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कश्मीर में सरपंच की हत्या के पीछे पाकिस्तान का हाथ

By Ajay Mohan
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Kashmir security
श्रीनगर। दक्षिणी कश्मीर के पुलवामा जिले में अलगाववादी आतंकवादियों ने एक सरपंच की हत्या कर दी है। इस वारदात के बाद लोग सहमे हुए हैं कि अगर वो 24 तारीख को वोट डालने गये तो उनका भी ऐसा ही हश्र होने वाला है। लेकिन उनका यह हश्र कौन करेगा? उत्तर है पाकिस्तान समर्थित लोग।

जी हां 17 अप्रैल को बंगाल से लेकर उत्तर प्रदेश और कर्नाटक में धुआंधार मतदान के बाद कश्मीरी लोगों में एक उत्साह उत्पन्न हुआ था कि 24 अप्रैल को होने वाले दूसरे फेज में वो भी ऐसे ही जमकर वोटिंग करेंगे, लेकिन इससे पहले कि उत्साह वोट की स्याही में परिवर्तित होता, कि यहां पर सरपंच की हत्या कर लोगों को धमका दिया गया है।

पुलिस के अनुसार घटना गुरुवार देर शाम की है। पुलिस अधिकारी ने बताया कि आतंकवादियों ने गुलजारपुरा (अवंतीपुरा) गांव में सरपंच मुहम्मद अमीन पंडित के घर के बाहर उन्हें गोली मार दी, जिसमें वह गंभीर रूप से घायल हो गए। उन्हें तुरंत अस्पताल ले जाया गया, लेकिन उनकी मौत हो गई।

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जम्मू एवं कश्मीर में 20 साल बाद वर्ष 2011 में सरपंचों एवं पंचों सहित ग्राम प्रतिनिधियों के निर्वाचन के लिए हुए चुनाव के बाद से ही वे अलगाववादी आतंकवादियों के निशाने पर हैं। ग्राम प्रतिनिधियों ने राज्य सरकार से सुरक्षा की मांग की है, लेकिन प्रशासन ने यह कहते हुए इससे इंकार किया है कि एक-एक व्यक्ति को सुरक्षा देने के लिए हजारों सुरक्षाकर्मियों की आवश्यकता होगी।

इसके पीछे पाकिस्तान कैसे?

कश्मीर भारत का अभ‍िन्न हिस्सा है यह पूरी दुनिया जानती है और पाकिस्तान को यह बात कभी हजम नहीं हुई और पाकिस्तान कभी नहीं चाहता है कि कश्मीर में लोकतांत्रिक ढंग से सब काम हो। यही कारण है कि जब-जब कश्मीर में चुनाव होते हैं, चाहे विधानसभा या लोकसभा, हत्याएं होना आम बात हैं। इन हत्याओं की जिम्मेदारी तो अलगाववादी आतंकी संगठन ही लेते आये हैं। कल जो हुआ उसके पीछे भी अलगाववादी संगठन ही थे, लेकिन इन संगठनों को वित्तीय सहायता कौन दे रहा है? वो असल में पाकिस्ता नही है।

कश्मीर मुद्दों के समीक्षक विरेंद्र सिंह चौहान का कहना है कि पाकिस्तान हमेशा से कश्मीर के अलगाववादी संगठनों को ताकत देता रहा है। यह बात हमारी इंटेलीजेंस एजेंसियां सिद्ध भी कर चुकी हैं। इन संगठनों की डायरेक्ट फंडिंग पाक से ही होती है। ये संगठन कभी नहीं चाहते हैं कि डेमोक्रेटिक प्रोसेस के अंतर्गत यहां पर काम हों। पिछले चुनाव में भी सरपंचों की हत्याएं की गईं। घरों में चिठ्ठ‍ियां डालीं, परचे लगाये गये, और लोगों को खुली धमकियां दी गईं कि वो चुनाव का हिस्सा नहीं बनें।

वीरेंद्र सिंह चौहान का कहना है कि इसकी जिम्मेदार मेन स्ट्रीम पॉलिटिकल पार्ट‍ियां भी हैं, क्योंकि वोटबैंक मजबूत करने के चक्कर में ये पार्टियां हर चीज को कम्युनलाइज करने की फिराक में रहती हैं। अफसोस इस बात का है कि जिन पार्टियों के सांसद, विधायक सदन तक पहुंच कर भारतीय संविधान की कसम खाते हैं वे कश्मीर पहुंचते ही पाकिस्तानी समर्थ‍ित संगठनों को प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रूप से बढ़ावा देने लगते हैं।

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English summary
Terrorists from separatist organization are now targeting village Sarpanchs in Kashmir. One more sarpanch has been killed in Kashmir just before second phase polling.
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