Manipur violence का मुद्दा संसद में गूंजेगा, मॉनसून सेशन में मणिपुर पर सदन में चर्चा पर सहमत हुई सरकार!
Manipur violence का मुद्दा संसद के मानसून सत्र में गूंजेगा। खबर के अनुसार सरकार ने संकेत दिया है कि संसद के दोनों सदनों में मणिपुर में हुई हिंसा और वर्तमान हालात पर चर्चा कराई जा सकती है।सरकार ने कहा, मणिपुर की स्थिति पर संसद में चर्चा को तैयार
केंद्र ने आज कहा कि वह संसद के मानसून सत्र के दौरान मणिपुर में हिंसा पर चर्चा के लिए तैयार है। बता दें कि केंद्र पर विपक्ष इस मुद्दे पर टालमटोल करने का आरोप लगा रहा है।

मानसून सत्र से पहले व्यापार सलाहकार समिति की बैठक में संसदीय कार्य मंत्री प्रल्हाद जोशी ने कहा, सरकार संसद में सभी मामलों पर चर्चा करने के लिए तैयार है, जिसमें मणिपुर में 2 महीने तक चली हिंसा भी शामिल है। इसमें 80 से अधिक लोग मारे गए हैं।
कांग्रेस ने पहले कहा था कि महंगाई और मणिपुर जैसे मुद्दों पर चर्चा "non-negotiable" है। बता दें कि तीन मई को मणिपुर में जातीय हिंसा भड़कने के बाद से पार्टी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से जवाब मांग रही है।
कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने कहा, ''हम खुद को लोकतंत्र की मां कहते हैं, यह हमारी कैसी लोकतंत्र की मां है जब प्रधानमंत्री बोल नहीं रहे हैं, जब वह (संसद) में भी नहीं जा रहे हैं, जब सार्वजनिक सरोकार के मुद्दों को उठाने की अनुमति नहीं है।"
सरकार का घेराव कर रही कांग्रेस का आरोप है कि मुद्दों को उठाने की अनुमति नहीं मिल रही है। समाचार एजेंसी प्रेस ट्रस्ट ऑफ इंडिया ने कांग्रेस के जयराम रमेश के हवाले से कहा, ''टिप्पणियों को हटाया जा रहा है, सार्वजनिक चिंता के मुद्दे उठाने की अनुमति नहीं दी जा रही है।''
उन्होंने कहा कि सरकार को अपना "माई वे या हाइवे" दृष्टिकोण छोड़ना चाहिए और संसद के सुचारू कामकाज के लिए बीच का रास्ता अपनाना चाहिए। गौरतलब है कि पिछले हफ्ते, कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री की आलोचना की थी जब वह फ्रांस की यात्रा पर थे।
राहुल गांधी ने ट्वीट किया था, "मणिपुर जल गया। यूरोपीय संघ की संसद ने भारत के आंतरिक मामले पर चर्चा की। पीएम ने इस पर एक शब्द भी नहीं कहा!" बकौल राहुल गांधी, राफेल डील के कारण प्रधानमंत्री को फ्रांस की बैस्टिल डे परेड का टिकट मिल गया।
कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने कहा था, "हम चंद्रमा पर जा सकते हैं लेकिन उन बुनियादी मुद्दों से निपटने में असमर्थ या अनिच्छुक हैं जिनका हमारे लोग घर पर सामना कर रहे हैं। नेल्सन निबंध के भारतीय संस्करण को 'द मून एंड मणिपुर' कहा जा सकता है।
रमेश की टिप्पणी का बैकग्राउंड देश की अंतरिक्ष एजेंसी, ISRO के महत्वाकांक्षी मून मिशन, चंद्रयान के संदर्भ में आई। पीएम मोदी समेत उनकी सरकार के मंत्रियों ने ने चंद्रयान के सफल प्रक्षेपण को ऐतिहासिक मौका बताते हुए ट्वीट किया था।
गौरतलब है कि पिछले हफ्ते, यूरोपीय संसद ने भारत में मानवाधिकार की स्थिति पर एक प्रस्ताव पेश किया। विशेष रूप से मणिपुर की हालिया झड़पों पर विदेश मंत्रालय ने कहा, मणिपुर पर टिप्पणी अस्वीकार्य है। ये "आंतरिक मामला है। यूरोपीय संसद का कदम "औपनिवेशिक मानसिकता" दर्शाता है।












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