व्हाट्स एप पर बने ग्रुप पर पाकिस्तान की ओर से कश्मीर के युवाओं को पत्थरबाजी के मिलते हैं ऑर्डर
जम्मू कश्मीर पुलिस के डीजीपी ने कहा व्हाट्सएप और दूसरे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के जरिए कश्मीर के युवाओं को पत्थरबाजी के लिए भड़का रहा है पाकिस्तान।
नई दिल्ली। जम्मू कश्मीर पुलिस की ओर से एक बार फिर से एनकाउंटर के समय बीच में बाधा डालने वाले युवाओं को वॉर्निंग दी गई है। जम्मू कश्मीर पुलिस ने कहा है कि युवाओं पर एनकाउंटर साइट पर आना आत्महत्या करने जैसा है। इसके अलावा पुलिस की ओर से पाकिस्तान को कश्मीर के युवाओं को पत्थरबाजी के लिए उकसाने का जिम्मेदार ठहराया गया है।

व्हाट्सएप पर लोकेशन तक की जानकारी
जम्मू कश्मीर पुलिस के डीजीपी एसपी वैद्य ने कहा कि पाकिस्तान की ओर से सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म जैसे व्हाट्सएप पर कई ग्रुप बनाए गए हैं। इन ग्रुप्स पर युवाओं को पत्थरबाजी के लिए उकसाया जाता है। उनका कहना है कि इन ग्रुप्स को सिर्फ इसलिए बनाया गया है ताकि पत्थरबाजी के लिए युवाओं को इकट्ठा किया जा सके। इन ग्रुप्स पर युवाओं को एक लोकेशन के बारे में बताया जाता है और बताया जाता है कि किस जगह पर कौन सा एनकाउंटर चल रहा है। इसके बाद युवाओं से वहां पर पहुंचने को कहा जाता है। एक पुलिस ऑफिसर की ओर से कहा गया है कि जैसे ही एनकाउंटर शुरू होता है लोकेशन की सटीक जानकारी ग्रुप्स पर युवाओं के साथ शेयर कर दी जाती है। इसके बाद पाकिस्तान में मौजूद आतंकी संगठन युवाओं से उस जगह पर पहुंचने को कहते हैं।
गोली को नहीं मालूम किसे मारना है
पुलिस का कहना है कि जांच में यह बात सामने आई है कि यह संगठन एक इलाके में मौजूद युवाओं को दूसरे युवाओं से कनेक्ट करने के लिए कई तरह के लिंक्स भी शेयर करते हैं। जम्मू कश्मीर पुलिस के डीजीपी एसपी वैद्य की मानें तो यह एक सच है कि देश के दुश्मन सोशल मीडिया का दुरुपयोग कर रहे हैं। डीजीपी एसपी वैद्य ने यह भी कहा कि एनकाउंटर वाली साइट पर जाकर सिक्योरिटी फोर्सेज पर पत्थर फेंक कर युवा आत्महत्या कर रहे हैं। उन्होंने इन युवाओं से इस तरह की गतिविधियों से दूर रहने की अपील भी की। एसपी वैद ने कहा, 'एनकाउंटर में सुरक्षा बल और पुलिस भी खुद को गोलियों से बचाने के लिए बुलेटप्रूफ गाड़ी या किसी मकान का सहारा लेती है और ऐसी जगह पर जाकर युवा आत्महत्या कर रहे हैं।' उन्होंने युवाओं से मुठभेड़ स्थलों पर नहीं आने की अपील की। वैद ने यह भी कहा कि गोली नहीं जानती कि वह किसे लगेगी। ऐसे में युवाओं से अपील है कि उन्हें अपने घरों में रहना चाहिए और एनकाउंटर साइट पर नहीं जाना चाहिए।












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