PM Awas Yojana में बड़ी धांधली का खुलासा, पात्रता जांचे बिना दे दिए आवास योजना के पैसे, अब होगी क्या कार्रवाई?
PM Awas Yojana: उत्तर प्रदेश में प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण (PMAY-G) में बड़ा घोटाला सामने आया है। जांच में पता चला कि मिठौरा ब्लॉक के हरखोड़ा गांव में चार ऐसे लोग, जो योजना के पात्र नहीं थे, उन्हें लाखों रुपये का लाभ मिल गया। इस मामले ने गांव के लोगों में हैरानी और गुस्सा दोनों पैदा कर दिया है। जिला प्रशासन ने तुरंत कार्रवाई करते हुए ग्राम प्रधान अनीता देवी और तत्कालीन सचिव जयहिंद शर्मा को नोटिस भेजा है।
ग्राम प्रधान अनीता देवी को नोटिस जारी कर के 15 दिनों के भीतर स्पष्टीकरण देने को कहा गया है। डीएम ने चेतावनी दी है कि अगर संतोषजनक जवाब नहीं मिला तो प्रधान के वित्तीय और प्रशासनिक अधिकार अतिक्रमित कर एक तीन सदस्यीय समिति गठित कर दी जाएगी। इस मामले की जांच ग्रामवासी की शिकायत पर शुरू हुई थी और अब यह पूरे ब्लॉक के लिए सतर्कता का संदेश बन गई है।

प्रधान को चेतावनी, प्रशासनिक अधिकार हो सकते हैं सीमित
जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया है कि अगर प्रधान का जवाब संतोषजनक नहीं पाया गया तो पंचायत राज अधिनियम की धारा 95(जी) के तहत उनकी वित्तीय और प्रशासनिक शक्तियों पर रोक लगाई जाएगी और एक तीन सदस्यीय समिति गठित की जाएगी। इसके अलावा तत्कालीन सचिव जयहिंद शर्मा को भी नोटिस भेजा गया है, ताकि उनके जिम्मेदारियों की जांच की जा सके।
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ग्रामवासी की शिकायत पर शुरू हुई जांच
दैनिक जागरण की एक रिपोर्ट के अनुसार, गांव के निवासी मेराजुद्दीन की शिकायत पर जिला प्रशासन ने जांच शुरू की। जिला ग्राम्य विकास अभिकरण की रिपोर्ट और परियोजना निदेशक के निर्देश के बाद जिला कृषि अधिकारी ने कुल नौ आवासों का निरीक्षण किया। जांच में पता चला कि चार लाभार्थी-सुमन वर्मा, अमरावती, त्रिभुवन और रमनी-अपात्र हैं।
अपात्र लाभार्थियों को भुगतान
जांच में यह भी खुलासा हुआ कि इन चारों अपात्र व्यक्तियों को योजना के तहत आवास की तीनों किस्तें पहले ही जारी की जा चुकी थीं। हर लाभार्थी को 1,20,000 रुपये की राशि ट्रांसफर की गई, जिससे कुल 4,80,000 रुपये अपात्र व्यक्तियों के खाते में चले गए।
पात्रता जांच में बड़ी लापरवाही
जांच से यह भी सामने आया कि भुगतान शुरू करने से पहले लाभार्थियों की पात्रता की पुष्टि नहीं की गई थी, जो प्रशासन की बड़ी लापरवाही मानी जा रही है। डीपीआरओ श्रेया मिश्रा ने बताया कि प्रधान के साथ-साथ तत्कालीन सचिव की जिम्मेदारी भी तय की जाएगी।
आगे की कार्रवाई पर नजर
जिलाधिकारी ने साफ किया है कि अगर ग्राम प्रधान का जवाब संतोषजनक नहीं पाया गया तो उनके वित्तीय और प्रशासनिक अधिकार पर रोक लगाई जाएगी और तीन सदस्यीय समिति उनके स्थान पर कार्यभार संभालेगी। मामले की गहनता और राशि की बड़ी रकम को देखते हुए जिला प्रशासन ने सभी संबंधित अधिकारियों को कड़ी चेतावनी भी दी है। गांव में इस मामले को लेकर लोगों में चिंता और चर्चा बढ़ गई है। ग्रामीण चाहते हैं कि ऐसे मामलों में जिम्मेदारों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए ताकि योजना का लाभ सही लोगों तक पहुंचे।
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