PM Kisan Scheme: पीएम किसान के 1.54 करोड़ ट्रांजेक्शन कैसे हुए फेल? खाते में कब आती है अटकी हुई किस्त?
PM Kisan Scheme: प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि (PM-KISAN) योजना देश के किसानों के लिए राहत और भरोसे का जरिया बनी हुई है। हर साल करोड़ों किसानों के खाते में 6,000 रुपये सीधे भेजे जाते हैं। लेकिन पिछले कुछ सालों में तकनीकी और जानकारी संबंधी कारणों से कई ट्रांजैक्शन फेल भी हुए। संसद में इस पर सवाल उठे।
21वीं किस्त के साथ योजना ने रिकॉर्ड सफलता दर हासिल की है। डिजिटल सुधारों और आधार लिंकिंग के कारण अब भुगतान प्रक्रिया पहले से ज्यादा पारदर्शी और भरोसेमंद हो गई है। किसानों के लिए यह साबित करता है कि तकनीक के जरिए आर्थिक मदद समय पर और सीधे उनके खाते में पहुंच सकती है। सांसदों ने सरकार से पूछा कि पिछले पांच वर्षों में कितने भुगतान हुए, इनमें कितने फेल हुए और किन राज्यों में समस्या ज्यादा रही। खासकर बिहार, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के आंकड़े मांगे गए।

कितना पैसा पहुंचा किसानों के खाते में
कृषि राज्य मंत्री रामनाथ ठाकुर ने बताया कि फरवरी 2019 में शुरू हुई पीएम-किसान योजना के तहत अब तक 21 किस्तों में 4.09 लाख करोड़ रुपये किसानों के खातों में भेजे जा चुके हैं। योजना पूरी तरह डिजिटल है और पैसा सीधे बैंक खातों में DBT के जरिए जाता है।
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फेल ट्रांजैक्शन की वजहें
सरकार के मुताबिक, वित्त वर्ष 2020-21 से 2024-25 के बीच 1 करोड़ 54 लाख 95 हजार 766 ट्रांजैक्शन फेल हुए। जबकि इस दौरान कुल 155 करोड़ से ज्यादा भुगतान किए गए। शुरुआती सालों में फेल ट्रांजैक्शन के कारण ज्यादातर तकनीकी और जानकारी संबंधी थे, जैसे:
- किसान के नाम और बैंक खाते के नाम में अंतर
- गलत खाता नंबर या IFSC कोड
- बंद या निष्क्रिय बैंक खाता
- एक ही खाते से कई लाभार्थी जुड़े होना
- संस्थागत खातों का उपयोग
तकनीकी सुधार से बढ़ी सफलता
13वीं किस्त से सरकार ने पेमेंट सिस्टम को आधार पेमेंट ब्रिज (Aadhaar Payment Bridge - APB) पर शिफ्ट किया। PFMS, NPCI और बैंकों के साथ मिलकर विशेष अभियान चलाए गए। अब फेल ट्रांजैक्शन की संख्या काफी कम हो गई है। फेल होने की मुख्य वजहें अब यह हैं:
- आधार का बैंक खाते से लिंक न होना
- आधार NPCI मैपर से हट जाना
- बैंक खाता बंद हो जाना
किसानों तक पैसा फिर भी पहुंचता है
सरकार ने बताया कि पीएम-किसान योजना में अगर किसी कारणवश कोई ट्रांजैक्शन फेल हो जाता है, तो इसकी पूरी जानकारी संबंधित किसान को तुरंत दी जाती है। किसान अपने मोबाइल या कंप्यूटर के माध्यम से यह देख सकते हैं कि उनके भुगतान में समस्या क्यों आई और किस कारण से ट्रांजैक्शन सफल नहीं हो पाया। इसके बाद किसान अपनी बैंक या आधार संबंधित जानकारी को सही कर सकते हैं, जैसे खाता नंबर, IFSC कोड, या आधार लिंकिंग।
जैसे ही किसान अपनी जानकारी अपडेट कर देता है, बैंक और सिस्टम द्वारा भुगतान को दोबारा प्रोसेस किया जाता है। इस प्रक्रिया के पूरा होते ही पैसे सीधे किसान के खाते में पहुंच जाते हैं, जिससे यह सुनिश्चित होता है कि कोई भी पात्र किसान आर्थिक मदद से वंचित न रहे। सरकार ने यह भी कहा कि इस प्रणाली से पारदर्शिता बढ़ी है और किसान अपने भुगतान की स्थिति को आसानी से ट्रैक कर सकते हैं।
21वीं किस्त में सफलता का रिकॉर्ड
हाल ही में जारी 21वीं किस्त के तहत 99.86% ट्रांजैक्शन सफल रहे। यह योजना की शुरुआत से सबसे अधिक सफलता दर है। सरकार का दावा है कि अब पीएम-किसान की डिजिटल व्यवस्था काफी मजबूत हो चुकी है और भविष्य में और अधिक पारदर्शिता व भरोसेमंद भुगतान सुनिश्चित किया जाएगा।अब किसानों को पीएम किसान की 22वीं किस्त का इंतजार है। उम्मीद है की यह किस्त फरवरी 2026 में जारी की जाएगी।












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