कौन हैं मोदी कैबिनेट 3.0 के अमीर मंत्री? इस मिनिस्टर के पास बेशुमार दौलत, रहते हैं 400 कमरे वाले महल में
Jyotiraditya Scindia Richest Minister: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली मंत्रिपरिषद 3.0 में ज्योतिरादित्य सिंधिया ने भी केंद्रीय मंत्री के तौर पर शपथ ली है। चार साल पहले कांग्रेस छोड़ने वाले सिंधिया ने मोदी कैबिनेट में दूसरी बार शपथ ली है।
पीएम मोदी की कैबिनेट में उनके अलावा 30 मंत्री शामिल हुए है। मोदी कैबिनेट 3.0 में पांच मंत्रियों (स्वतंत्र प्रभार) को जगह मिली। वहीं इसके अलावा 36 राज्य मंत्रियों को शपथ दिलाई गई। कैबिनेट का नाम सामने आते ही इस बात की चर्चा होने लगी है कि मोदी कैबिनेट के सबसे अमीर मंत्री कौन हैं।

मोदी कैबिनेट में इस बार कई बेशुमार दौलत वाले नेताओं ने मंत्री पद की शपथ ली है। लेकिन उनमें से सबसे ज्यादा चर्चा राजघराने से आने वाले ज्योतिरादित्य सिंधिया की है। ज्योतिरादित्य सिंधिया खानदानी अमीर हैं। उनके पास अथाह पैतृक संपत्ति है। नए मोदी कैबिनेट में संधिया सबसे अमीर मंत्रियों में से एक हैं।
ज्योतिरादित्य सिंधिया और उनकी पत्नी प्रियदर्शिनी राजे सिंधिया हमेशा अपनी संपत्ति और लैविश लाइफ स्टाइल को लेकर चर्चा में रहते हैं। राज घराने परिवार से संबंध रखने वाले ज्योतिरादित्य सिंधिया के माता-पिता ग्वालियर के पूर्व शासक माधवराव सिंधिया और माधवी राजे सिंधिया थे। सिंधिया राज घराना एक मराठा रियासत था।

Jyotiraditya Scindia Net Worth: ज्योतिरादित्य सिंधिया की संपत्ति?
लोकसभा चुनाव 2024 के चुनावी हलफनामे के मुताबिक ज्योतिरादित्य सिंधिया की कुल संपत्ति 424.77 करोड़ रुपये है। सिंधिया के 42 लाख की देनदारियां हैं। हालांकि चुनावी हलफनामे में सिंधिया ने अपनी पैतृक संपत्ति का जिक्र नहीं किया है।
सिंधिया ग्वालियर में सिंधिया राजघराने की ऐतिहासिक संपत्ति जय विलास पैलेस के मालिक हैं। इसे सिंधिया पैलेस भी कहते हैं। जय विलास महल की कीमत 4,000 करोड़ रुपये बताई जाती है। जय विलास पैलेस में 400 कमरे हैं। इसे 1874 में जब बनवाया गया था, तब भी इसकी कीमत करोड़ों में थी।
ज्योतिरादित्य सिंधिया के पास 1960 की BMW इसेटा कार भी है। ज्योतिरादित्य सिंधिया के पैलेस में कई ऐसी बेशकीमती चीजें हैं, जिसका मूल्याकंन करना मुश्किल है। कई रिपोर्ट में कहा गया है कि सिंधिया के पास अथाह पैतृक संपत्ति है। उनकी कई संपत्तियों का मामला कोर्ट में भी चल रहा है।

ज्योतिरादित्य सिंधिया का राजनीतिक सफर
53 वर्षीय सिंधिया ने चार साल पहले कांग्रेस छोड़ दी थी, जो बीजेपी के साथ उनका दूसरा कैबिनेट कार्यकाल है। 2024 के लोकसभा चुनावों में सिंधिया गुना से रिकॉर्ड 5 लाख से अधिक मतों के अंतर से जीते। उन्होंने गुना सीट पर कांग्रेस के यादवेंद्र राव देशराज सिंह को 5,40,929 मतों से हराया। भाजपा ने मध्य प्रदेश की सभी 29 सीटें जीतीं, जिसमें कांग्रेस का गढ़ छिंदवाड़ा भी शामिल है।
सिंधिया ने मोदी सरकार के तीसरे चरण में कैबिनेट मंत्री के रूप में शपथ ली। 2020 में भाजपा में शामिल किए जाने के बाद उन्होंने मध्य प्रदेश में कांग्रेस सरकार को गिराने में भाजपा की मदद की थी और खुद केंद्र में गरिक उड्डयन विभाग के मंत्री बनें।
सिंधिया का परिवार कई पीढ़ियों से गुना सीट का प्रतिनिधित्व करता रहा है। उनकी दादी स्वर्गीय विजयाराजे सिंधिया और उनके पिता स्वर्गीय माधवराव सिंधिया पहले इस सीट से सांसद थे। विजयाराजे सिंधिया जनसंघ की संस्थापक सदस्य थीं।
1 जनवरी 1971 को जन्मे और हार्वर्ड तथा स्टैनफोर्ड से शिक्षा प्राप्त करने वाले सिंधिया ने 2002 में अपने पिता की अचानक मृत्यु के बाद राजनीति में आए। उन्होंने कांग्रेस नेता के रूप में गुना से 2004, 2009 और 2014 में आम चुनाव जीते।

सिंधिया का कांग्रेस से भाजपा की ओर झुकाव
सिंधिया 2007 से 2014 तक यूपीए सरकार में रहे। 2014 में फिर से चुनाव जीतने के बावजूद, वह 2019 में सीट हार गए। कांग्रेस से असंतोष के कारण 2020 में वे भाजपा में शामिल हो गए। उन्होंने मध्य प्रदेश में कांग्रेस सरकार को गिराने में अहम भूमिका निभाई।
सिंधिया के पारिवारिक संबंधों में उनकी मां नेपाल के शाही परिवार से और उनकी पत्नी प्रियदर्शिनी राजे बड़ौदा के गायकवाड़ परिवार से हैं। प्रधानमंत्री मोदी ने उन्हें "गुजरात का दामाद" कहते हैं।
विधानसभा चुनाव में भी सिंधिया ने निभाई अहम भूमिका
2023 के विधानसभा चुनावों के दौरान सिंधिया ने ग्वालियर-चंबल क्षेत्र की 34 में से 18 सीटें भाजपा को दिला दीं, जो 2018 में सात थीं। इस सफलता ने भाजपा में उनके महत्व को मजबूत किया।
कांग्रेस से भाजपा तक की सिंधिया की यात्रा उनकी राजनीतिक अनुकूलनशीलता और प्रधानमंत्री मोदी और अमित शाह सहित भाजपा नेतृत्व के प्रति उनके विश्वास को दर्शाती है।












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