Uttarakhand: टनल में अभी भी फंसे हुए हैं लोग, 38 शव किये जा चुके हैं बरामद
उत्तराखंड के चमोली में ग्लेशियर फटने से आई भयानक बाढ़ वाली घटना को पूरा एक सप्ताह हो गया है, लेकिन अभी भी इस हादसे में लापता हुए सभी लोगों का पता चल नहीं सका है।
देहरादून। उत्तराखंड के चमोली में ग्लेशियर फटने से आई भयानक बाढ़ वाली घटना को पूरा एक सप्ताह हो गया है, लेकिन अभी भी इस हादसे में लापता हुए सभी लोगों का पता चल नहीं सका है। हादसे में मारे गए लोगों में से 38 लोगों के शव अभी तक बरामद किए जा चुके हैं, जबकि 200 से ज्यादा लोग अभी भी लापता है। वहीं तपोवन टनल में एनटीपीसी के प्रोजेक्ट पर काम कर रहे 30 लोगों को टनल से निकालने का काम रात दिन जारी है, लेकिन तमाम कोशिशों के बावजूद भी सेना टनल में फंसे लगभग 30 लोगों तक पहुंचने में अभी तक नाकाम रही है।

लोगों को खोजने के लिए टनल में छेद किया जा रहा है। चमोली की डीएम स्वाति भदोरिया ने तपोवन सुरंग के ताजा हालातों पर अपडेट देते हुए कहा कि सुरंग के अंदर 136 मीटर तक खुदाई की जा चुकी है। इसके अलावा खुदाई करने वाले रैनी गांव भी पहुंचे जहां शुक्रवार को एक और शव मिला। उन्होंने कहा कि इस हादसे में रैनी गांव सबसे ज्यादा प्रभावित हुआ है।
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उन्होंने आगे कहा कि 204 लापता लोगों में से 38 के शव बरामद किये जा चुके हैं जबकि दो लोगों को जिंदा बरामद किया गया है। उन्होंने 25-35 लोगों की टनल के अंदर फंसे होने की आशंका जताई है। वहीं सीमा सड़क संगठन ने बताया कि चमोली जिले में संचार के एक वैकल्पिक मोड के रूप में 200 फीट के बेली ब्रिज का निर्माण किया जा रहा है।
मालूम हो कि कि रविवार को आई भयानक बाढ़ में कई पुल बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गए थे। वहीं रैनी गांव के पास एक झील का निर्माण विशेषज्ञों और स्थानीयों के लिए चिंता का विषय बना हुआ है। उत्तराखंड के डीजीपी अशोक कुमार ने कहा कि एसडीआरएफ की टीम ने इस झील का दौरा किया है। झील से लगातार पानी रिस रहा है। उन्होंने कहा कि फिलहाल इससे कोई खतरा नहीं है। वहीं इस हादसे में लापता हुए परिवारजनों का सब्र अब जवाब देने लगा है। परिवारजनों का रो-रोकर बुरा हाल है।












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