पद्मावती विवाद: अब नहीं दिखेगा पद्मिनी का इतिहास, चित्तौड़गढ़ किले के बोर्ड को ASI ने ढका
जयपुर। संजय लीला भंसाली की फिल्म पद्मावती को लेकर पूरे देश भर में विवाद चल रहा है। जगह-जगह उसकी रिलीज पर रोक लगाने के लिए विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं। इसी बीच अब भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (Archeological Survey of India) ने चित्तौड़गढ़ किले में लिखे इतिहास को छुपा दिया है। एएसआई ने चित्तौड़ स्थित पद्मिनी महल के पास इतिहास लिखे पत्थर को ढक दिया है। बताया जा रहा है कि एएसआई ने राजपूत संगठन के दबाव के चलते ये कदम उठाया है। बता दें कि इस बोर्ड पर लिखी जानकारी के अनुसार पद्मिनी महल में लगे कांच के जरिए ही दिल्ली के शासक अलाउद्दीन खिलजी ने पद्मिनी को प्रतिबिंब में देखा था।

करणी सेना ने पद्मिनी महल में लगे कांच को तोड़ दिया था
हालांकि कई संगठन इस बात का विरोध कर रहे हैं कि रानी कभी भी खिलजी के सामने नहीं आई और यह इतिहास गलत है और फिल्म में भी इतिहास से छेड़छाड़ की गई है। इस विवाद के चलते ही करणी सेना ने पद्मिनी महल में लगे कांच को तोड़ दिया था, जिसके लिए कहा जाता है कि इसके जरिए खिलजी ने रानी को देखा था। संगठनों का कहना है कि गाइड अपनी कमाई के लिए ये कहानी बताते आ रहे हैं।

राजस्थान शिक्षा बोर्ड भी अपनी किताबों में बदलाव कर सकता है
एएसआई के साथ अब राजस्थान शिक्षा बोर्ड भी अपनी किताबों में बदलाव कर सकता है, जिसमें ये कहानी लिखी हुई है। यह कहानी राजस्थान में प्रचलित है और अब इसका विरोध किया जा रहा है। इससे पहले राजस्थान पर्यटन विभाग ने भी खिलजी को पद्मावती को देखने की बात कहते हुए एक ट्वीट किया था, जिसे विरोध के बाद हटा लिया गया था।

चित्तौड़गढ़ किले का इतिहास
ऐतिहासिक महत्ता के अलावा देखने में भी यह किला कम नहीं है। भारत के सबसे बड़े किले में पहले स्थान पर चित्तौड़गढ़ किले का ही नाम आता है। इस किले में राजस्थान के माटी के लाल महाराणा प्रताप और दिल्ली के बादशाह अकबर के बीच भीषण युद्ध हुआ था, जो कई महीनों तक चला।












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