Parliament Session 2025: ऑपरेशन सिंदूर के दौरान कितने देशों का मिला समर्थन? जयशंकर ने संसद में बताया
Parliament Session 2025: विदेश मंत्री एस जयशंकर ने ऑपरेशन सिंदूर पर बोलते हुए कहा कि 193 देशों में से केवल तीन ने इसका विरोध किया, जो भारत की कूटनीति की सफलता को दर्शाता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत और पाकिस्तान के बीच कोई मध्यस्थ नहीं था, बल्कि पाकिस्तान ने ही युद्धविराम के लिए पहल की थी।
जयशंकर ने आगे कहा कि भारत ने पाकिस्तान को दुनिया के सामने बेनकाब कर दिया है। उन्होंने कहा कि मुदीरके और बहावलपुर पर हमला कोई सोच भी नहीं सकता था। यही नहीं भारत ने ब्रिक्स और क्वाड जैसे मंचों ने पाकिस्तान को उजागर किया।
TRF को घोषित कराया ग्लोबल आतंकी संगठन
लोकसभा में जयशंकर ने कहा कि पहलगाम के बाद भारत दुनिया के साथ खड़ा है और उसने पाकिस्तान को मुंहतोड़ जवाब दिया है। उन्होंने यह भी कहा कि टीआरएफ पर पाकिस्तान की कोशिश नाकाम रही और आज टीआरएफ एक ग्लोबल आतंकी संगठन घोषित हो चुका है। उन्होंने जोर देकर कहा कि अपने नागरिकों की रक्षा करना भारत का अधिकार है।

आतंक के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति
जयशंकर ने कहा कि विदेश मंत्रालय का काम पाकिस्तान की साजिशों को उजागर करना था और आतंकवाद के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई गई है। उन्होंने कहा कि भारत ने यूएनएससी में अपना पक्ष रखा और दुनिया को बताया कि आतंकवाद पर उसकी जीरो टॉलरेंस की नीति है, जिसे UNSC ने भी माना।
गोगोई के सवाल पर राजनाथ सिंह का जवाब
गोगोई ने कहा कि बैसरन में हमले के बाद एम्बुलेंस को पहुंचने में 1 घंटा लगा और सेना पैदल आई थी। उन्होंने सवाल किया कि सरकार बताए कि पाकिस्तान को चीन से कितनी मदद मिली और पाकिस्तान के साथ युद्धविराम क्यों हुआ?
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि जब अटल जी प्रधानमंत्री थे, तब पाकिस्तान के साथ कंपोजिट डायलॉग के लिए भारत की शर्त थी कि पाकिस्तान अपनी जमीन का प्रयोग भारत के खिलाफ आतंकवाद फैलाने के लिए नहीं करेगा, जिसे पाकिस्तान ने भी मान लिया था। लेकिन दुर्भाग्य से 2009 में शर्म-अल-शेख समझौते में तत्कालीन सरकार ने एक बड़ी भूल की।
'हमारे नागरिकों को मारेंगे तो हम चुप नहीं बैठेंगे'
राजनाथ सिंह ने कहा कि आतंकवाद के खिलाफ हमारी लड़ाई केवल सीमा पर नहीं बल्कि वैचारिक मोर्चों पर भी लड़ी जा रही है। उन्होंने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर हमारे सामर्थ्य का प्रतीक था, जिसमें हमने दिखाया कि अगर कोई हमारे नागरिकों को मारेगा तो भारत चुप नहीं बैठेगा।
राजनाथ सिंह ने स्पष्ट किया कि ऑपरेशन सिंदूर को किसी दबाव में नहीं रोका गया था, बल्कि भारत ने कार्रवाई इसलिए रोकी क्योंकि संघर्ष के पहले और उसके दौरान जो भी राजनीतिक और सैन्य लक्ष्य तय किए गए थे, उसे हम पूरी तरह से हासिल कर चुके थे।
राजनाथ सिंह ने कहा कि हमारी सेनाओं द्वारा की गई कार्रवाई में आतंकवादियों के 9 ठिकानों को निशाना बनाया गया, जिसमें करीब सौ से अधिक आतंकवादी मारे गए। इनमें से अधिकांश जैश-ए-मोहम्मद, लश्कर-ए-तैयबा और हिजबुल मुजाहिदीन जैसे आतंकी संगठनों से संबंधित थे।
पाक को कैसे मिला एक बिलियन का लोन- हुडा
कांग्रेस सांसद दीपेंद्र सिंह हुडा ने सवाल उठाया कि जब पाकिस्तान घुटनों पर था तो युद्धविराम क्यों किया गया। उन्होंने कहा कि युद्धविराम से पहले अमेरिका ने ट्वीट किया और विदेश नीति पर भी सवाल उठाए। हुडा ने कहा कि किसी भी देश ने पाकिस्तान की निंदा नहीं की और टकराव के दौरान ही IMF ने उसे 1 बिलियन डॉलर का लोन दिया। हुडा ने कहा कि अमेरिका ने 28 बार युद्धविराम कराने का दावा किया, लेकिन भारत के प्रधानमंत्री ने एक बार भी इसका खंडन नहीं किया। उन्होंने कहा कि सेना को आधुनिक हथियारों से लैस किया जाना चाहिए और रक्षा बजट बढ़ाया जाना चाहिए।
सेनाओं को पीएम ने दी खुली छूट- ललन सिंह
जेडीयू सांसद ललन सिंह ने कहा कि पीएम मोदी ने बिहार के मधुबनी में आतंकवाद के खिलाफ लड़ने का संकल्प लिया था और सेनाओं को खुली छूट दी थी। उन्होंने कहा कि 6-7 मई की आधी रात को सेना ने ऑपरेशन सिंदूर के जरिए पाकिस्तान में आतंकियों के ठिकानों को ध्वस्त किया।
26/11 को लेकर उठाए ललन सिंह ने सवाल
ललन सिंह ने कांग्रेस पर हमला करते हुए कहा कि मुंबई में आतंकी कैसे घुस आए और यूपीए के शासनकाल में आतंकवाद पनपा। उन्होंने कहा कि 22 अप्रैल को पहलगाम में हुई घटना में 26 लोग मारे गए, जिसके बाद पीएम मोदी विदेश यात्रा स्थगित करके देश लौट आए।
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