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'पानी और खून साथ नहीं बहेंगे, आप क्रिकेट मैच खेलेंगे', भारत-पाक मैच के फैसले पर ओवैसी ने पीएम से किया सवाल

Parliament Monsoon Session: संसद में मानसून सत्र में ऑपरेशन सिंदूर पर चर्चा के दौरान विपक्षी पार्टियों ने जमकर मोदी सरकार पर हमला बोला और सवालों की झड़ी लगा दी। इतना ही नहीं ऑपरेशन सिंदूर के बाद मोदी सरकार द्वारा भेजे गए संसदीय दल के प्रतिनिधिमंडल में शामिल विपक्षी सांसदों ने लोकसभा में पहलगाम हमले और ऑपरेशन सिंदूर को लेकर सवाल किए। इन सांसदों में AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी भी शामिल थे।

AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने लोकसभा में अपने भाषण की शुरुआत करते हुए उन 26 लोगों को श्रद्धांजलि दी, जिनकी पहचान केवल उनके नाम और धर्म के आधार पर की गई और फिर उन्हें मार दिया गया। इसके साथ ही पाकिस्‍तान के साथ क्रिकेट मैच खेले जाने के फैसले पर ओवैसी ने मोदी सरकार को घेरा।

Parliament Monsoon Session

सरकार का जमीर यह इजाजत देता है कि....

असदुद्दीन ओवैसी ने प्रधानमंत्री मोदी के पूर्व के एक बयान पर सवाल उठाते हुए कहा कि मोदी जी ने कहा था कि "खून और पानी एक साथ नहीं बह सकते, आतंकवाद और बातचीत एक साथ नहीं हो सकते।" ओवैसी ने सरकार से पूछा कि जब पाकिस्तान से व्यापार बंद कर दिया गया है, उनकी नावों को भारतीय जल सीमा में प्रवेश करने से रोक दिया गया है, पाकिस्‍तान का 80 फीसदी पानी हमने रोक दिया है, तो बैसरन घाटी में मारे गए लोगों के प्रति क्या सरकार का जमीर यह इजाजत देता है कि हम सबकुछ भुलाकर पाकिस्‍तान के साथ क्रिकेट मैच खेले।

क्‍या शहीदों के परिवारों से सरकार कह सकती है कि मैच देखो?

ओवैसी ने आगे सवाल किया कि जब यह तय है कि खून और पानी साथ नहीं बह सकते, तो सरकार किस आधार पर पाकिस्तान के साथ क्रिकेट मैच खेलने की योजना बना रही है? ओवैसी नेमोदी सरकार को चुनौती दी कि सरकार उन शहीदों के परिवारों से क्‍या कह सकती है कि हमने ऑपरेशन सिंदूर किया और अब आप टीवी पर पाकिस्‍तान के साथ भारत का मैच देखिए"?

ओवैसी ने शाही अस्वाहुल्लाह का पढ़ा ये शेर

ओवैसी ने शाही अस्वाहुल्लाह का शेर पढ़ा: "अपने ही हाथों से सर अपना कटना है हमें, मादर-ए-हिंद पर भेंट चढ़ाना है हमें, किस तरह मरते हैं वतन पर ये तमाशा है, जो दुनिया को दिखाना है हमें।"

7.5 लाख जवानों और सुरक्षा बलों की तैनाती के बावजूद कैसे घुसे आतंकी?

ओवैसी ने भारतीय सेना को ऑपरेशन में मिली सफलता के लिए बधाई दी लेकिन सरकार से सवाल किया कि 7.5 लाख जवानों और सुरक्षा बलों की तैनाती के बावजूद, अगर आतंकवादी देश में घुस गए, तो किसकी जवाबदेही है - एलजी, पुलिस, आईबी या कोई और? उन्होंने सरकार से मांग की कि केवल ऑपरेशन करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि जवाबदेही भी तय की जानी चाहिए।

सरकार की नीति विफल साबित हो रही

ओवैसी ने सरकार की 'डिटरेंस' नीति और कश्मीर पर लिए गए निर्णयों की आलोचना की। उन्होंने कहा कि अनुच्छेद 370 को हटाने के बाद भी आतंकवादी घटनाएं हो रही हैं, जिससे सरकार की नीति विफल साबित हो रही है।

तो भारत सरकार चुप क्यों है?

ओवैसी ने अमेरिका और भारत के संबंधों पर भी सवाल उठाया। उन्होंने पूछा कि अमेरिका के एक अधिकारी के बयान से पहले भारत ने कोई प्रतिक्रिया क्यों नहीं दी? क्या हमारी विदेश नीति इतनी निर्भर हो गई है कि अमेरिका यह तय करेगा कि हमें क्या कहना है? चीन के बारे में उन्होंने कहा कि जब वह पाकिस्तान को सैन्य सहायता दे रहा है, तो भारत सरकार चुप क्यों है?

पाकिस्तान को फिर से FATF की ग्रे लिस्ट में डलवाना चाहिए

ओवैसी ने कहा कि अगर भारत खुद को विश्वगुरु मानता है, तो उसे जी-7 देशों को मनाकर पाकिस्तान को फिर से FATF की ग्रे लिस्ट में डलवाना चाहिए। उन्होंने आग्रह किया कि राष्ट्रीय सुरक्षा और विदेश नीति को राजनीतिक मतभेदों का मुद्दा नहीं बनाया जाना चाहिए।

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