Opinion: तेलंगाना में कर्मचारियों के आए अच्छे दिन, हर तरह से साथ दे रही है राज्य सरकार

तेलंगाना में केसीआर सरकार ने राज्य के सरकारी कर्मचारियों के कल्याण के लिए कई महत्वपूर्ण फैसले लिए हैं। आज राज्य के सरकारी कर्मचारियों को देश में सबसे ज्यादा वेतन मिल रहा है।

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जब बात कर्मचारियों के कल्याण की आती है तो तेलंगाना सरकार की ओर से आज ऐसी कोशिशें की जा रही हैं, जो दूसरे राज्य सरकारों के लिए नजीर से कम नहीं है। ठेका कर्मचारियों वाली व्यवस्था पूरी तरह से नाकाम हो चुकी है। इसलिए, राज्य सरकार ने नए सिरे से काम करना शुरू किया है। राज्य में नई कर्मचारी स्वास्थ्य योजना नीति लागू करने का फैसला किया गया है। प्रदेश में 95 फीसदी नई जॉब स्थानीय लोगों को देने का फैसला हुआ है। दृष्टिकोण पूरी तरह से स्पष्ट है। सुशासन के लिए आवश्यक है कि कल्याणकारी योजनाओं का लाभ सबको मिले, इसके लिए कर्मचारियों की भागीदारी बहुत ही महत्वपूर्ण और आवश्यक है। तेलंगाना राज्य आंदोलन के समय से ही कर्मचारियों ने एक बहुत ही महत्वपूर्ण और प्रभावी भूमिका निभाई है। अब सरकार जो फैसले ले रही है, उसपर अमल करने में भी यही कर्मचारी अहम रोल अदा कर रहे हैं। इसलिए तेलंगाना की केसीआर सरकार ने भी कर्मचारियों के हितों की भरपूरी परवाह की है। उनके वेतन, कल्याण और उन्हें पहचान देने के लिए हर तरह का कदम उठा रही है। यही वजह है कि आज तेलंगाना के कर्मचारियों को देश में सबसे ज्यादा वेतन पाने वालों के रूप में जाना जाता है।

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कर्मचारियों का कल्याण, तेलंगाना सरकार की प्राथमिकता
जबसे के चंद्रशेखर राव ने तेलंगाना में सत्ता की बागडोर संभाली है, कर्मचारियों के कल्याण के लिए एक से बढ़कर एक फैसले लिए गए हैं। इनके प्रति वेतन सुधार आयोग (PRC) का रुख भी लचीला रहा है। तेलंगाना के कर्मचारियों को अभी देश में सबसे ज्यादा सैलरी मिल रही है। यहां तक कि केंद्र सरकार के कर्मचारियों से भी बेहतर वेतन दिया जा रहा है। सरकारी कर्मचारियों के साथ-साथ आशा वर्कर, आंगनवाड़ी और आउटसोर्स किए जाने वाले कर्मचारियों के लिए भी बड़े फैसले लिए गए हैं और उनपर अमल भी किया जा रहा है। जैसे कि उनके वेतनों को भी स्थायी कर्मचारियों की तरह ही निर्धारण करके लागू किया गया है। इसी तरह जॉब-टीचर्स को भी नई कर्मचारी स्वास्थ्य योजना (EHS) का लाभ देने का फैसला किया गया है। केसीआर सरकार ने हाल ही में एक हेल्थ केयर ट्रस्ट बनाने की घोषणा की है। इसमें सरकारी प्रतिनिधिनियों के अलावा, कर्मचारियों और शिक्षक प्रतिनिधियों के साथ ही रिटायर हो चुके कर्मचारियों को भी पार्टनर बनाने का फैसला लिया गया है।

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    तेलंगाना में संविदा व्यवस्था का अंत
    तेलंगाना में अब ठेकेदारी वाली व्यवस्था या अनुबंध प्रणाली खत्म कर दी गई है। राज्य के वित्त मंत्री टी हरीश राव ने बजट में ऐलान किया है कि अप्रैल महीने से संविदा कर्मियों को राज्य सरकार स्थायी करेगी। कहा गया है कि जो भी कर्मचारी ठेके पर काम कर रहे हैं, वे 1 अप्रैल से राज्य सरकार के स्थायी कर्मचारी माने जाएंगे। केसीआर सरकार के इस फैसले से राज्य के लगभग 11,000 लोगों की जिंदगी संवरने वाली है। सीएम केसीआर ने तेलंगाना आंदोलन के दौरान यह वादा किया था और अब उसपर अमल भी किया जा रहा है। राज्य सरकार की इस घोषणा से संविधा कर्मचारियों की खुशी का ठिकाना नहीं है। संविधा प्रणाली में कर्मचारियों का दशकों से शोषण चल रहा था। संविदा कर्मचारियों पर सरकार के पैसले से मजदूर यूनियन खुश हैं। 2 जून, 2014 से पहले के जो भी कर्मचारी संविधा व्यवस्था के तहत मासिक पारिश्रमिक पा रहे हैं, उन्हें नियमित करने के लिए गाइडलाइंस जारी की गई है।

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    नौकरियों में स्थानीय लोगों को 95 फीसदी आरक्षण
    तेलंगाना सरकार का एक और बड़ा फैसला है, 95 फीसदी नौकरियां स्थानीय लोगों को देने का। पहले स्थानीय लोगों को 60 से 80 फीसदी तक ही आरक्षण दिया जाता था, लेकिन केसीआर सरकार ने नया फैसला लेकर पूरी भर्ती प्रणाली ही बदल दी है। इसकी वजह से अब अटेंडेंट से लेकर रेवेन्यू डिविजनल ऑफिसर तक की नौकरियों में स्थानीय लोगों को 95फीसदी आरक्षण की सुविधा मिल गई है। अब सारी नौकरियां इसी आधार पर मिलेंगी। सरकारी नौकरियों में स्थानीय लोगों के लिए आरक्षण की यह व्यवस्था संविधान के आर्टिकल 371 के तहत राष्ट्रपति के आदेश से की गई है। मुख्यमंत्री केसीआर के आग्रह पर राष्ट्रपति का यह नया आदेश विशेष रूप से तेलंगाना को प्राप्त हुआ है। राज्य सरकार के इस निर्णय से तेलंगाना के 33 जिलों, 7 जोन और दो मल्टी-जोन के बेरोजगार युवाओं को लाभ मिलने का रास्ता साफ हुआ है।

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