.

    बीते महीने के आख़िर में अमित शाह आए थे. उसके बाद दो दिन सुरेश प्रभु कोलकाता में थे. उसके अगले दिन ही पीयूष गोयल कोलकाता पहुंचे.

    जल्दी ही कुछ अन्य केंद्रीय नेताओं के भी यहां आने का कार्यक्रम है.

    पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष दिलीप घोष बताते हैं, "इस साल प्रधानमंत्री राज्य के विभिन्न हिस्सों में कम से कम पांच और रैलियों को संबोधित करेंगे. इस लिहाज से देखें तो शायद अब साल के बाक़ी महीनों में मोदी और अमित शाह जैसे नेता कई बार बंगाल का दौरा करेंगे. अमित शाह अगस्त के पहले सप्ताह में एक बार फिर बंगाल के दो-दिवसीय दौरे पर आ सकते हैं."

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    दौरे पर घमासान

    प्रधानमंत्री मोदी मेदिनीपुर से लगभग 20 किमी दूर कलाईकुंडा एयरबेस से हेलीकॉप्टर से सभास्थल तक पहुंचेंगे.

    उनके इस दौरे से पहले मेदिनीपुर में भाजपा और तृणमूल कांग्रेस के बीच घमासान मचा हुआ है.

    इन दोनों राजनीतिक दलों में पोस्टरों और बैनरों के ज़रिए एक-दूसरे को पछाड़ने की होड़ मच गई है.

    इस सप्ताह मेदिनीपुर का दौरा करने वाले तृणमूल कांग्रेस के महासचिव सुब्रत बख्शी ने कार्यकर्ताओं को मोदी के दौरे से पहले पूरे शहर को ममता बनर्जी को पोस्टरों और कटआउटों से पाटने का निर्देश दिया है.

    पोस्टरों की लड़ाई

    इससे पहले तृणमूल कांग्रेस ने अमित शाह के बीरभूम दौरे के समय भी यही रणनीति अपनाई थी.

    यहां 16 जुलाई को मोदी की रैली से पहले तृणमूल कांग्रेस ने शहर और आसपास के इलाकों में रैलियां आयोजित करने की योजना बनाई है ताकि मोदी के दौरे की अहमियत कम की जा सके. तृणमूल कांग्रेस के मेदिनीपुर ज़िला अध्यक्ष अजित माइती कहते हैं, "हम पूरे शहर में अंग्रेजी, बांग्ला और हिंदी तीनों भाषाओं में पोस्टर और बैनर लगाएंगे ताकि सब लोग उनको पढ़-समझ सकें."

    पार्टी का दावा है कि वह 21 जुलाई को होने वाली सालाना शहीद रैली की तैयारी कर रही है.

    माइती कहते हैं, "किसानों का हित तो बहाना है. मोदी अगले लोकसभा चुनावों को ध्यान में रखते हुए पार्टी का अभियान शुरू करने यहां आ रहे हैं."

    मोदी की रैली

    लेकिन भाजपा तृणमूल कांग्रेस की इस रणनीति से परेशान नहीं है.

    प्रदेश अध्यक्ष दिलीप घोष ने सभास्थल का दौरा करने के बाद पत्रकारों से कहा, "यह कोई नई बात नहीं है. भाजपा और मोदी का नाम सुनते ही तृणमूल कांग्रेस नेताओं के पेट में दर्द होने लगता है. वे जो चाहे करें, हमारी सेहत पर उससे कोई फर्क नहीं पड़ेगा."

    पार्टी का दावा है कि मोदी की सभा में दो लाख से ज़्यादा की भीड़ जुटेगी. घोष कहते हैं, "खरीफ़ का समर्थन मूल्य बढ़ाने के लिए मोदी का अभिनंदन करना ही रैली का प्रमुख मक़सद है."

    दूसरी ओर, तृणमूल कांग्रेस ने भाजपा के इस कथन को ही अपने प्रचार का हथियार बना लिया है.

    भाजपा और तृणमूल

    तृणमूल सांसद मानस भुइयां कहते हैं, "मोदी के किसानों का हितैषी होने का दावा किया जा रहा है. लेकिन भाजपा के शासनकाल में देश में 14 हज़ार किसानों ने आत्महत्या की है. महाराष्ट्र में सैकड़ों किसान आत्महत्या कर चुके हैं. ऐसे में उनके दौरे का मक़सद हास्यास्पद ही है."

    अजित माइती कहते हैं, "किसान कल्याण रैली तो महाराष्ट्र जैसे राज्य में होनी चाहिए थी जहां सबसे ज़्यादाा किसानों ने आत्महत्या की है. बंगाल में इसके आयोजन का कोई औचित्य नहीं नजर आता."

    भाजपा और तृणमूल कांग्रेस के बीच बढ़ती खींचतान की वजह से मेदिनीपुर इलाक़ा फ़िलहाल आरोप-प्रत्यारोप के केंद्र में है.

    दोनों राजनीतिक दल अपनी कमीज़ को एक-दूसरे से सफ़ेद बताने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं.

    ऐसे में मोदी के दौरे से पहले इस घमासान के और तेज़ होने का अंदेशा है.

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    BBC Hindi
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    English summary
    PM Modi to address rally in Midnapore town on July 16

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