तालिबान के साथ भारत के जुड़ाव का लंबा इतिहास है, जिससे PAK को हुई हमेशा परेशानी: हामिद मीर
तालिबान के साथ भारत के जुड़ाव का लंबा इतिहास है, जिससे PAK को हुई हमेशा परेशानी: हामिद मीर
नई दिल्ली, 18 जुलाई: पाकिस्तान के मशहूर पत्रकार हामिद मीर ने अंग्रेजी अखबार वाशिंगटन पोस्ट में एक ओपिनियन पीस लिखा है। इस लेख में पत्रकार हामिद मीर ने लिखा है,''तालिबान के साथ भारत के जुड़ाव का इतिहास लंबा रहा है। जिससे अक्सर पाकिस्तान में सरकार को परेशानी हुई है।'' उन्होंने कहा है कि भारत का तालिबान के साथ जुड़ाव का इतिहास है, जिसने अक्सर पाकिस्तान में सरकार को परेशान किया है क्योंकि पाक की सरकार अफगानिस्तान में दिल्ली की भागीदारी को कम करने के लिए इच्छुक है। हामिद मीर ने ये लेख ऐसे वक्त पर लिखा है, जब अफगानिस्तान पर तालिबान कब्जा करने में जुटा है और वहां सीरिया कानून लागू करने की पूरी कोशिश कर रहा है।

'भारत ने तालिबान के साथ पहला सीधा संपर्क 2013 में किया'
हामिद मीर ने अपने लेख में लिखा, ''भारतीय अधिकारियों ने तालिबान के साथ अपना पहला सीधा संपर्क 2013 में किया था, जब उन्होंने तालिबान के वरिष्ठ नेता अब्दुल सलाम जीफ को एक सम्मेलन के लिए वीजा जारी किया था। अब्दुल सलाम जीफ पाकिस्तान में तालिबान का राजदूत था लेकिन 9/11 के बाद पाकिस्तानी सरकार ने उसे गिरफ्तार कर लिया और उसे संयुक्त राज्य अमेरिका को सौंप दिया गया था।''

हामिद मीर ने पूछा- तालिबान के नेता अब्दुल सलाम जीफ भारत क्यों गया था?
हामिद मीर ने आगे अपनी लेख में लिखा, तालिबान के वरिष्ठ नेता अब्दुल सलाम जीफ की 2010 में किताब आई थी,'माई लाइफ विद द तालिबान', जो 2010 में प्रकाशित हुई थी। अब्दुल सलाम जीफ का नाम संयुक्त राष्ट्र आतंकवाद सूची से भी हटा दिया गया था, उसके बाद वब किस समय भारत गया था, यह आज भी एक बड़ा सवाल है। भारत जाने के लिए जीफ क्यों राती हुआ और भारत में उन्हें अपने देश के अंदर क्यों आने दिया?''
हामिद मीर ने कहा, अफगान तालिबान 9/11 के बाद पाकिस्तान के यू-टर्न से बिल्कुल भी खुश नहीं थे। अब्दुल सलाम जीफ ने अपनी किताब में पाकिस्तानी सरकार के खिलाफ अपनी नाराजगी साफ तौर पर जाहिर की है।

'उनके एक मुंह में दो जीभ हैं, और एक सिर पर दो चेहरे हैं...'
हामिद मीर ने लिखा है, 9/11 के बाद पाकिस्तान के यू-टर्न से तालिबान किस कदर गुस्सा था ये इस बात से पता चलता है कि अब्दुल सलाम जीफ ने अपनी किताब में लिखा था, "उनके एक मुंह में दो जीभ हैं, और एक सिर पर दो चेहरे हैं ताकि वे हर किसी की भाषा बोल सकें, वे हर किसी का इस्तेमाल करते हैं, हर किसी को अपने फायदे के लिए धोखा देते हैं।"
उन्होंने आलोचना की थी कि कैसे उनके सहयोगियों को पाकिस्तान के जेलों में प्रताड़ित किया गया था। तालिबान के एक नेता अब्दुल गनी बरादर को 2010 में पाकिस्तान में गिरफ्तार किया गया था। यह गिरफ्तारी बहुत महत्वपूर्ण थी क्योंकि बरादार अफगानिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति हामिद करजई के संपर्क में था, जो तालिबान के साथ बातचीत शुरू करने के लिए रूस, ईरान और भारत पर दबाव डाल रहा था।
मीर ने कहा, पाकिस्तान बरादार के करजई के साथ संपर्क से नाखुश था और उसे गिरफ्तार कर लिया। पाकिस्तान के हाथों हुए इस अपमान का बदला लेने के लिए तालिबान ने रूस, ईरान और भारत के साथ बात की थी।

'2018 में तालिबान नेताओं ने भारतीय प्रतिनिधियों से की थी मुलाकात'
हामिद मीर ने आगे लिखा, पाकिस्तान ने 2018 में बरादर को जेल से रिहा कर दिया था। उसके बाद बरादर को तालिबान ने कतर में वार्ता दल का प्रमुख नियुक्त किया था। उसी साल (2018) कुछ वरिष्ठ तालिबान नेताओं ने मास्को में भारतीय प्रतिनिधियों से मुलाकात की थी। वे भारत से अपना बदला चाहते थे, क्योंकि भारतीयों ने अतीत में तालिबान विरोधी ताकतों को सपोर्ट किया था। वहीं भारत भी तालिबान को उलझाने में दिलचस्पी लेता था क्योंकि अफगान राष्ट्रपति अशरफ गनी उनके खिलाफ एक संयुक्त मोर्चा बनाने बार-बार फेल हो रहे थे।

''भारत ने 9/11 के बाद अफगानिस्तान में अरबों डॉलर किया था निवेश'
हामिद मीर ने लिखा, ''भारत ने 9/11 के बाद अफगानिस्तान में अरबों डॉलर का निवेश किया था। भारत ने तो काबुल में एक नए संसद भवन भी बनवा दिया था। वहीं बांध, सड़कें, स्कूल, विश्वविद्यालय, अस्पताल और खेल स्टेडियम भी अफगानिस्तान के अलग-अलग हिस्सों में बनवाए थे। लेकिन यह सब बेकार चला जाता अगर वह तालिबान के साथ नहीं जुड़ा होता।''
हामिद मीर ने दावा किया, पिछले साल अमेरिका ने भी भारत से तालिबान के साथ जुड़े रहने के लिए कहा था। भारत को इस बात की चिंता थी कि अफगानिस्तान से अमेरिकी सैनिकों की वापसी से जम्मू-कश्मीर में उग्रवाद को बढ़ावा मिल सकता है। जैसा कि 1989 में देखने को मिला था, जब अफगानिस्तान से रूसी सैनिकों ने वापसी की थी।

'तालिबान ने भारत को निष्पक्ष रहने की दी है चेतावनी'
मीर ने आगे लिखा, तालिबान ने भारत को स्पष्ट कर दिया है कि वे कश्मीर में किसी भी तरह का हस्तक्षेप नहीं करेंगे। तालिबान यह भी जानता था कि भारत अफगानिस्तान को सैन्य सपोर्ट भी दे रहा है। इसलिए तालिबान ने भारत को निष्पक्ष रहने की चेतावनी दी है।
हामिद मीर ने दावा किया, पिछले महीने कतर के एक शीर्ष अधिकारी ने खुलासा किया कि भारतीय अधिकारियों और तालिबान नेताओं ने दोहा में एक बैठक की थी। हालांकि पाकिस्तान की सरकार इन खबरों से बिल्कुल खुश नहीं थी।












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