PM-JANMAN योजना क्या है? 'विकसित भारत संकल्प यात्रा' के बीच इसकी अहमियत समझिए

लोकसभा चुनावों से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार अपनी हर योजना के लाभार्थियों तक सीधे पहुंचने की कोशिश में जुटी हुई है। इसके लिए पहले से 'विकसित भारत संकल्प यात्रा' चल रही थी, अब 'पीएम-जनमन योजना' (PM-JANMAN scheme) के तहत पहली किश्त भी खुद पीएम मोदी जारी कर दी है।

पिछले कुछ चुनावों से यह लगातार देखा जा रहा है कि देश का आदिवासी वोटर बीजेपी की ओर शिफ्ट हो रहा है। ऐसी स्थिति में लोकसभा चुनावों से पहले बेहद गरीब आदिवासियों को पक्के मकान के लिए सीधे उनके खाते में पैसे देने के राजनीतिक संदेश समझा जा सकता है।

pm janman and viksit bharat sankalp yatra

प्राण-प्रतिष्ठा की तैयारी के बीच 'पीएम-जनमन' की पहली किश्त जारी
खास बात ये है कि सोमवार को पीएम मोदी ने 'पीएम-जनमन योजना' की पहली किश्त ऐसे समय में जारी की है, जब पूरा देश अयोध्या में भगवान राम के प्राण-प्रतिष्ठा के उमंग में डूबा हुआ है। भगवान राम के लिए माता शबरी का इंतजार और उनका मीठे बेरों से सत्कार पवित्र श्रीराम कथा का एक अभिन्न हिस्सा है।

'पीएम-जनमन' योजना क्या है?
पीएम मोदी ने इस मौके पर त्रेता युग की उस आदर्श आदिवासी महिला के बारे में यही कहा कि माता शबरी के बिना रामायण अधूरा है। 'पीएम-जनमन' 'प्रधानमंत्री जनजातीय आदिवासी न्याय महा अभियान' का छोटा रूप है।

'पीएम-जनमन' योजना पिछले साल 15 नवंबर को जनजातीय गौरव दिवस के दिन लॉन्च की गई थी। इस योजना के तहत देश में आदिवासियों के कल्याण को ध्यान में रखते हुए विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं के लिए 24,000 करोड़ का बजट आवंटित किया गया है।

एक लाख आदिवासियों को पक्के घरों के निर्माण के लिए मिले पैसे
इसी के तहत सोमवार को पीएम मोदी ने पीएम आवास योजना-ग्रामीण के अंदर पक्के घरों के निर्माण के लिए विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूह (PVVTGs) के 1 लाख लाभार्थियों के लिए 540 करोड़ रुपए की पहली किश्त जारी की है।

इसमें हर आदिवासी लाभार्थियों को बिजली, गैस कनेक्शन, शौचालय और पाइप से पानी के कनेक्शन के साथ पक्के घरों के निर्माण के लिए 2.5 लाख रुपए दिए गए हैं।

शबरी, अयोध्या से आदिवासियों तक जुड़े तार
इस मौके पर प्रधानमंत्री ने कहा कि 'एक ओर, अयोध्या में दिवाली मनाई जा रही है, वहीं अत्यंत पिछड़े आदिवासी समाज के 1 लाख लोग भी दिवाली मना रहे हैं।' प्रधानमंत्री ने 'पीएम-जनमन' जैसी योजना की शुरुआत के लिए राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के मार्गदर्शन की भी सराहना की।

उनके मुताबिक जब भी राष्ट्रपति से इस बारे में बातचीत हुई तो उसी बैकग्राउंड से होने की वजह से उन्होंने आदिवासियों के सामने आने वाली परेशानियों के बारें में जानकारियों साझा की हैं।

करीब दो महीने से चल रही है देशव्यापी 'विकसित भारत संकल्प यात्रा'
पीएम-जनमन, माता शबरी का जिक्र और अयोध्या में राम मंदिर प्राण-प्रतिष्ठा की तैयारी, यह सब तब हो रहा है, जब केंद्र सरकार पिछले करीब दो महीनों से देशव्यापी 'विकसित भारत संकल्प यात्रा' निकाली हुई है।

करीब 14 करोड़ लोगों तक पहुंची 'विकसित भारत संकल्प यात्रा'
इतने दिनों में ही यह यात्रा देशभर के लगभग 14 करोड़ लोगों तक पहुंच चुकी है। इस यात्रा का मकसद केंद्र सरकार की विभिन्न योजनाओं के बारे में पूरे देश में जागरूकता पैदा करना है, ताकि इसके लाभ लेने से एक भी हकदार वंचित न रह जाए।

'विकसित भारत संकल्प यात्रा' का मकसद
'विकसित भारत संकल्प यात्रा' देश के सभी ग्राम पंचायतों, नगर पंचायतों, शहरी स्थानीय निकायों से होकर गुजर रही है। इसका मूल उद्देश्य है,
समाज के उन कमजोर लोगों तक पहुंचना जो विभिन्न योजनाओं के लाभ पाने के योग्य हैं, लेकिन अभी तक वह उसका फायदा नहीं उठा पाए हैं।

सरकार की कल्याणकारी योजनाओं के बारे में जानकारी देना और उसको लेकर जागरूकता पैदा करना। लाभार्थियों के अनुभवों और उनकी निजी कहानियों से सरकार के सीखना। यात्रा के दौरान संभावित लाभार्थियों को जोड़ा भी जा रहा है।

इस यात्रा में सरकार के विभिन्न मंत्रालय, राज्य सरकारों और अन्य संगठनों और संस्थाओं को शामिल किया गया है, ताकि भागीदारी बढ़ाकर देश के नागरिकों को लाभ पहुएंचाया जा सके और विकसित भारत का संकल्प पूरा हो सके।

विकसित भारत संकल्प यात्रा में केंद्र सरकार की सभी प्रमुख योजनाओं को शामिल किया गया है, जिसमें तीन श्रेणियां शामिल हैं। आदिवासी, ग्रामीण भारत तक पहुंच और शहरी जागरूकता।

'विकसित भारत संकल्प यात्रा' की सफलता पर क्या बोले पीएम मोदी?
इसी महीने 'विकसित भारत संकल्प यात्रा' के लाभार्थियों से बातचीत में पीएम मोदी कह चुके हैं कि यह मोदी की गारंटी है, जिसकी गाड़ी गांव-गांव तक जा रही है। उनके मुताबिक उनकी सरकार, गरीबों, महिलाओं, युवाओं और किसानों पर फोकस कर रही है और उन्हें मामूली आवश्यकताओं के लिए करने वाले संघर्षों की स्थिति से बाहर निकालना चाहती है।

कुल मिलाकर मोदी सरकार का लक्ष्य समाज के अंतिम छोर पर मौजूद नागरिकों तक पहुंचना है और उनसे सीधा संवाद करना है। अगर उनके जीवन में किसी तरह की परेशानी है तो उसका तत्काल समाधान करके भी देना है। समय चुनावी है, अभियान बड़ा है और सरकार का लक्ष्य एक है- 'हमारा संकल्प विकसित भारत'

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