'देश के 30 फीसदी से ज्यादा वकीलों के पास फर्ज़ी डिग्रियां'
नयी दिल्ली। काले कोट वाले वकीलों की डिग्रियां फर्जी है इसे लेकर बार काउंसिल के चेयरमैन ने बड़ा खुला किया है। बार काउंसिल ऑफ इंडिया के चेयरमैन मनन कुमार मिश्रा ने खुलासा किया है कि देश के 30 फीसदी वकीलों के पास फर्जी डिग्रियां हैं। जिसका खुलासा वेरिफिकेशन में हुआ है। दरअसल इस वक्त वकीलों की डिग्रियों का वेरिफिकेशन चल रहा है। शुरुआती सत्यापन में ही 30 फीसदी वकीलों की डिग्रियां फर्जी पाई गई हैं। ऐसे में बार काउंसिल ने वकीलों के प्रैक्टिस को लेकर सख्त हादायतें जारी कर दी है। वैरिफिकेशन में 30 फीसदी से भी ज्यादा वकीलों के पास फर्जी डिग्रियां मिली है।

बीसीआई ने सर्टिफिकेट और प्रैक्टिस के स्थान के सत्यापन के नियम (2015) को लागू कर दिया है। देशभर के वकीलों को नए फॉर्मेट के लिए फिर से रजिस्ट्रेशन करवाना होगा। जिसके लिए उन्हें अपने सभी सर्टिफिकेट्स जमा कराने होंगे। सत्यापन की पूरी प्रक्रिया 2016 तक पूरी की जाने की संभावना है।
इस वैरिफिकेशन के बाद ऐसे सभी वकील जिन्होंने पिछले पांच सालों से प्रैक्टिस नहीं की है, उन्हें प्रैक्टिस करने की अनुमति नहींदी जाएगी। बार काउंसिल के चैयरमैन के मुताबिक हर राज्य में लॉयर्स एकेडमी स्थापित की जाएगी। वकीलों को तीन महीने की ट्रेनिंग दी जाएगी। वकीलों को प्रैक्टिस करने के लिए एक सर्टिफिकेट अनिवार्य होगा।












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