पटना के बेंगलुरू में होगी विपक्षी दलों की अगली बैठक, NCP प्रमुख शरद पवार ने बताई तारीख
पटना के बाद नहीं इस शहर में होगी विपक्षी दलों की अगली बैठक,शरर पवार बोले-बैठक के बाद पीएम मोदी बेचैन हो गए हैं
लोकसभा चुनाव 2024 में भाजपा को परास्त करने के लिए सभी विपक्षी राजनीतिक दल एक जुट हो चुके हैं। पीएम मोदी को सत्ता से हटाने के लिए लांमबंद हुए राजनीतिक दलों ने अभी 23 जून को पटना में बिहार मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बुलावे पर बैठक की थी।

वहीं गुरुवार को राष्ट्रीवादी कांग्रेस पार्टी के मुखिया शरद पवार ने खुलासा किया कि विपक्षी दलों की अगली बैठक कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरू में होगी।
13, 14 जुलाई को बेंगलुरू में होगी बैठक
हालांकि पहले बताया जा रहा था कि कि पटना के बाद अगली बैठक शिमला में होगी लेकिन शरद पवार ने साफ कर दिया है कि अगली बैठक बेंगलुरू में होगी। इसके साथ ही एनसीपी प्रमुख पवार ने बताया कि विपक्षी दलों के नेताओं की अगली बैठक 13 और 14 जुलाई को बेंगलुरु में होगी।
बैठक के बाद पीएम मोदी बेचैन हो गए
इसके साथ ही पवान ने 23 जून को पटना में हुई विपक्षी दलों की बैठक का जिक्र करते हुए कहा पटना में विपक्षी दलों की बैठक के बाद पीएम मोदी बेचैन हो गए है।
बेंगलुरू बैठक का जानें एजेंडा
पटना के बाद बेंगलुरू में आयोजित की जा रही बैठक में 2024 में भारतीय जनता पार्टी से लड़ने के लिए संबंधित राज्यों में काम करते हुए एक साथ आगे बढ़ने का एजेंडा तैयार करने के लिए होगी।
पहले शिमला में बैठक होने की कही गई थी बात
गौरतलब है कि पटना में अपने मुख्यमंत्री आवास मे विपक्षी नेताओं से मुलाकात के पहले बिहार सीएम नीतीश कुमार ने कहा था कि कि पटना के बाद अगली बैठक 13 और 14 जुलाई को शिमला में होगी हालांकि अब शरद पवार ने साफ कर दिया कि ये बैठक बेंगलुरू में होगी।
पटना में विपक्षी पार्टियों की बैठक में शामिल हुए थे ये नेता
याद रहे पटना में जो विपक्षी दलों की बैठक हुई थी उसमें 15 विपक्षी राजनीतिक दलों के नेताओं ने शिरकत की थी।
जिसकमें पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, कांग्रेस नेता मल्लिकार्जुन खड़गे और राहुल गांधी, पीडीपी प्रमुख महबूबा मुफ्ती और एनसीपी प्रमुख शरद पवार, सपा प्रमुख अखिलेश यादव समेत अन्य विपक्षी नेता इस बैठक में जुटे थे।
बैठक के बाद केजरीवाल इस बात पर हो गए थे नाराज
हालांकि दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने दिल्ली सरकार की शक्तियां कम करने वाले केंद्र के अध्यादेश को लेकर कांग्रेस और उनके बीच मतभेद हो गया था। बैठक के बाद आप ने एक बयान जारी कर अध्यादेश पर अपना रुख साफ नहीं करने के लिए कांग्रेस की आलोचना की थी। केजरीवाल की आम आदमी पार्टी ने ये भी कहा था कि भविष्य में विपक्षी दलों की बैठकों में भाग लेना मुश्किल होगा जहां कांग्रेस मौजूद होगी।












Click it and Unblock the Notifications