Jammu Kashmir Chunav Result: 10 साल बाद घाटी में स्थायी सरकार, लेकिन गठबंधन की, कैसे बहाल करेंगे 370 ?
Jammu Kashmir Chunav Result: जम्मू-कश्मीर में 10 साल बाद विधानसभा चुनाव हुए हैं। इस चुनाव में कांग्रेस और नेशनल कॉन्फ्रेंस (एनसी) गठबंधन ने आधे का आंकड़ा पार कर लिया है। कड़ी मेहनत के बावजूद भाजपा ने कश्मीर घाटी में उम्मीद के मुताबिक सफलता नहीं पाई है। शुरुआती रुझानो में ही गठबंधन 50 से अधिक सीटों पर कब्ज़ा जमाकर परिणाम को स्पष्ट कर दिया था। बहरहाल एक बार फिर कांग्रेस के सहयोग के साथ उमर अब्दुल्ला मुख्यमंत्री बनने की राह पर हैं। सवाल कायम है कि क्या कांग्रेस-एनसी गठबंधन अपने चुनावी वादों को पूरा कर पाएंगी?
जम्मू कश्मीर में नेशनल कॉन्फ्रेंस ने अकेले ही 41 सीटों पर जीत हासिल की है। इस बीच पूर्व सीएम फारूक अब्दुल्लाह ने धारा 370 को लेकर बड़ा बयान दे दिया है। उन्होंने कहा कि जनादेश ने साबित कर हो गया है कि कश्मीर के लोग धारा 370 को हटाया जाने के फैसले को स्वीकार नहीं करते हैं। इसके साथ ही उन्होंने अपने बेटे उमर अब्दुल्ला को अगला मुख्यमंत्री बनाए जाने का भी ऐलान कर दिया है।

माना जाता है कि सत्ता स्थायी नहीं होती और जम्मू-कश्मीर की अवाम ने जनादेश के जरिये इसे बखूबी समझाया है। दरअसल 2014 के विधानसभा चुनाव में पीडीपी ने जीत का परचम लहराया था। 10 बरस बाद नेशनल कॉन्फ्रेंस ने शानदार वापसी की है। 2010 के विधानसभा चुनाव में एनसी की झोली में 15 सीटें थीं। इस बार नेशनल कॉन्फ्रेंस पार्टी ने करीब तीन गुना ज्यादा सीटें पाई है। जम्मू-कश्मीर में एनसी और कांग्रेस के गठबंधन की सरकार बनने वाली है।
अपने चुनावी प्रचार के दौरान भाजपा ने बार- बार इस बात का ज़िक्र किया था कि जम्मू कश्मीर को स्थायी सरकार का इंतजार है। वोट अपील में भी इसी बात को प्रमुखता से कहा जाता रहा,लेकिन इसका कोई फर्क नहीं पड़ा। घाटी में एक बार फिर गठबंधन की सरकार बनने जा रही है,लिहाजा इसे स्थायी सरकार के तौर पर देखा जाना उचित नहीं होगा। बहरहाल कांग्रेस नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और एनसी नेता उमर अबुदुल्ला ने जम्मू कश्मीर को स्टेटहुड यानी पूर्ण राज्य का दर्जा देने की बात की थी। कांग्रेस और नेशनल कॉन्फ्रेंस जम्मू-कश्मीर में फिर अनुच्छेद 370 लाना चाहती है। गठबंधन ने इसी मुद्दे पर चुनाव लड़ा और जीता भी है, लेकिन इस वादे को पूरा करना आसान नहीं है।
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दरअसल, केंद्र शासित राज्य में किसी भी सरकार का इस दिशा में आगे बढ़ना काफी काफी मुश्किल होगा। क्योंकि यह काम केवल भारत सरकार ही कर सकती है। अभी जम्मू कश्मीर के पास विशेष दर्जा नहीं है। जम्मू और कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम के मुताबिक राज्य की प्रशासनिक शक्तियां काफी हद तक एलजी कार्यालय में केंद्रित हो जाती हैं। केंद्र द्वारा नियुक्त उपराज्यपाल को सर्वशक्तिमान बना देती है। नई सरकार को भी हर बड़े फैसले के लिए एलजी की अनुमति लेनी होगी।












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