Pawan Khera की जमानत पर SC रोक! क्या है विदेशी पासपोर्ट मामला? असम सरकार ने HC के फैसले पर दी थी चुनौती
Pawan Khera Case: कांग्रेस के राष्ट्रीय प्रवक्ता और वरिष्ठ नेता पवन खेड़ा की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। विदेशी पासपोर्ट मामले में कांग्रेस नेता पवन खेड़ा को 15 अप्रैल को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा की पत्नी से जुड़े मामले में कोर्ट ने उन्हें मिली अंतरिम जमानत पर फिलहाल रोक लगा दी है।
असम सरकार ने तेलंगाना हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती दी थी, जिस पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने यह फैसला सुनाया। मामले में आगे की सुनवाई जारी रहेगी।

असम सरकार ने पवन खेड़ा को तेलंगाना हाई कोर्ट से मिली एक हफ्ते की 'ट्रांजिट अग्रिम जमानत' (Transit Anticipatory Bail) को देश की सबसे बड़ी अदालत में चुनौती दी है।
जस्टिस जेके माहेश्वरी और जस्टिस अतुल एस चंदुरकर की पीठ के समक्ष होने वाली यह सुनवाई तय करेगी कि पवन खेड़ा को राहत मिलेगी या उन्हें असम पुलिस की जांच का सामना करने के लिए गुवाहाटी जाना होगा।
Riniki Bhuyan Sharma Passport केस का क्या है पूरा मामला?
यह विवाद तब शुरू हुआ जब पवन खेड़ा ने दिल्ली और गुवाहाटी में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा की पत्नी रिंकी भुइयां शर्मा के खिलाफ बेहद गंभीर आरोप लगाए। पवन खेड़ा का दावा है कि रिंकी शर्मा के पास तीन देशों-यूएई (UAE), मिस्र (Egypt) और एंटीगुआ और बारबुडा के पासपोर्ट हैं।
कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि सरमा परिवार की दुबई और अमेरिका में अघोषित संपत्तियां और शेल कंपनियां हैं, जिनका खुलासा चुनावी हलफनामे में नहीं किया गया है। असम मुख्यमंत्री और उनकी पत्नी ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इन्हें 'AI-जेनरेटेड' और 'फोटोशॉप्ड' (Doctored) दस्तावेज बताया है। इसी के बाद रिंकी शर्मा ने खेड़ा के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई थी।
तेलंगाना हाईकोर्ट से मिली थी राहत
मामले में गिरफ्तारी की आशंका के बीच पवन खेड़ा ने तेलंगाना हाईकोर्ट का रुख किया था। हाईकोर्ट ने उन्हें राहत देते हुए एक हफ्ते की ट्रांजिट अग्रिम जमानत दे दी थी, ताकि वे संबंधित अदालत में नियमित जमानत के लिए आवेदन कर सकें। हालांकि, कोर्ट ने यह भी कहा था कि खेड़ा को उचित मंच पर जाकर अपनी जमानत याचिका दाखिल करनी होगी।
सुप्रीम कोर्ट क्यों पहुंची असम सरकार?
असम सरकार की याचिका के पीछे मुख्य रूप से 'ज्यूडिशियल अधिकार क्षेत्र' का मुद्दा है। तेलंगाना हाई कोर्ट के फैसले पर सवाल उठाते हुए असम पुलिस ने तर्क दिया है कि जब मामला असम में दर्ज है और पवन खेड़ा दिल्ली के निवासी हैं, तो उन्होंने तेलंगाना हाई कोर्ट में जमानत याचिका क्यों दाखिल की?
असम सरकार का कहना है कि पवन खेड़ा 'फ्लाइट रिस्क' (देश छोड़कर भागने का खतरा) हो सकते हैं और उनके खिलाफ जालसाजी (Forgery) और धोखाधड़ी की गंभीर धाराएं लगी हैं, इसलिए उन्हें मिली अंतरिम राहत रद्द होनी चाहिए। सरकार चाहती है कि खेड़ा को किसी भी राहत के लिए गुवाहाटी हाई कोर्ट या असम की संबंधित निचली अदालत में ही अर्जी लगानी चाहिए।
पवन खेड़ा का पक्ष: 'राजनीतिक प्रतिशोध'
पवन खेड़ा की ओर से वरिष्ठ वकील अभिषेक मनु सिंघवी पैरवी कर रहे हैं। उनका तर्क है कि यह मामले पूरी तरह से राजनीति से प्रेरित हैं। तेलंगाना हाई कोर्ट ने केवल एक हफ्ते की 'ट्रांजिट बेल' दी थी ताकि खेड़ा असम की अदालत में पहुंच सकें, जो कि किसी भी नागरिक का संवैधानिक अधिकार (Article 21) है। खेड़ा की पत्नी का हैदराबाद (तेलंगाना) से संबंध होने के कारण वहां याचिका दाखिल की गई थी।
सुप्रीम कोर्ट में बुधवार की सुनवाई पर टिकी नजर
इस मामले की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस जे.के. माहेश्वरी और जस्टिस अतुल एस. चंदुरकर की बेंच के सामने सुनवाई हुई। असम सरकार ने तेलंगाना हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती दी थी, जिस पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने यह फैसला सुनाया। मामले में आगे की सुनवाई जारी रहेगी।
सुप्रीम कोर्ट इस बात पर फैसला करेगा की किसी दूसरे राज्य का हाई कोर्ट जैसे तेलंगाना या किसी अन्य राज्य (असम) के मामले में 'ट्रांजिट जमानत' दे सकता है या नहीं। यदि सुप्रीम कोर्ट असम सरकार की दलील मान लेता है, तो पवन खेड़ा की गिरफ्तारी की तलवार एक बार फिर लटक सकती है।














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