Balen Shah China Card: नेपाल में घुस रहा है चीन! बालेन शाह के फैसले से भारत की बढ़ सकती है टेंशन

Balen Shah China Card: नेपाल की राजनीति में मचे उथल-पुथल के बीच प्रधानमंत्री बालेन शाह ने 'चीन कार्ड' खेलकर दक्षिण एशिया की भू-राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है। काठमांडू में जून के पहले सप्ताह में होने वाली उच्च स्तरीय बैठक यह संकेत दे रही है कि नेपाल अब भारत पर अपनी निर्भरता कम करने के लिए बीजिंग के साथ ठप पड़ी परियोजनाओं, विशेषकर बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव (BRI) के तहत बुनियादी ढांचों को रफ्तार देने के मूड में है।

विशेषज्ञ इसे बालेन शाह की एक सोची-समझी कूटनीतिक चाल मान रहे हैं। एक ओर जहां वे चीन से भारी निवेश और कनेक्टिविटी की उम्मीद कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर इसे भारत से बेहतर सौदेबाजी करने और क्षेत्रीय संतुलन बनाने के प्रयास के रूप में देखा जा रहा है।

Balen Shah China Card

Nepal China Projects: क्या है मामला?

नेपाल और चीन के बीच जून के पहले सप्ताह (प्रस्तावित 2 जून) में एक महत्वपूर्ण बैठक होने वाली है। इसका मुख्य उद्देश्य नेपाल में चीनी निवेश वाली उन 20 से अधिक परियोजनाओं की बाधाओं को दूर करना है जो लंबे समय से अटकी हुई हैं। इसमें रेलवे, ट्रांसमिशन लाइन और सड़क निर्माण जैसे प्रोजेक्ट्स शामिल हैं। नेपाली विदेश मंत्रालय ने विभिन्न विभागों से इन परियोजनाओं की वर्तमान स्थिति और समस्याओं पर रिपोर्ट मांगी है ताकि द्विपक्षीय बातचीत में ठोस समाधान निकाला जा सके।

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BRI Nepal Projects: चीन से बढ़ती करीबी

हाल के महीनों में नेपाल और चीन के बीच कूटनीतिक सक्रियता 'ताबड़तोड़' बढ़ी है। प्रधानमंत्री बालेन शाह की सरकार चीन के साथ BRI के तहत 10 प्रमुख परियोजनाओं को लागू करने पर जोर दे रही है। इसमें केरुंग-काठमांडू सीमा-पार रेलवे और रिंग रोड सुधार जैसे बड़े बुनियादी ढांचे शामिल हैं। नेपाल का झुकाव चीन की ओर बढ़ने का एक बड़ा कारण वहां से मिलने वाला अनुदान (Grant) और बिना ब्याज वाला कर्ज है, जिसे बालेन शाह अपनी विकासवादी छवि को चमकाने के लिए इस्तेमाल करना चाहते हैं।

भारत के लिए क्या है खतरा?

नेपाल की चीन से यह 'इश्कबाजी' भारत के लिए रणनीतिक और सुरक्षा की दृष्टि से चिंता का विषय है।

सुरक्षा चिंताएं: हिमालयी क्षेत्र में चीनी रेलवे और सड़कों का जाल बिछने से भारतीय सीमा के करीब चीन की पहुंच आसान हो जाएगी।

रणनीतिक दबाव: विशेषज्ञ मानते हैं कि नेपाल अक्सर 'चीन कार्ड' का इस्तेमाल भारत पर मनोवैज्ञानिक दबाव बनाने के लिए करता है ताकि भारत से अधिक आर्थिक और राजनीतिक रियायतें ले सके।

क्षेत्रीय प्रभाव: यदि नेपाल पूरी तरह चीन के प्रभाव में आता है, तो दक्षिण एशिया में भारत की पारंपरिक 'बड़े भाई' वाली भूमिका को चुनौती मिल सकती है।

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कर्ज के जाल का डर (Debt Trap)

नेपाल के भीतर और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर यह बड़ा सवाल है कि क्या नेपाल चीन के 'सफेद हाथी' बन चुके प्रोजेक्ट्स का बोझ उठा पाएगा? श्रीलंका के हंबनटोटा बंदरगाह और पाकिस्तान की बदहाली का उदाहरण सामने है। नेपाल का पोखरा इंटरनेशनल एयरपोर्ट पहले से ही अपनी ऑपरेशनल लागत नहीं निकाल पा रहा है। अगर बालेन शाह ने बहुत सख्त शर्तों पर चीनी कर्ज लिया, तो भविष्य में नेपाल की संप्रभुता के लिए खतरा पैदा हो सकता है और वह कर्ज चुकाने के बदले अपनी जमीन चीन को सौंपने पर मजबूर हो सकता है।

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