'संविधान धर्म का पालन कर रही सरकार, जिन्होंने अनदेखी की आज उठा रहे लाभ', लोकसभा में राजनाथ सिंह

Parliament Winter Session: आज लोकसभा में एक ऐतिहासिक बहस हुई, जिसमें भारतीय संविधान को अपनाने के 75 साल पूरे होने का जश्न मनाया गया। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इस महत्वपूर्ण चर्चा की शुरुआत की। उन्होंने कहा कि यह हमारा सौभाग्य है कि हम संविधान के अमृत महोत्सव का हिस्सा बन रहे हैं।

राजनाथ सिंह ने अपने भाषण में बताया कि भारत ने 26 नवंबर 1949 को अपना संविधान अपनाया था। उन्होंने सभी नागरिकों और सदन को इस उपलब्धि की बधाई देते हुए कहा कि हमारा संविधान न केवल सामाजिक और राजनीतिक जीवन को दिशा देता है, बल्कि यह भारत की सांस्कृतिक और सभ्यतागत मूल्यों की भी अभिव्यक्ति है।

Parliament Winter Session

राजनाथ सिंह ने कहा कि एक समय था जब कुछ राज्यों में भारतीय संविधान और संसदीय कानून पूरी तरह लागू नहीं होते थे। लेकिन अब सरकार ने हर राज्य में संविधान का क्रियान्वयन सुनिश्चित किया है और इस फैसले के सकारात्मक परिणाम पूरे देश में देखने को मिल रहे हैं।

संविधान का महत्व और इसकी सामूहिक उपलब्धि
रक्षा मंत्री ने कहा कि संविधान भारत की सामूहिक उपलब्धि है और इसे बनाने में कई महान नेताओं का योगदान रहा है। उन्होंने मदन मोहन मालवीय, लाला लाजपत राय, भगत सिंह और वीर सावरकर जैसे स्वतंत्रता सेनानियों के विचारों को संविधान निर्माण के लिए महत्वपूर्ण बताया।

उन्होंने यह भी कहा कि हाल के वर्षों में संविधान को केवल एक पार्टी के योगदान के रूप में प्रस्तुत करने की कोशिश की गई है, जो सही नहीं है। हमारा संविधान उन सभी विचारों और संघर्षों का परिणाम है जो देश के निर्माण में सहायक रहे।

संविधान के अमृत महोत्सव का महत्व
राजनाथ सिंह ने इस अवसर पर कहा कि संविधान ने भारत के लोगों को प्रजा से नागरिक बनने का गौरव दिया। यह न केवल एक दस्तावेज है, बल्कि यह राष्ट्र निर्माण का मार्ग भी दिखाता है।

हालांकि, यह बहस सरकार और विपक्ष के बीच चल रहे राजनीतिक तनाव के बीच हो रही है, जिसमें सोनिया गांधी और जॉर्ज सोरोस से जुड़े अडानी मुद्दे को लेकर मतभेद सामने आए हैं।

संविधान की मूल भावना
राजनाथ सिंह ने कहा कि संविधान केवल कानूनों का संग्रह नहीं है, बल्कि यह भारत की सभ्यता और सांस्कृतिक मूल्यों का प्रतीक है। उन्होंने यह भी कहा कि कुछ नेताओं के योगदान को नजरअंदाज करने की कोशिश की गई है, लेकिन हमें उन सभी का सम्मान करना चाहिए जिन्होंने संविधान निर्माण में अपना योगदान दिया। इस ऐतिहासिक बहस ने संविधान के महत्व और उसकी मूल भावना को एक बार फिर सबके सामने लाया है।

भारत के संविधान को अपनाने के 75 साल पूरे होने पर संसद में हुई ऐतिहासिक बहस की पूरी जानकारी। जानिए कैसे राजनाथ सिंह ने संविधान की भावना को सशक्त बनाने वाले नेताओं को सम्मानित किया।

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