कुलभूषण जाधव केस में प्रोपेगेंडा कर रहा है पाकिस्तान - आईसीजे में भारत का बयान

नई दिल्ली, पुलवामा में सीआरपीएफ के काफिले पर आतंकवादी हमले के चलते भारत और पाकिस्तान के बीच जारी तनाव के बीच अंतरराष्ट्रीय न्यायालय में पूर्व नौसैनिक कुलभूषण जाधव के केस में सुनवाई शुरू हो गई है। सोमवार से शुरू हुई इस सुनवाई में कुलभूषण जाधव के बचाव के लिए भारतीय वकीलों की टीम की अगुवाई कर रहे वरिष्ठ वकील हरीश साल्वे ने कोर्ट में कहा कि पाकिस्तान के पास जाधव के खिलाफ कोई पुख्ता सबूत नहीं हैं। वह सिर्फ दुर्भावना के तहत कार्रवाई कर रहा है। साल्वे ने कहा कि "पाकिस्तान ने वियना कन्वेंशन का उल्लंघन किया है और पाकिस्तान में जाधव की हिरासत को गैरकानूनी घोषित किया जाना चाहिए।" गौरतलब है कि पाकिस्तान की मिलिट्री कोर्ट ने जाधव को जासूसी और आतंकवादी गतिविधि में शामिल होने के मामले में मौत की सजा सुनाई है। पाकिस्तानी मिलिट्री कोर्ट के उस फैसले के खिलाफ फिलहाल आईसीजे में ये मामला चल रहा है।

कुलभूषण जाधव केस में प्रोपेगेंडा कर रहा है पाकिस्तान

साल्वे ने अदालत से कहा कि एक बेकसूर भारतीय की जान खतरे में है और उसे कानूनी सहायता देने की भारत की मांग को भी पाकिस्तान 13 बार नजरअंदाज कर चुका है। उन्होंने कहा कि इसमें कोई शक नहीं कि पाकिस्तान इसपर प्रोपेगेंडा कर रहा है, जबकि वह बिना देरी के उसे कानूनी सहायता देने के लिए बाध्य था। साल्वे ने ये भी साफ किया कि न केवल जाधव को कानूनी मदद से इनकार किया गया है, बल्कि पाकिस्तान उनके किसी आतंकवादी गतिविधि में शामिल होने का कोई ठोस सबूत भी नहीं दे पाया है। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान ने उसके खिलाफ काल्पनिक कहानी तैयार की है, जिसमें कोई दम नहीं है। गौरतलब है कि पाकिस्तान का दावा है कि जाधव को 2016 में ईरान से बलूचिस्तान में घुसने के बाद गिरफ्तार किया गया था। जबकि, भारत ने फिर से साफ किया कि नेवी से रिटायर होने के बाद वो बिजनेस के सिलसिले में ईरान गए थे, जहां से उन्हें अगवा कर लिया गया था। आपको बता दें कि जाधव को सजा सुनाए जाने के बाद भारत में जबर्दस्त गुस्सा उमड़ पड़ा था।

48 साल के रिटायर्ड नौसेना अधिकारी कुलभूषण जाधव को मिली इस सजा के खिलाफ भारत 8 मई, 2017 को अंतरराष्ट्रीय न्यायालय गया था। आईसीजे की 10 सदस्यीय बेंच ने 18 मई, 2017 को इस मामले की सुनवाई पूरी होने तक सजा के अमल पर रोक लगा दी थी। पाकिस्तानी मिलिट्री कोर्ट से उन्हें अप्रैल 2017 में मौत की सजा सुनाई गई थी। आईसीजे ने इस साल 18 से 21 फरवरी तक इस चर्चित मुकदमें की सुनवाई की तारीख मुकर्रर की है। सोमवार को इसमें भारत की ओर से दलीलें पेश करने के बाद मंगलवार को पाकिस्तान अपना पक्ष रखेगा। 20 तारीख को फिर से भारत अपना जवाब दाखिल करेगा और 21 को पाकिस्तान अपनी आखिरी दलीलें पेश करेगा। पाकिस्तान की ओर से वहां के अटॉर्नी जनरल अनवर मंसूर अपना पक्ष रखेंगे। उम्मीद है कि इस साल गर्मी के दिनों आईसीजे अपना फैसला सुना देगा।

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