नागरिकता कानून के खिलाफ प्रदर्शनों में हिंसा भड़काने के आरोपों पर आया पीएफआई का जवाब
नई दिल्ली। नागरिकता कानून के खिलाफ जुलूसों में हिंसा भड़काने के उत्तर प्रदेश पुलिस के आरोपों को पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएफआई) ने नकार दिया है। बुधवार को संगठन पीएफआई के महासचिव एम मुहम्मद अली जिन्ना ने बयान जारी कर कहा कि यूपी पुलिस का बयान 'बेतुका' और अपना चेहरा बचाने की कोशिश है। नागरिकता कानून के खिलाफ विरोध प्रदर्शनों के दौरान उत्तर प्रदेश में 19 लोगों की मौत हुई है।

यूपी के डीजीपी ओपी सिंह ने मंगलवार को बताया है कि उनकी ओर से केंद्रीय गृह मंत्रालय को पत्र लिखकर पीएफआई पर प्रतिबंध लगाने की मांग की गई है। इस पर अब पीएफआई की ओर से कहा गया है कि वो यूपी पुलिस के आरोपों को खारिज करते हैं। पीएफआई की ओर से कहा गया है, सीएए का विरोध देशभर में हुआ लेकिन उन प्रदेशों में जहां भाजपा की सरकारें हैं, वहां जनता के लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन किया गया। उत्तर प्रदेश में पुलिस प्रशासन की कार्रवाई ने विरोध प्रदर्शन को रक्तपात में बदल दिया। अब पुलिस अपना चेहरा बचा रही है।
नागरिकता संसोधन कानून के खिलाफ विरोध प्रदर्शन में हुई हिंसा के मामले में उत्तर प्रदेश पुलिस ने पीएफआई के 25 लोगों को गिरफ्तार किया है। उत्तर प्रदेश पुलिस ने नागरिकता कानून के दौरान प्रदर्शनों में हिंसा और आगजनी के पीछे पीएफआई के लोगों की साजिश होने की बात कही है।
केंद्रीय कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने भी बुधवार को कहा है कि नागरिकता संशोधन कानून के खिलाफ जुलूसों में हिंसा के पीछे पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएफआई) की भूमिका होने की बात सामने आई है। प्रसाद ने कहा कि इस संगठन पर बैन या दूसरी कार्रवाई को लेकर आगे क्या करना है इसका फैसला सबूतों के आधार पर गृह मंत्रालय करेगा।












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