Jammu Kashmir Result: जम्मू कश्मीर में क्यों पिछड़ी बीजेपी? मजबूती से उभरा NC-कांग्रेस गठबंधन, जानिए 5 वजह
Jammu Kashmir Chunav 2024 Result: जम्मू-कश्मीर विधानसभा चुनाव के नतीजे महत्वपूर्ण बदलाव का संकेत दे रहे हैं। परिणाम बता रहे हैं कि नेशनल कॉन्फ्रेंस (एनसी) और कांग्रेस पार्टी सरकार बनाने के लिए तैयार हैं। इस परिणाम ने कई लोगों को चौंकाया है, क्योंकि चुनाव से पहले चर्चा थी कि भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) इस क्षेत्र में मजबूत पैर जमा सकती है।लेकिन जम्मू क्षेत्र में बीजेपी के प्रभाव के बावजूद, एनसी और कांग्रेस गठबंधन ने राज्य के अन्य हिस्सों में काफी समर्थन हासिल किया है।
आइये समझने की कोशिश करते हैं कि आखिर वह कौन से कारण हैं, जिसकी वजह से जम्मू कश्मीर चुनाव नेशनल कॉन्फ्रेंस (NC) और कांग्रेस पार्टी के बीच इस गठबंधन ने भाजपा के खिलाफ़ मज़बूत दावेदार के तौर में खुद को स्थापित कर दिया है।

(1) टटोली जनता की नब्ज़, चुनाव पूर्व बनाया गठबंधन
नेशनल कॉन्फ्रेंस और कांग्रेस ने त्रिशंकु विधानसभा के आशंका को भांप लिया था, इसलिए चुनाव से पहले ही गठबंधन बना लिया। दोनों दल समझ चुके थे कि बीजेपी राज्य के चुनावों में बड़ी ताकत बनकर उभर सकती है, लिहाजा इस गठबंधन ने उनके वोटों को ना केवल मजबूत किया,, बल्कि भारतीय जनता पार्टी के खिलाफ़ एक मजबूत विकल्प भी प्रस्तुत किया।
NC और कांग्रेस ने चुनाव पहले गठबंधन बनाकर सीट-बंटवारे भी तय कर लिए थे, जिसमें NC ने 51 और कांग्रेस ने 32 सीटों पर चुनाव लड़ा, जबकि 5 सीटों पर "दोस्ता नामाहौल में मुकाबला हुआ। गठजोड़ का मकसद भाजपा को सत्ता से बाहर रखना था।
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(2) भाजपा के पक्ष में नहीं था माहौल
चुनावी नतीजे बता रहे हैं कि जम्मू कश्मीर में भाजपा के खिलाफ जनता की भावनाएं अधिक ज्यादा थीं। जम्मू क्षेत्र को छोड़कर बाकि इलाकों में यह ज्यादा था, क्योंकि जम्मू क्षेत्र में भाजपा बहुत मजबूत होकर उभरी है, तो वही शेष कश्मीर में इस गठबंधन ने दूसरी सभी पार्टियों का लगभग सफाया ही कर दिया है।
भाजपा ने चुनावों में आर्टिकल 370 को समाप्त के बाद मुद्दा बनाया कि अब कश्मीर कभी पुरानी स्थिति में नहीं लौटेगा। इस बात ने जम्मू लाभ पहुँचाया, लेकिन कश्मीर में नुकसान उठाना पड़ा। जनता को लगा कि भाजपा स्थानीय हितों का प्रतिनिधित्व नहीं करती है, लिहाजा एनसी-कांग्रेस गठबंधन को लाभ मिला।
(3) राज्य का दर्जा बहाल करने का मुद्दा
एनसी-कांग्रेस गठबंधन ने राज्य का दर्जा बहाल करने का वादा किया। इसके अलावा भाजपा द्वारा शुरू किए गए सियासी बदलावों से उत्पन्न स्थानीय शिकायतों को दूर करने करने का अभियान चलाया। शायद मतदाता को भी उनके राज्य को केंद्रशासित करना पसंद नहीं आया। जनता को लगने लगा कि उनके राज्य का ग्रेड डाउन किया गया है।
(4) गठबंधन चुनावी प्रचार में दिखा प्रभावी
कांग्रेस और नेशनल कांफ्रेंस जम्मू-कश्मीर की पुरानी पार्टियां हैं। यह वजह रही कि मतदाताओं को कामकाज का ज्ञान हैं। अब्दुल्ला परिवार का कश्मीर के रीजन में तगड़ा प्रभाव है। इसका लाभ भी हुआ है। जम्मू रीजन में भारतीय जनता पार्टी को फायदा हुआ, क्योंकि वहां हिंदू मतदाताओं का समीकरण पूरी तरह से उनके पक्ष में गया है।
सभी दलों ने विशेष तौर पर अनुच्छेद 370 की बहाली और जम्मू-कश्मीर के लिए राज्य का दर्जा देने की मांग पर फोकस किया। एनसी ने भाजपा के साथ गठबंधन करने के लिए पीडीपी के "विश्वासघात" पर बल दिया, जबकि कांग्रेस ने स्थानीय सरकार के विषयों को प्राथमिकता देने का वादा किया।
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(5) बीते 5 वर्ष के कामकाज बनाया को मुद्दा
जम्मू कश्मीर एक दशक के बाद चुनाव हुए हैं। यहां की जनता ऐसी सरकार चाहती हैं, जो उनके प्रदेश के सम्मान और ताकत को बहाल करें। नेशनल कांफ्रेंस और कांग्रेस ने चुनाव जीतने के बाद राज्य को पूर्ण राज्य का दर्जा वापस दिलाने का वादा किया था, लिहाजा इस बात ने काम किया। कांग्रेस गठबंधन ने जम्मू और कश्मीर में भाजपा के शासन की कड़ी आलोचना की। उमर अब्दुल्ला ने भी अपने प्रचार में भाजपा को मुसलमानों के प्रतिनिधित्व न करने वाली पार्टी बताया था।












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