यूक्रेन में जमाई बनेगा रूसी शख्स, छोड़ी नागरिकता, भारत में गर्लफ्रेंड से जोड़ा '7 जन्मों का रिश्ता'

धर्मशाला, 03 अगस्त। युद्धग्रस्त देश रूस और यूक्रेन के बीच जारी संघर्ष के दौरान दो प्रेमी जोड़ों ने दोनों देशों के राष्ट्राध्यक्षों को अनोखा संदेश दिया है। भारी तनाव के बीच एक ये प्यारा संदेश एक अपने अस्तित्व को मिटाने पर तुले देशों के लिए किसी संजीवनी बूटी से कम नहीं। जहां भारत में आकर एक रूसी शख्स ने यूक्रेन से कई जन्मों का रिश्ता जोड़ लिया।

Alyona Bramoka and Sirginovica

रूस यूक्रेन संघर्ष के दौरान यूक्रेन के कई लोग शरणार्थी होकर दूसरे देशों में अपना जीवन बसर करने को मजबूर हैं। इन सब के बीच कई ऐसी घटनाएं हैं जो दोनों देशों को एक बार फिर से मानवता और प्रेम की भावना के रास्ते पर चलने का संदेश दे रही हैं। यूक्रेन की एलोना ब्रामोका और पूर्व रूसी नागरित सिरगी की लव मैरिज युद्धग्रस्त दोनों देशों के राष्ट्राध्यक्षों की आंख खोलने के लिए काफी है। दरअसल, यूक्रेन की एलोना ब्रामोका अपने रशियन ब्वॉयफ्रेंड सिरगी नोविका को दिल दे बैठी। जिसके बाद दोनों ने शादी का प्लान किया और आ पहुंचे भारत। हजारों मील का सफर कर पहुंचे प्रेमी युगल ने की कहानी कुछ फिल्मी है।

नई जिंदगी की शुरुआत करने भारत आई एलोना ब्रामोका अपने प्रेमी सिरगी नोविका के साथ धर्मशाला पहुंचे। तो दोनों ने यहां भारतीय रिति रिवाजों और संस्कृति में शादी करने का निर्णय लिया और धर्मशाला की वादियों में यह अनूठा विवाह संपन्न हो गया। स्थानीय लोगों ने इस अवसर का आनंद लिया। सिरगी नोविका हालांकि रशियन हैं, लेकिन उन्होंने अपनी नागरिकता बदल ली है। अब वो इजरायली नागरिकता के साथ भारत आये हैं। अगले कुछ दिन वे धर्मशाला के पास धर्मकोट में अपनी पत्नी के साथ रहेंगे। दोनों में पिछले कुछ सालों से प्यार परवान चढ़ रहा था। लेकिन जब दोनों देशों के संबंध बिगड़ गए तो दोनों ने भारत आकर शादी करने का निर्णय लिया। हिमाचल प्रदेश के धर्मशाला के पास खनियारा के नारायण मंदिर दिव्य आश्रम खड़ौता में इस प्रेम कहानी की नई शुरूआत हुई।

दिव्य आश्रम खड़ौता व इलाके के प्रसिद्ध पंडित संदीप शर्मा ने इस विवाह का आयोजन कराया, जबकि विनोद शर्मा व उनके परिवार ने कन्यादान कर सभी रिति रिवाजों को पूर्ण करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। भारतीय हिंदू रीति-रिवाजों व परपंराओं के साथ संपन्न शादी को देखने के लिये बडी तादाद में लोग उमडे थे। इससे पहले सिरगी नोविका बाकायदा दूल्हा बनकर बारात लेकर आया। दूल्हे के साथ आए बाराती पारंपरिक बैंड-बाजा पर झूमते हुए आए। वहीं, दुल्हन की बहनों और सहेलियों ने गेट पर रिबन कटवाने के बदले शगुन लेकर ही दूल्हे और अन्य बारातियों को मंडप स्थल तक आने दिया। इसके बाद वैदिक मंत्रोच्चारण के साथ जोड़े ने सात फेरे लिए। इस दौरान नारायण मंदिर दिव्य आश्रम खड़ौता में नवविवाहित जोड़े ने आशीर्वाद प्राप्त किया।

विवाह की रस्मों को निभाने वाले पंडित रमन शर्मा ने बताया कि युवक-युवती और उनके साथ आए संबंधियों में सनातन परंपरा के प्रति लगाव की भावना देखकर वह काफी प्रभावित हुए। उन्होंने बताया कि आज के भागमभाग के समय में दूल्हा-दुल्हन या उनके परिजनों की ओर से लगातार पूछा जाता है कि इन रस्मों को पूरा करने में और कितना समय लगेगा। इसके उलट सिरगी-एलोना और उनके साथ आए संबंधियों ने एक बार भी जल्दबाजी नहीं दिखाई। उन्होंने हर रस्म को पूरा समय लेकर निभाया। उन्होंने बताया कि सनातन का प्रभाव देखकर उन्हें भी काफी संतोष हुआ। अपने इस निर्णय के बारे में सिरगी और एलोना ने बताया कि उन्होंने एक बार हिंदू रीति-रिवाज से होने वाला विवाह देखा था।

हिंदू धर्म की परंपराओं और मूल्यों से वे काफी प्रभावित थे।उसी समय उन्होंने खुद की शादी भी हिंदू रीति-रिवाजों के अनुसार करने का फैसला लिया था है। दिव्य आश्रम खड़ौता व क्षेत्र के प्रसिद्ध पंडित संदीप शर्मा के सानिध्य में विवाह हुआ, जबकि विनोद शर्मा व उनके परिवार ने कन्यादान कर सभी वैवाहिक कार्यक्रम को पूर्ण करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

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