Parliament's winter session: संसद सत्र से पहले आज सर्वदलीय बैठक करेंगे PM मोदी
नई दिल्ली, 28 नवंबर। सोमवार से शुरू हो रहे संसद के शीतकालीन सत्र से पहले आज सुबह 11.30 पर एक सर्वदलीय बैठक बुलाई गई है, जिसकी अध्यक्षता पीएम मोदी करेंगे। इस बैठक में पीएम मोदी के साथ विपक्षी दलों के नेता भी होंगे। इस बैठक में शीतकालीन सत्र में होने वाले महत्वपूर्ण कामकाजों पर चर्चा होगी और सत्र में दोनों सदन सुचारू रूप से चले इस बारे में भी बातें होंगी लेकिन इस बैठक से पहले केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री प्रहलाद जोशी सुबह 9:30 बजे सभी दलों के सदन नेताओं के साथ मीटिंग करेंगे।

आपको बता दें कि सर्वदलीय बैठक एक परंपरा का हिस्सा है, हर सत्र से पहले सर्वदलीय बैठक बुलाई जाती है, जिससे सत्र ठीक-ठाक ढंग से चले। मालूम हो कि संसद का शीतकालीन सत्र 29 नवंबर से 23 दिसंबर तक चलेगा। ये सत्र इसलिए भी काफी महत्वपूर्ण है क्योंकि इस बार सरकार तीन कृषि कानूनों को निरस्त करने के लिए विधेयक पेश करने वाली है। सरकार ने 19 नवंबर को तीनों नए कृषि कानून को वापस ले लिया था और किसानों से अपील की थी कि वो अपना आंदोलन बंद करें और अपने घर लौटें।
एमएसपी को लेकर एक समिति का गठन
हालांकि किसानों ने कहा है कि जब तक न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) सुनिश्चित करने के लिए कानून नहीं बनता है, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा। किसानों ने अपनी मांगों को लेकर पीएम मोदी को पत्र भी लिखा है। जबकि केंद्रीय कृषि और किसान कल्याण मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने शनिवार को कहा कि पीएम मोदी ने एमएसपी को लेकर एक समिति का गठन किया है जिसमें किसान संगठनों के प्रतिनिधि भी शामिल होंगे। इसलिए मेरी अपील है कि किसान अपना आंदोलन बंद करें और अपने घरों को लौटें।
19 नवंबर को रद्द हुआ था कानून
मालूम हो कि 19 नवंबर को पीएम मोदी ने तीनों कृषि कानूनों को रद्द करने का ऐलान किया था। अपने संबोधन में पीएम मोदी ने कहा था कि 'हम किसानों और कृषि की हालत को सुधराने के लिए नए कृषि कानून लेकर आए थे, जिससे खासकर के छोटे किसानों का भला हो। इस कानून को लाने से पहले इसकी संसद में चर्चा हुई थी। हमारी सरकार किसानों के कल्याण के लिए नेक नियत से ये कानून लेकर आई थी लेकिन इतनी पवित्र बात हम पूर्ण रूप से कुछ किसानों को समझा नहीं पाए, हमने उनसे बातचीत करने की भी कोशिश की और हर तरह से इन कानून का महत्व समझाने का प्रयास किया लेकिन हम उन्हें समझाने में सफल नहीं हुए, ये मामला सुप्रीम कोर्ट भी गया लेकिन हमारी तपस्या में ही कुछ कमी होगी इसलिए अब हमने कृषि कानूनों को वापस लेने का फैसला लिया है।'












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