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Phalodi Satta Bazaar 2025: बिहार-दिल्ली चुनाव में कितना सही रहा अनुमान? जानें इस साल किस नेता पर लगा भाव

Phalodi Satta Bazaar 2025 Predictions: राजस्थान का फलोदी सट्टा बाजार हर चुनावी मौसम में चर्चा का केंद्र बन जाता है। लोकसभा हो या विधानसभा चुनाव, फलोदी के सट्टेबाजों के अनुमान को लोग राजनीतिक नतीजों से जोड़कर देखने लगते हैं। इस साल भी बिहार और दिल्ली के चुनाव में सट्टा बाजार में जमकर भाव लगे। नतीजों के बाद इसके सटीक होने पर बहस तेज हो गई। राजस्थान के एक कस्बे फलोदी का सट्टा बाजार आज पूरी दुनिया में चर्चा का विषय बन चुका है।

हालांकि, सट्टा बाजार अनुमानों और संभावनाओं पर चलता है और फलोदी सट्टा बाजार में भी भाव अक्सर बदलते रहते हैं। बिहार चुनाव से पहले तो इसमें कई बार उतार-चढ़ाव देखने को मिला था। इसके बावजूद मोटे तौर पर बिहार और दिल्ली विधानसभा चुनाव के नतीजे काफी हद तक सटीक आए थे।

Phalodi Satta Bazaar 2025 Predictions

Phalodi Satta Bazaar 2025 Predictions: बिहार चुनाव में सटीक था अनुमान

- बिहार विधानसभा चुनाव से पहले फलोदी सट्टा बाजार में एनडीए के पक्ष में भाव लगाए गए थे। बाजार के जानकारों का मानना था कि राज्य में सत्तारूढ़ गठबंधन को बढ़त मिलेगी।

- हालांकि, सीटों की संख्या को लेकर अनुमान अलग-अलग थे। चुनाव नतीजों के बाद देखा गया कि गठबंधन सरकार बनने के अनुमान काफी हद तक सही साबित हुए, लेकिन सीटों के आंकड़े पूरी तरह सटीक नहीं रहे।

- सट्टा बाजार में 135 सीटें एनडीए के पक्ष में भाव शुरू हुआ था और भाव बदलने के बाद भी यह बढ़कर 160 से 170 तक का अनुमान दिखाया गया था। एनडीए ने 200+ का आंकड़ा छू लिया।

Phalodi Satta Bazaar 2025: नेताओं पर भी लगते हैं भाव

फलौदी सट्टा बाजार में चुनाव नतीजों से पहले सीएम उम्मीदवार पर भी भाव लगते हैं। बिहार चुनाव में नीतीश कुमार और तेजस्वी यादव पर भाव लगाया गया था। तेजस्वी यादव के सीएम बनने पर भाव लग रहा था, लेकिन नतीजे आने के आखिरी दौर में नीतीश कुमार का भाव भी तेज हो गया था। इसी तरह से दिल्ली चुनाव में जब बीजेपी को जीत मिली, तो उसके बाद सीएम फेस के लिए परवेश सिंह वर्मा का भाव सबसे तेज था।

Phalodi Satta Bazaar 2025: दिल्ली चुनाव में कितना सही रहा आकलन?

- दिल्ली विधानसभा चुनाव को लेकर फलोदी सट्टा बाजार ने मुकाबला बेहद दिलचस्प बताया था। आम आदमी पार्टी और बीजेपी के बीच कड़े मुकाबले के संकेत दिए गए थे।

- हालांकि, अंतिम नतीजों में एकतरफा रुझान सामने आने - के बाद सट्टा बाजार के अनुमान आंशिक रूप से ही सही माने गए। विश्लेषकों का कहना है कि फलौदी बाजार का फोकस ट्रेंड पर होता है, न कि सटीक सीट गणित पर।

कितना भरोसेमंद है फलोदी सट्टा बाजार?

हालांकि फलोदी सट्टा बाजार कई बार सही ट्रेंड पकड़ लेता है, लेकिन विशेषज्ञ इसे सिर्फ एक गैर-आधिकारिक अनुमान मानते हैं। इसके बावजूद कह सकते हैं कि दोनों ही चुनाव में एनडीए को बढ़त मिलती दिखाई गई थी। इस लिहाज से अनुमान 70-80 फीसदी तक सटीक रहे थे। चुनाव नतीजे जनता के वोट और जमीनी समीकरण तय करते हैं, न कि सट्टा बाजार।

इसके बावजूद हर चुनाव से पहले फलोदी सट्टा बाजार चर्चा में आ ही जाता है। इस सट्टा बाजार में सिर्फ चुनावों का ही भाव नहीं लगता है। बिग बॉस जैसे शो के विनर के लिए भी कई बार भाव लगते हैं। क्रिकेट मैच से जुड़े भाव भी लगते हैं। बता दें कि भारत में सट्टा लगाना या इसे प्रमोट करना पूरी तरह से गैर-कानूनी है।

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