पाकिस्तान को सता रहा डर, मसूद अजहर पर पलटी मार सकता है चीन
ब्रिक्स घोषणा पत्र में भारत की बड़ी कूटनीतिक जीत हुई। भारत की पहल पर ब्रिक्स घोषणा पत्र में लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद आतंकवादी संगठनों का नाम लिखा गया। चाइना में हुई बैठक का असर पाकिस्तान में देखने को मिल रहा है। पाकिस्तानी मीडिया को अब इस बात का डर सता रहा है कि अगर भारत-यूएन में पाकिस्तानी आंतकवादी मसूद अजहर को बैकलिस्ट करने के लिए यूएन में प्रस्ताव लेकर आता है तो चीन-पाकिस्तान को धोखा दे सकता है। क्योंकि चीन ने ब्रिक्स घोषणा पत्र पर हस्ताक्षर किए हैं। बता दें, ब्रिक्स घोषणा पत्र में लिखी गई सारी बातें ब्रिक्स देशों के लिए बाध्य होती हैं।


कौन है मसूद अजहर
मसूद अजहर आतंकी संगठन जैश-ए-मुहम्मद का सरगना है। इस आतंकी पर कई आरोप हैं। मसूद को सबसे पहले साल 1994 में भारतीय सेना ने हमले की योजना बनाते गिरफ्तार किया था। लेकिन साल 1999 में भारत सरकार को उसे कंधार विमान अपहरण कांड में छोड़ना करना पड़ा। पाकिस्तान जाने के बाद इसने साल 2000 में जैश नामक संगठन बनाया। इसने 13 दिसंबर, 2001 में भारतीय संसद पर हमला किया। लेकिन अंतरराष्ट्रीय दबाव में आकर पाकिस्तान सरकार ने साल 2002 में संगठन को बैन कर दिया।

अजहर मसूद पर लगे हैं कई आरोप
इस पर अक्टूबर 2001 में जम्मू-कश्मीर विधानसभा पर हमला करने का भी आरोप है। आतंकी मसूद अजहर पर पठानकोट एयरबेस पर हमले की साजिश रचने का आरोप भी है। कुछ मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक उसने लाहौर में बैठकर पठानकोट हमले की साजिश रची। उस पर साल 2002 में अमेरिकी पत्रकार डेनियर पर्ल की हत्या करने का आरोप भी है।

चीन क्यों नहीं करता यूएन में पाकिस्तानी आतंकी का विरोध
यूएन में जब भी भारत आंतकी मसूद अजहर के खिलाफ कुछ प्रस्ताव लाता है चीन वीटो लगा देता है। कई जानकारों का कहना है कि अजहर को बचाने के पीछे चीन की कूटनीतिक चाल का हिस्सा है। अगर पाकिस्तान आंतकी देश घोषित हो गया तो इसका पाकिस्तान आर्थिक तौर पर बुरा प्रभाव पड़ेगा और इसका नुकसान चीन को भी होगा। इसके साथ ही अगर चीन-पाकिस्तान का साथ देता है तो वो पाकिस्तान का करीब दोस्त बन जाएगा। एशिया में भारत की बढ़ती ताकत को देखते हुए चीन को पाकिस्तान की जरुरत है। ये वजह है कि चीन भारत की तमाम कोशिशों को नाकाम करता रहता है।

क्या लिखा है ब्रिक्स घोषणा पत्र में
ब्रिक्स घोषणा पत्र से पाकिस्तान पूरी तरह से तिलमिलाया हुआ है। ब्रिक्स घोषणा पत्र में कहा गया है कि आतंकवाद को रोकने और इसके खिलाफ लड़ाई में हर राष्ट्र को अहम भूमिका निभानी चाहिए। साथ ही इस घोषणा पत्र में पाकिस्तान स्थिति कई आंतकी संगठनों का नाम लिया गया है। इसमें तालिबान, इस्लामिक स्टेट (आईएस), अलकायदा जैश-ए-मोहम्मद और लश्कर-ए-तैयबा का नाम भी शामिल किया गया।












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