Parliament Winter Session: शीतकालीन सत्र के पहले दिन इन वजहों से नहीं चली संसद,दोनों सदनों की कार्यवाही स्थगित

Parliament Winter Session 2024 Today: लोकसभा और राज्यसभा दोनों सदनों की कार्यवाही सोमवार को जल्द ही 27 नवंबर (बुधवार) तक के लिए स्थगित करनी पड़ गई। संसद की कार्यवाही शुरू होते ही व्यवधानों की वजह से इसे स्थगित करना पड़ा। विपक्षी सांसद कई मुद्दों पर चर्चा की मांग कर रहे थे, जिनमें उद्योगपति गौतम अडानी ग्रुप पर लगे भ्रष्टाचार के आरोप भी शामिल हैं।

राज्यसभा में सदन की कार्यवाही शुरू होते ही शुरू में विपक्षी सांसदों की ओर से अडानी ग्रुप के विषय पर चर्चा की मांग शुरू कर दी गई। इसके चलते पहले सदन की कार्यवाही को सुबह 11:45 तक रोका गया और फिर जब विपक्ष अपनी मांगों पर अड़ा रहा तो पूरे दिन के लिए कार्यवाही स्थगित कर दी गई।

parliament winter session 2024

संसद के दोनों सदनों की कार्यवाही बुधवार तक के लिए स्थगित
लोकसभा में स्पीकर ओम बिड़ला ने दिवंगत सदस्यों को श्रद्धांजलि दिए जाने के बाद सदन की कार्यवाही पहले दिन के 12 बजे तक स्थगित की। फिर सदन की कार्यवाही शुरू होते ही विपक्षी सदस्यों ने विभिन्न मसलों पर चर्चा की मांग शुरू कर दी, जिसके बाद निचले सदन की कार्यवाही को भी पूरे दिन के लिए स्थगित कर दिया गया। अब दोनों सदनों की कार्यवाही बुधवार, 27 नवंबर को सुबह 11 बजे शुरू होगी।

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स्थगन प्रस्ताव के माध्यम से चर्चा की मांग कर रहा था विपक्ष
उधर कांग्रेस सांसद कार्ति चिदंबरम ने कहा, 'पता नहीं कि सदन क्यों स्थगित किया गया। हम गए, राष्ट्रगान हुआ, श्रद्धांजलि पढ़ी गई और इसे स्थगति कर दिया गया। मुझे नहीं पता कि स्पीकर सदन को स्थगति करने के लिए इतनी जल्दबाजी में क्यों थे। स्थगन प्रस्ताव की मांग करना एक सामान्य संसदीय परंपरा है।'

इंडिया ब्लॉक ने एकजुटता के साथ सरकार को घेरने की तैयारी की
संसद की कार्यवाही शुरू होने से पहले संसद सत्र को लेकर विपक्षी इंडिया ब्लॉक ने अपनी रणनीति पर एक बैठक की। यह बैठक राज्यसभा में विपक्ष के नेता और कांग्रेस सांसद मल्लिकार्जुन खड़गे के संसद स्थित दफ्तर में हुई। इसमें सहयोगी दलों ने संसद में एकजुटता वाली नीति अपनाने पर बात की।

अडानी मसले पर चर्चा को लेकर अड़ा विपक्ष
इस बीच खड़गे ने एक्स पर एक पोस्ट डालकर कहा,'सरकार को सबसे पहले अडानी प्रकरण पर विस्तृत चर्चा करनी चाहिए,जिससे वैश्विक स्तर पर भारत की छवि धूमिल हो सकती है। आज इंडिया ब्लॉक की पार्टियां यही मांग कर रही हैं, जिसकी वजह से करोड़ों छोटे निवेशकों की गाढ़ी कमाई संकट में है। हमें इस देश को चलाने के लिए मोनोपॉली और कार्टेल की आवश्यकता नहीं है। हमें निजी क्षेत्र में स्वस्थ प्रतिस्पर्धा की जरूरत है, जो समान अवसर,रोजगार और धन के समान वितरण की सुविधा उपलब्ध कराए,जो भारत की अंतर्निहित उद्यमशीलता की भावना को पूर्ण करे।'

वक्फ संशोधन बिल भी है गतिरोध की जड़?
इस बीच वक्फ संशोधन बिल पर चर्चा के लिए बनी संयुक्त संसदीय समिति (JPC) में शामिल विपक्षी दलों के सदस्यों ने लोकसभा स्पीकर ओम बिड़ला से मुलाकात की और इस कमेटी के चेयरमैन जगदंबिका पाल के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई। इन्होंने चेयरमैन पर इस महत्वपूर्ण विधेयक में जल्दबाजी करने का आरोप लगाया है।

विपक्षी सदस्यों ने स्पीकर को सौंपे ज्ञापन में इस समिति का कार्यकाल बढ़ाने की मांग की है। स्पीकर से मिलने के बाद डीएमके सांसद ए राजा ने कहा, 'हमने स्पीकर से कहा कि चेयरमैन की ओर से उचित प्रक्रियाओं का पालन नहीं किया जा रहा है। वे कार्यवाही में जल्दबाजी कर रहे हैं और कार्यवाही को बाधित कर रहे हैं।'

हुड़दंगबाजी से संसद को कंट्रोल करने की कोशिश- पीएम मोदी
इससे पहले प्रधानमंत्री ने संसद सत्र की शुरुआत से पहले अपने पारंपरिक संबोधन में ही एक तरह से विपक्षी सांसदों की ओर से सदन में अपनाए जाने वाले रवैए के प्रति अपनी आशंका जाहिर कर दी थी।

उन्होंने कहा,"पार्लियामेंट में स्वस्थ चर्चा हो। ज्यादा से ज्यादा लोग उसमें योगदान दें, दुर्भाग्य से कुछ लोगों ने अपने राजनीतिक स्वार्थ के लिए जिनको जनता ने अस्वीकार किया है, वे संसद को भी मुट्ठीभर लोगों की हुड़दंगबाजी से लगातार कंट्रोल करने का प्रयास कर रहे हैं। उनका अपना मकसद तो संसद की गतिविधि को रोकने से ज्यादा सफल नहीं होता है,और देश की जनता उनके सारे व्यवहारों को काउंट करती है,और जब समय आता है तो सजा भी देती है...."

'जिन्हें जनता ने अस्सी-अस्सी, नब्बे-नब्बे बार नकार दिया'
उन्होंने आगे कहा कि, "..लेकिन, सबसे ज्यादा पीड़ा की बात ये है कि जो नए सांसद होते हैं...नए विचार, नई ऊर्जा लेकर के आते हैं...और किसी एक दल में नहीं सभी दल में आते हैं....उनके अधिकारों को कुछ लोग दबोच देते हैं। सदन में बोलने का उनको अवसर तक नहीं मिलता है। लोकतांत्रिक परंपरा में हर पीढ़ी का काम है आने वाले पीढ़ियों को तैयार करें। लेकिन, अस्सी-अस्सी, नब्बे-नब्बे बार जनता ने जिनको लगातार नकार दिया है, वे न संसद में चर्चा होने देते हैं, न लोकतंत्र की भावना का सम्मान करते हैं,न ही वे लोगों की आकांक्षाओं का कोई महत्त्व समझते हैं, न उनके प्रति उनके दायित्व को समझ पाते हैं, और इसका परिणाम ये है कि वे जनता की उम्मीदों पर कभी भी खड़े नहीं उतरते।"

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वैसे संसद में मंगलवार यानी 26 नवंबर, 2024 को संविधान की 75वीं वर्षगांठ मनाई जाएगी। 1949 में इसी दिन संविधान सभा ने इसे अपनाया था। यह शीतकालीन सत्र 20 दिसंबर तक चलेगा, जिसमें कुल 25 दिन इसकी बैठकें आयोजित होनी हैं।

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