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पाकिस्तान ने 2009 के लोकसभा चुनाव को प्रभावित करने के लिए लिया था आतंकी हमलों का सहारा, यूएस केबल में खुलासा

नई दिल्ली: भारत में लोकसभा चुनाव को अब बहुत कम समय बचा है। पुलवामा में सीआरपीएफ के काफिले में हमले के बाद ये आशंका जताई जताई जा रही थी चुनावों को प्रभावित करने के लिए पाकिस्तान आतंकियों का सहारा ले सकता है। इसी बीच अमेरिकी सरकार के केबल ने 2009 लोकसभा चुनावों को लेकर बड़ा खुलासा किया है। उन्होंने बताया कि पाकिस्ताने ने जैश और लश्कर जैसे आतंकी संगठनों की मदद से साल 2009 के लोकसभा चुनाव को प्रभावित करने की कोशिश की थी। इस दौरान सीमा पार से भारत में जमकर घुसपैठ कराई गई थी।

'2019 चुनाव में भी हो सकती है कोशिश'

'2019 चुनाव में भी हो सकती है कोशिश'

कूटनीतिक सूत्रों को इस बात का खतरा है कि आगामी आम चुनाव से पहले भी वैसी ही घटनाएं एक बार फिर सामने आ सकती हैं। जम्मू-कश्मीर के पुलवामा में हुए आतंकी हमले को उसी रूप में देखा जा रहा है। पुलवामा आतंकी हमले का जवाब देने के लिए भारत के पास सैन्य कार्रवाई करने का विकल्प है। इस हमले के पीछे एक धारणा ये है कि इसमें पाकिस्तान की खूफिया एजेंसी आईएसआई का हाथ भी हो सकता है। ये भारत पर वार करने के लिए एक कदम है और चुनाव से पहले भारत को बांटने की योजना है।

यूएस केबल से हुआ खुलासा

यूएस केबल से हुआ खुलासा

अगस्त 2011 में लीक यूएस केबल के मुताबिक, तत्कालीन राष्ट्रीय
सुरक्षा सलाहकार एमके नारायणन और विदेश सचिव मेनन ने आशंका जताई थी कि आगामी आम चुनाव घुसपैठ में हो रही बढ़ोतरी की वजह से प्रभावित हो सकता है। आतंकी गतिविधियों की वजह से चुनाव के आयोजन और संभवतः इसके परिणाम पर भी असर हो सकता है और ये भारत सरकार को बड़ी कार्रवाई करने के लिए नया दबाव डाल सकती है। अप्रैल 2009 के लोकसभा चुनाव से एक हफ्ते पहले सीनियर भारतीय अधिकारियों और अफगानिस्तान व पाकिस्तान के विशेष प्रतिनिधि रिचर्ड हॉलब्रुक और जॉइंट चीफ ऑफ स्टाफ एडमिरल माइक मुलेन के बीच 8 अप्रैल को बैठक हुई थी। हालांकि ये साफ नहीं हो पाया कि अमेरिका ने पाक पर कोई दवाब डालने में सफल हो पाया था या नहीं। लेकिन चुनाव से पहले कोई आतंकी घटना सामने नहीं आई थी।

'आतंकियों की दी थी ट्रेनिंग'

'आतंकियों की दी थी ट्रेनिंग'

यूएस केबल में खुलासा हुआ है कि जीपीएस, मैप और कम्पास के इस्तेमाल से यह संकेत मिलेत हैं इन आतंकियों को उच्च स्तर का सैन्य प्रशिक्षण दिया गया था। वे अच्छे से तैयार थे और तार की बाड़(फेन्स)को तोड़ने के लिए उन्होंने ब्युटेन गैस सिलिंडर का इस्तेमाल किया था। भारत ने साझा किया कि इन गतिविधियों में तेजी मार्च 2009 की शुरुआत से देखी गयी थी।और आतंकियों के समूहों ने पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (पीओके) के हाजी पीर क्षेत्र में डेरा डाल दिया। इसके अलावा 281 आतंकवादी की लोकेशन लॉन्चिंग पैड पर थी, जो सीमा पार कर अंदर जाने के लिए इंतजार कर रहे थे। यूएस केबल में हुए खुलासों के मुताबिक, घुसपैठियों की संख्या को देखते हुए भारत के लिए ये मानना अकल्पनीय था कि इसके पीछे भारत सरकार का हाथ नहीं है। अमेरिकी अधिकारियों के साथ साझा पेपर के मुताबिक, 2008 में घुसपैठ की कुल 57 घटनाएं सामने आई थीं, जबकि 2009 के पहले चार महीने में 94 आतंकी घाटी के जरिए देश में प्रवेश कर गए थे और हिज्बुल मुजाहिदीन, लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद के घुसपैठियों को भारत में घुसाया जा रहा था।

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