भारत बायोटेक के बयान पर पी चिदंबरम की प्रतिक्रिया, कहा- कोवैक्सीन और कोविशील्ड के प्रोडक्शन का हो ऑडिट
नई दिल्ली, मई 29। पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम ने भारत बायोटेक की कोवैक्सीन और सीरम इंस्टीट्यूट की कोविशील्ड पर सवाल खड़े करते हुए दोनों के प्रोडक्शन का ऑडिट कराने की मांग की है। पी चिदंबरम ने CAG के द्वारा दोनों वैक्सीन का ऑडिट कराने की मांग की है। शनिवार को उन्होंने एक ट्वीट कर कहा कि "लापता टीके" का रहस्य हर दिन गहराता जा रहा है। पी चिदंबरम ने दावा किया है कि इन वैक्सीन के प्रोडक्शन और क्षमता में अंतर हो सकता है।

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भारत बायोटेक ने दिया था ये बयान
आपको बता दें कि हाल ही में भारत बायोटेक कंपनी ने कहा था कि वैक्सीन की सप्लाई और उत्पादन की प्रक्रिया काफी मुश्किल है। यही वजह है कि देश में कोवैक्सीन की किल्लत देखी जा रही है। कंपनी के इसी बयान पर पी चिदंबरम ने वैक्सीन सप्लाई का ऑडिट करने की सलाह दी है।
पूर्व वित्त मंत्री ने दिया ये बयान
पी चिदंबरम ने अपने ट्वीट में कहा है, "हर दिन 'मिसिंग वैक्सीन' का रहस्य गहराता जा रहा है। भारत बायोटेक ने टीकों के एक बैच के उत्पादन के लिए आवश्यक 'लीड टाइम' के बारे में दिए बयान से और भ्रम पैदा कर दिया है।" पी चिदंबरम ने आगे कहा कि 'क्षमता' एक चीज है और 'उत्पादन' एक अलग चीज है। हम दो घरेलू निर्माताओं द्वारा अब तक उत्पादित वास्तविक मात्रा के बारे में जानना चाहेंगे। एक बार जब हम वास्तविक उत्पादन को जान लेते हैं, तो हमें बताया जाना चाहिए कि तारीख-वार क्या आपूर्ति की गई है और किसे?
कोवैक्सीन की प्रक्रिया में लगता है 120 दिन का समय
आपको बता दें कि भारत बायोटेक ने अपने बयान में कहा था कि वैक्सीन के उत्पादन और सप्लाई के अलावा टेस्टिंग, रिलीज, वितरण, और ब्रीफिंग में 4 महीने का गैप आ जाता है। कंपनी ने बताया था कि वैक्सीन के एक स्लॉट के निर्माण, परीक्षण और रिलीज की समय सीमा लगभग 120 दिन थी। कंपनी ने कहा कि जिन बैचों का उत्पादन मार्च में शुरू किया गया था वो वैक्सीन जून में सप्लाई के लिए तैयार होती है। इसके अलावा वैक्सीन राज्यों और केंद्र सरकार के स्टोरेज हाउस तक पहुंचने में दो दिन लग जाते हैं।












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