फिर से सुर्खियों पर छाया PFI आतंकी संगठन, क्यों बना और किसने बनाया? जानें सबकुछ
भारत में प्रतिबंधित कट्टरपंथी इस्लामी संगठन पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) एक बार सुर्खियों में छाया हुआ है। वजह है कोर्ट द्वारा दी गई 15 हत्यारों को मौत की सजा। दरअसल, 3 साल पहले यानी 2021 में केरल में बीजेपी ओबीसी मोर्चा के नेता के 15 हत्यारों को कोर्ट ने मौत की सजा सुना दी है। यह सभी हत्यारे पीएफआई से जुड़े हुए पाए गए। जिसके बाद यह ग्रुप एक बार सुर्खियों पर छाया है।
आपको बता दें कि साल 2022 में 100 से अधिक पीएफआई सदस्यों को हिरासत में लेने के बाद, भारत ने मुस्लिम समूह, पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएफआई) और उसके सहयोगियों को आतंकवाद। में शामिल होने का आरोप लगाते हुए गैरकानूनी घोषित कर दिया है और उन पर पांच साल के लिए प्रतिबंध लगा दिया था।

क्या है PFI?
पीएफआई यानी पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया। यह एक कट्टरपंथी इस्लामी संगठन है। इसकी नींव 17 फरवरी 2007 में रखी गई थी। यह दक्षिण भारत के तीन मुस्लिम संगठनों को जोड कर बनाया गया संगठन है। जिसमें केरल का नेशनल डेमोक्रेटिक फ्रंट, कर्नाटक फोरम फॉर डिग्निटी और तमिलनाडु का मनिथा नीति पसराई शामिल हैं। पीएफआई की केरल में अच्छी पकड़ है। उनका दावा रहा है कि देश के 23 राज्यों में उनका संगठन एक्टिव है। इस संगठन देश विरोधी गतिविधियों में शामिल होने के आरोप हमेशा से लगते रहे हैं।
PFI क्यों बना? और किसने बनाया?
कथित तौर पर इस्लाम धर्म के प्रचार और हिंदू राष्ट्रवाद के खिलाफ यह संगठन बनकर तैयार हुआ। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इसको तैयार करने में केरल के ओएमए सलाम का हाथ रहा है।
कब-कब चर्चा में छाया PFI
- दक्षिण भारत में RSS के प्रमुख नेताओं की हत्या
- पब्लिक प्रॉपर्टी को नुकसान पहुंचाना
- दूसरे धर्मों को मानने वाले लोगों की हत्याएं
- बडी हस्तियों और जगहों को निशाना बनाने के लिए विस्फोटक जुटाना।
PFI भारत में 5 साल के लिए बैन
27 अगस्त 2022 को भारत सरकार ने PFI पर 5 साल के लिए प्रतिबंध लगाकर नोटिफिकेशन जारी किया था। सरकर ने UAPA (अनलॉफुल एक्टिविटी प्रिवेंशन एक्ट) के तहत यह कार्रवाई की थी।
क्या है केरल बीजेपी नेता की हत्या मामला?
दरअसल, 19 दिसंबर 2021 को बीजेपी ओबीसी मोर्चा के नेता रंजीत श्रीनिवासन अपने घर पर मॉर्निंग वॉक के लिए निकलने की तैयारी में थे। तभी हमलावरों ने उनपर हमला कर दिया। बीजेपी नेता को हत्यारों ने बेरहमी से पीटा। जिसमें उनकी मौत हो गई। मामले में 15 लोगों को गिरफ्तार किया गया था। जिसको लेकर मावेलीक्कर जिले की जिला अदालत ने 3 साल बाद मौत की सजा सुना दी।












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