पैरालंपिक खेल: वो सारी बातें जो आपको जाननी चाहिए, पर शायद आप जानते नहीं

पैरालंपिक खेल 2020
ISTOCK
पैरालंपिक खेल 2020

जब बात पैरा एथलीट या खिलाड़ियों की हो, तो बात हौसलों के भी ऊपर की है. बात सिर्फ चुनौतियों का सामना करने की नहीं है. बात मेहनत करने की भी नहीं है. ये बात है एक बहुत बड़ी लड़ाई की. ऐसी लड़ाई जो पहले ख़ुद से लड़कर जीतनी होती है, उसके बाद में समाज के विकलांग रवैए के ख़िलाफ़ और अंत में खेल के मैदान पर.

किसी का पैर बस के नीचे कुचला गया. किसी को बिजली का ऐसा झटका लगा कि पूरा बाज़ू ही काम के लायक नहीं रहा. किसी का बाज़ू जन्म से ही नहीं है, तो कोई पोलियो का शिकार हुआ. किसी को नज़र नहीं आता और किसी को बहुत कम दिखाई देता है.

दूसरे देशों की ही तरह, भारत की पैरालंपिक टीम ऐसे ही खिलड़ियों से भरी हुई है, जो इस समय जापान की राजधानी टोक्यो में अपनी नई चुनौतियों से भिड़ने के लिए तैयार हैं. पैरालंपिक खेल 25 अगस्त से शुरू हो कर 5 सितंबर तक चलेंगे.

इस बार, भारत के 54 खिलाड़ी पैरालंपिक खेलों में भाग लेंगे. उम्मीद की जा रही है कि इस बार भारत अपना सबसे श्रेष्ठ प्रदर्शन करने में कामयाब होगा.

1972 में भारत ने पहली बार इन खेलों में हिस्सा लिया था. अब तक के इतिहास में भारत ने केवल 12 पदक पैरालंपिक में हासिल किए हैं.

2016 के रियो पैरालंपिक में भारत ने दो गोल्ड मेडल, एक रजत पदक और एक कांस्य पदक जीता था. लेकिन इस बार ये नंबर इसलिए भी बढ़ने की उम्मीद है, क्योंकि भारतीय खेमे में 20 ऐसे खिलाडी हैं, जो विश्व में या तो नंबर एक की रैंकिंग पर हैं या दो या तीन पर. इनमें से कुछ तो मौजूदा विश्व चैम्पियन भी हैं. जैसे-संदीप चौधरी (एफ़-64,जेवलिन थ्रो) और सुन्दर सिंह गुर्जर (एफ़-46, जेवलिन थ्रो).

अब आप सोच रहे होंगे कि जब दोनों ही खिलाड़ी जेवलिन थ्रो की प्रतियोगता में भाग लेते हैं, तो ये एफ़-46 और एफ़-64 क्या चीज़ है?

पैरालंपिक खेल 2020
Getty Images
पैरालंपिक खेल 2020

ग्रेडिंग कैसे तय होती है?

दरअसल, पैरा खिलाड़यों को उनकी शारीरिक स्थिति के आधार पर श्रेणीबद्ध किया जाता है. मान लीजिए कि शॉटपुट खेल में भाग लेने वाले पाँच खिलाड़ी हैं. उनमें से दो ऐसे हैं, जिनके केवल हाथ में विकलांगता है और तीन ऐसे हैं जिनके पूरे बाज़ू में ही विकलांगता है, तो उनको अलग-अलग श्रेणियों में रखा जाएगा ताकि मुकाबला बराबरी का रहे.

जिस तरह ओलंपिक खिलाड़ियों का वज़न और लिंग के आधार पर वर्गीकरण किया जाता है, उसी तरह पैरा खिलड़ियों में इस बात का ध्यान रखा जाता है कि उनकी शारीरिक स्थिति उनके खेल को किस हद तक प्रभावित कर रही है, यही उनकी श्रेणी को तय करता है.

किसी खिलाड़ी को 'पैरा खिलाड़ी' माना भी जाएगा या नहीं, इसके 10 मानदंड होते हैं-

1) मांसपेशियों की दुर्बलता, 2) जोड़ों की गति की निष्क्रियता, 3) किसी अंग में कोई कमी, 4) टांगों की लम्बाई में फ़र्क़, 5) छोटा क़द, 6) हाइपरटोनिया यानी मांसपेशियों में जकड़न, 7) शरीर के मूवमेंट पर नियंत्रण की कमी 8) एथेटोसिस यानी हाथ-पैरों की उँगलियों की धीमी मंद गति, 9) नज़र में ख़राबी और 10) सीखने की अवरुद्ध क्षमता.

पैरालंपिक खेल 2020
Getty Images
पैरालंपिक खेल 2020

एफ़ यानी फ़ील्ड की प्रतियोगिताएं जैसे शॉटपुट, जेवलिन थ्रो, डिसकस थ्रो. इसमें भी विकलांगता के हिसाब से लगभग 31 श्रेणियाँ होती हैं. वहीं टी यानी ट्रैक की प्रतियोगिताएँ- जैसे रेस और जंप. इसमें 19 श्रेणियाँ होती हैं.

इनमे नंबर बदलता हुआ नज़र आता है - जैसे, एफ़-32,33,34,35... तो समझिए कि जितना कम नंबर है उतनी ही अधिक विकलांगता है.

इसके अलावा, तीरंदाज़ी, बैडमिंटन, साइकिलिंग, निशानेबाज़ी, ताइक्वांडो, जूडो तथा चार व्हीलचेयर के खेल (बास्केटबॉल, रग्बी, टेनिस और फ़ेंसिंग) भी पैरालंपिक में शामिल हैं. व्हील चेयर पर खेले जाने वाले खेल डब्ल्यूएच-1 या डब्ल्यूएच-2 के नाम से जाने जाते हैं.

इनमें से जो खेल खड़े होकर खेले जाते हैं, वो एस (स्टैंडिंग) से शुरू होते हैं. अगर एस के आगे एल लिखा है, तो मतलब शरीर के निचले हिस्से (लोअर लिंब) में दिक्क़त है और अगर एस के आगे यू लिखा है, तो मतलब शरीर के ऊपर के हिस्से (अपर लिंब) में विकलांगता है.

अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक दिवस मनाने की क्या है कहानी, टोक्यो ओलंपिक की तैयारी और भारत की मुश्किल

भारत की दावेदारी

भारत के 54 खिलाड़ी इस बार 9 खेलों में हिस्सा लेंगे. इनमें रियो पैरालंपिक गेम्स के गोल्ड मेडल विजेता देवेंद्र झाझरिया (जेवलिन थ्रो, एफ़-46) और मरियप्पन थांगवेलु (हाईजम्प, टी-63) इस बार भी प्रबल दावेदार होंगे.

झाझरिया इस समय वर्ल्ड रिकॉर्ड होल्डर हैं और मरियप्पन विश्व के नंबर दो खिलाडी हैं. संदीप चौधरी भी जेवलिन थ्रो में भाग लेंगे, पर उनकी केटेगरी एफ़-64 है. सुन्दर सिंह गुर्जर (एफ़64) और अजीत सिंह (एफ़41) भी जेवलिन थ्रो में हिस्सा लेंगे.

पलक कोहली
BBC
पलक कोहली

प्रमोद भगत, पारुल परमार, पलक कोहली, कृष्णा नागर, तरुण ढिल्लों और सुहास एलवाई बैडमिंटन में भारत की दावेदारी पेश करेंगे. सुहास एलवाई भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारी हैं और इस वक़्त उत्तर प्रदेश में नोएडा के ज़िलाधिकारी (डीएम) हैं.

तीरंदाज़ी में राकेश कुमार, श्याम-सुन्दर, ज्योति बालियान और हरविंदर सिंह भाग लेंगे.

कैसे होता है चयन?

सामान्य खेलों की तरह पैरा गेम्स में भी एक न्यूनतम योग्यता मानदंड (एमईसी) होता है, जैसे शॉटपुट में 10 मीटर और जेवलिन थ्रो में 40 मीटर जैसा एक लक्ष्य निश्चित किया जाता है.

इंटरनेशनल पैरालंपिक कमेटी (आईपीसी) ये मानक तय करती है. लेकिन ये जरूरी नहीं कि अगर खिलाड़ी ने इस लक्ष्य को हासिल कर लिया तो उसे क्वालीफ़ाइड मान लिया जाएगा.

आईपीसी हर एक देश को एक कोटा देता है और उससे ज्यादा ख़िलाड़ी भाग नहीं ले सकते. अगर कोटे से अधिक ख़िलाड़ी एमईसी हासिल कर लें, तो हर देश उन खिलाड़ियों के बीच फ़ाइनल सेलेक्शन ट्रायल करवाता है. इसके अलावा, विश्व रैंकिंग के आधार पर भी खिलाड़ियों का चयन होता है.

भारत के पैरा ख़िलाड़ी कहाँ करते हैं तैयारी?

दीपा मलिक
Getty Images
दीपा मलिक

भारत में पिछले कई सालों से पैरा खिलाड़ियों को दी जाने वाली सुविधाओं में काफ़ी सुधार हुआ है, लेकिन चुनौतियाँ और संसाधनों की कमी अब भी है. जिन केंद्रों में सामान्य ख़िलाड़ी अभ्यास करते हैं, उन्हीं स्टेडियमों में पैरा ख़िलाड़ी भी अपने विशेष प्रशिक्षकों के साथ तैयारी करते हैं.

भारतीय पैरालंपिक संघ की अध्यक्ष दीपा मलिक के अनुसार, "भारत सरकार ने 17 करोड़ रुपए पैरा खिलड़ियों के प्रशिक्षण, विदेशी दौरे और सुविधाएँ प्रदान करने में खर्च किए हैं."

उनका कहना है कि सरकार की 'टॉप्स स्कीम' का खिलाड़ियों को काफ़ी फ़ायदा हुआ है. कोरोना महामारी के कारण लॉकडाउन के दौरान, चाहे लाखों रुपए की व्हील चेयर हों या टेबल टेनिस की टेबल, खिलाड़ियों को काफ़ी चुनौतियों के बावजूद सब कुछ मुहैय्या करवाया गया.

दीपा का मानना है, "अब जिस चीज़ की सबसे अधिक ज़रूरत है, वो है अच्छे कोच और अच्छी ट्रेनिंग की सुविधाएँ."

(पीटीआई के वरिष्ठ खेल पत्रकार अमनप्रीत सिंह से बातचीत पर आधारित)

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)

Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+