पहले दयाशंकर और अब बसपा का सोशल मीडिया पर विरोध!
लखनऊ। भाजपा उपाध्यक्ष रहे दयाशंकर सिंह द्वारा बसपा सुप्रीमों मायावती पर की गई अमर्यादित टिप्पणी के मद्देनजर भारतीय जनता पार्टी ने दयाशंकर को पार्टी के सभी पदों से निकाल दिया, साथ ही पार्टी से भी 6 वर्षों के लिए निलंबित कर दिया गया।
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सिंह द्वारा की गई टिप्पणी पर विरोध दर्ज कराते हुए बसपा के कार्यकर्ताओं ने लखनऊ के हजरतगंज के नजदीक आंबेडकर की प्रतिमा के पास विरोध प्रदर्शन किया। हालांकि सोशल मीडिया समेत करीबन सभी के द्वारा दयाशंकर की इस टिप्पणी का विरोध हो रहा था। लेकिन बसपा के द्वारा विरोध प्रदर्शन के वक्त की गई कई गल्तियों ने बहुजन समाज पार्टी को ही कठघरे में खड़ा कर दिया।
सोशल मीडिया पर हुई बसपा की आलोचना
माना जा रहा था कि दयाशंकर द्वारा की गई टिप्पणी के बाद कार्यकर्ताओं का जमघट लगेगा, विरोध होगा, दया शंकर को जेल होगी। हां वैसा हुआ भी। पर, एक बात ने फिर से बसपा को हाशिए पर धकेल दिया। दरअसल विरोध दर्ज कराते हुए बसपा कार्यकर्ताओं ने दयाशंकर को कुत्ता कहा, इसके इतर मां, बहन, बेटी को पेश करो जैसे नारे लगाए। जिस पर देखते ही देखते सोशल मीडिया पर लोगों ने बसपा की आलोचना भी शुरू कर दी।

लोगों ने की गिरफ्तारी की मांग
वन इंडिया ने जब इस मामले में लोगों से बातचीत की तो उन्होंने कहा कि भले ही मामला सियासत का है लेकिन कम से कम भाजपा ने तुरंत एक्शन लेते हुए दयाशंकर पर कार्यवाही की। प्रशासन भी दयाशंकर को गिरफ्तार करने के लिए जगह-जगह तलाश रहा है। अब बहुजन समाज पार्टी के वरिष्ठ नेताओं जो कि विरोध प्रदर्शन में उपस्थित थे उनके खिलाफ भी कार्यवाही होनी चाहिए। भला कैसे कोई परिवार पर टिप्पणी कर सकता है। जो सरकारें ये कहती हैं कि महिला को सशक्त बनाने के लिए तमाम प्रयास किए जा रहे हैं, वे तमाम दावे इस तरह के बयानों के बाद विफल नजर आते हैं।

वहीं कुछ लोगों का यह भी कहना था कि विरोध प्रदर्शन में विधासभा में पार्टी और प्रतिपक्ष के नेता गया चरण दिनकर, विधानपरिषद् में नेता प्रतिपक्ष नसीमुद्दीन सिद्दकी, प्रदेश बसपा अध्यक्ष राम अचल राजभर मौजूद रहे। कहीं न कहीं इस तरह की विवादित नारेबाजी के बाद सवाल इन वरिष्ठ नेताओं से ही बनता है कि भला कैसे इन नेताओं की उपस्थिति के बावजूद इस तरह के नारे लगाए गए। इनसे तुरंत इस्तीफा लिया जाना चाहिए और जेल में डाल देना चाहिए।












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