SC,HC के जजों की रिटायरमेंट उम्र बढ़ाने के समर्थन में संसदीय समिति, जानें सिफारिश में क्या कहा?

संसद की एक स्थायी समिति ने सोमवार को सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट के जजों की रिटायरमेंट की मौजूदा उम्र को आगे बढ़ाने के लिए एक परफॉर्मेंस अप्रेजल सिस्टम की सिफारिश की है। इस समय सुप्रीम कोर्ट के जजों की रिटायरमेंट की आयु 65 साल और 25 हाई कोर्ट के जजों की सेवानिवृत्ति की उम्र 62 वर्ष तय की हुई है।

न्यूज एजेंसी पीटीआई के मुताबिक संसद की कानून और कार्मिक मामलों की स्थायी समिति ने अपनी रिपोर्ट 'जूडिशल प्रॉसेस एंड देयर रिफॉर्म्स' में जजों को उनकी रिटायरमेंट के बाद मिलने वाली जिम्मेदारियों की भी चर्चा की है, क्योंकि कई बार जज जिन संस्थाओं से जुड़ते हैं, वह सरकारी सहायता प्राप्त होते हैं।

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जजों की रिटायरमेंट पर संसदीय समिति की सिफारिश
समिति ने कहा है कि सरकारी खजानों पर निर्भर निकायों या संस्थानों में सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट के जजों को रिटायरमेंट के बाद काम देने की प्रथा का उनकी निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए पुनर्मूल्यांकन किया जा सकता है।

रिटायरमेंट के बाद मिलने वाली जिम्मेदारियों पर उठ चुके हैं सवाल
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि कई स्टेकहोल्डर्स रिटायरमेंट के बाद जजों को सौंपे जाने वाले कार्यों पर आपत्ति जता चुके हैं। यूपीए-2 के कार्यकाल के दौरान लोकसभा में हाई कोर्ट जजों की रिटायरमेंट की उम्र सुप्रीम कोर्ट के जजों की जितनी करने के लिए एक विधेयक भी लोकसभा में लाया गया था। लेकिन, उसपर कभी विचार नहीं हुआ और वह समाप्त हो गया।

समिति जताई रिटायरमेंट उम्र बढ़ाए जाने की आवश्यकता
रिपोर्ट में कहा गया है, '...समिति महसूस करती है कि जजों की रिटायरमेंट की उम्र को आयु में हुई वृद्धि और मेडिकल साइंस में प्रगति के साथ-साथ आबादी के स्वास्थ्य में सुधार के अनुसार बढ़ाए जाने की आवश्यकता है।'

जजों की रिटायरमेंट उम्र बढ़ाए जाने की सिफारिश
इसी आधार पर रिपोर्ट में कहा गया है, 'उसी अनुसार, समिति सिफारिश करती है कि भारत के संविधान के संबंधित अनुच्छेदों में संशोधन की आवश्यकता है, और सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट के जजों की रिटायरमेंट की उम्र उचित रूप से बढ़ाई जा सकती है।'

परफॉर्मेंस आधारित व्यवस्था बनाने की सिफारिश
बीजेपी के राज्यसभा सांसद सुशील कुमार मोदी की अध्यक्षता वाली संसदीय समिति के मुताबिक जजों की रिटायरमेंट की उम्र बढ़ाते समय उनके स्वास्थ्य की स्थिति, फैसलों की गुणवत्ता और फैसलों की संख्या के अनुसार उनकी परफॉर्मेंस के आधार पर उसका पुनर्मूल्यांकन किया जा सकता है।

रिपोर्ट में कहा गया है, 'इसके लिए किसी भी जज के कार्यकाल को बढ़ाने की सिफारिश करने से पहले सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम की ओर से मूल्यांकन की एक प्रणाली तैयार की जा सकती है और उसे लागू किया जा सकता है।'

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