राहुल गांधी के चीनी गाथा पर भड़के पीयूष गोयल, कह डाली ये बात
वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने भारतीय बाजार पर चीन की अपारदर्शी आर्थिक प्रथाओं के प्रभाव पर गहरी चिंता व्यक्त की।
उन्होंने चीन की अपारदर्शी अर्थव्यवस्था की वैश्विक मान्यता के बीच चीन का लगातार समर्थन करने और उसका बचाव करने के लिए कुछ व्यक्तियों की आलोचना की।

गोयल की टिप्पणी एक समाचार सम्मेलन के दौरान आई, जहाँ उन्होंने भारत में घटिया चीनी वस्तुओं की समस्याग्रस्त आमद पर प्रकाश डाला, जिसने स्थानीय विनिर्माण को कमजोर कर दिया है।
गोयल ने चीन के साथ बढ़ते व्यापार घाटे के लिए पिछली कांग्रेस के नेतृत्व वाली सरकार की नीतियों को जिम्मेदार ठहराया, जो 2004 में 1.8 बिलियन अमेरिकी डॉलर से बढ़कर 2014 में 43 बिलियन अमेरिकी डॉलर हो गया।
उन्होंने उस अवधि के दौरान आयात शुल्क में कटौती पर अफसोस जताया, जिससे भारतीय बाजारों में घटिया चीनी उत्पादों की बाढ़ आ गई। गोयल के अनुसार, इससे निवेशक हतोत्साहित हुए और भारतीय विनिर्माण को नुकसान पहुंचा, जिससे भारत की विकास गाथा पर एक लंबी छाया पड़ गई।
चीनी विनिर्माण की चुनौती और भारत की प्रतिक्रिया
गोयल की आलोचना क्षेत्रीय व्यापक आर्थिक भागीदारी (RCEP) तक फैली हुई थी, जिसके बारे में उनका दावा है कि भारत को इसमें शामिल होने के लिए मजबूर किया गया था। उन्होंने तर्क दिया कि इस कदम ने भारत को चीन के साथ एक मुक्त व्यापार समझौते के लिए प्रभावी रूप से मजबूर किया, जिससे व्यापार असंतुलन बढ़ गया और चीन को भारतीय बाजार में माल डंप करने में और मदद मिली।
लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी की टिप्पणियों पर प्रतिक्रिया देते हुए गोयल ने चीन के विनिर्माण केंद्र के रूप में उभरने में भारत की मिलीभगत के आरोपों को खारिज कर दिया। गांधी ने चीन के आर्थिक प्रभुत्व को बढ़ावा देने के लिए अमेरिका और भारत दोनों की आलोचना की थी, जिसे उन्होंने भारत में बेरोजगारी के संकट से जोड़ा था।
मंत्री ने 2004 से 2014 और 2014 से 2024 के बीच व्यापार घाटे की वृद्धि दर में भारी अंतर की ओर ध्यान आकर्षित किया। उन्होंने कहा कि जहां पूर्व अवधि में घाटा 30 गुना बढ़ गया, वहीं बाद की अवधि में यह केवल 6.45 प्रतिशत बढ़ा।।












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