'बिना किसी पुरुष सहयोगी के 4 हजार मुस्लिम महिलाएं हज को गईं और सुरक्षित लौटीं', सदन में बोलीं स्मृति ईरानी
संसद के मानसून सत्र में बुधवार का दिन काफी अहम रहा, जहां अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा हुई। इस दौरान कांग्रेस की ओर से राहुल गांधी ने मोर्चा संभाला, जबकि सरकार की ओर से केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने जवाब दिया। उन्होंने महिला सुरक्षा की दिशा में किए गए कार्यों को भी सदन में बताया।
स्मृति ईरानी ने सदन में कहा कि मोदी सरकार महिलाओं के लिए तेजी से काम कर रही है। मुस्लिम महिलाओं के हित में भी कई फैसले लिए गए। इसमें सबसे बड़ा फैसला महरम से जुड़ा है। इसमें बिना किसी पुरुष सहयोगी के 4 हजार से ज्यादा मुस्लिम महिलाएं हज को गईं और सुरक्षित वापस भारत लौटीं।

ईरानी ने कांग्रेस शासित राजस्थान की घटना को भी सदन में उठाया। उन्होंने कहा कि हाल ही में भीलवाड़ा में 14 साल की बच्ची के साथ गैंगरेप हुआ। उसके बाद उसका गला काट दिया गया। फिर उसे हैवानों ने भट्टी में जला दिया। इसी तरह बंगाल में 60 साल की महिला का उसके नाती के सामने रेप हुआ। आप लोगों (कांग्रेस) ने उस पर कुछ नहीं कहा।
क्या होता है महरम?
मुस्लिम धर्म में महिलाएं जिनसे शादी नहीं कर सकती हैं, उन्हें महरम कहा जाता है। इसमें पिता, सगे भाई, चाचा, दादा, नाना आदि आते हैं। वहीं जिनसे शादी हो सकती है, उसे गैर महरम कहा जाता है। पहले हज यात्रा के लिए भारत से यात्री समुद्री जहाज या पैदल जाते थे। उस वक्त लुटेरे आदि का खतरा रहता था। ऐसे में ये नियम था कि महिलाएं बिना महरम के हज नहीं जा सकती थीं।
अब हज यात्रा काफी आसान और सुरक्षित हो गई है। ऐसे में मोदी सरकार ने इस साल जनवरी में हज यात्रा नियमों में बदलाव किया और महिलाओं को अकेले जाने की अनुमति दी। सऊदी अरब सरकार ने भी इस फैसले में भारत का साथ दिया।
पीएम ने 'मन की बात' में किया था जिक्र
30 जुलाई को पीएम मोदी ने 'मन की बात' कार्यक्रम में महरम वाले नियम का जिक्र किया था। उन्होंने कहा था कि उनकी सरकार मुस्लिम महिलाओं के हित के लिए कई काम कर रही। जिसके तहत महरम हटाया गया। इसका नतीजा ये हुआ कि चार हजार मुस्लिम महिलाएं बिना महरम के हज को गईं।












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