माता-पिता को 24 घंटे बिजली मुहैया नहीं करा पाने का कलाम साहब को था मलाल

नयी दिल्ली (ब्यूरो)। देश के पूर्व राष्ट्रपति, भारत की 'अग्नि' मिसाइल को उड़ान देने वाले और मिसाइलमैन के नाम मशहूर वैज्ञानिक अवुल पकिर जैनुल्लाब्दीन अब्दुल कलाम उर्फ डा. एपीजे अब्दुल कलाम नहीं रहे। शिलॉन्ग आईआईएम में लेक्चर देते हुए उन्हें दिल का दौरा पड़ा। आनन-फानन में अस्पताल ले जाया गया लेकिन उन्हें बचाया नहीं जा सका। एपीजे अब्दुल कलाम की उम्र 83 साल थी।

former President APJ Abdul Kalam

अस्पताल के निदेशक जॉन सैलो ने बताया कि "पूर्व राष्ट्रपति लगभग मृत अवस्था में हमारे अस्पताल लाए गए। हम उन्हें होश में लाने का प्रयास करते रहे, लेकिन कामयाब न हो सके। कल डा. कलाम का शव दिल्ली लाया जायेगा। अपने निधन के आखिरी दिनों में एक किताब के माध्यम डा. कलाम ने अपने दिल की बात कही थी जिसका उन्हें हमेशा से मलाल रहा था। किताब के माध्यम से कलाम ने बताया था कि उनको अपने माता-पिता को 24 घंटे बिजली मुहैया नहीं करा पाने का मलाल आजतक है।

डा. कलाम ने अपनी किताब 'रिइग्नाइटिड, साइंटिफिक पाथवेज टू ए ब्राइटर फ्यूचर' में अपनी जिंदगी के बहुत से अनछुए पहलुओं को पेश किया है। उन्होंने कहा था, ‘मैं अपने माता-पिता को ऐसी सुविधाएं उपलब्ध नहीं करा सका, क्योंकि उस समय ऐसी तकनीक नहीं थी। इसका मुझे सबसे अधिक अफसोस है।

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