Operation Sindoor: 'हमने सिंदूर का बदला लिया', BSF की महिला जवानों ने दिया दुश्मन को करारा जवाब
Operation Sindoor: सीमा सुरक्षा बल (BSF) की सहायक कमांडेंट नेहा भंडारी ने ऑपरेशन 'सिंदूर' के दौरान जिस साहस, नेतृत्व और दृढ़ संकल्प का परिचय दिया, वह पूरे देश के लिए प्रेरणा का स्रोत बन गया है।
उन्होंने बताया कि किस तरह अंतरराष्ट्रीय सीमा (IB) पर तैनात उनकी कंपनी ने पाकिस्तान की ओर से किसी भी घुसपैठ को नाकाम किया और दुश्मन को करारा जवाब दिया।

सहायक कमांडेंट नेहा भंडारी ने न्यूज एजेंसी एएनआई से बात करते हुए कहा, "ऑपरेशन सिंदूर के दौरान मैं अंतरराष्ट्रीय सीमा पर एक अग्रिम पोस्ट की कमान संभाल रही थी। हमारी जिम्मेदारी थी कि किसी भी प्रकार की घुसपैठ को रोका जाए, पाकिस्तान को मुंहतोड़ जवाब दिया जाए और सीमा की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए। हमने अपनी सभी जिम्मेदारियों को बखूबी निभाया।"
'जोश हाई था', सहायक कमांडेंट नेहा भंडारी
नेहा भंडारी ने आगे बताया कि इस अभियान के दौरान दुश्मन पर ऊँची और समतल प्रक्षेप पथ (high and flat trajectory) वाले हथियारों का प्रयोग किया गया, ताकि लक्ष्य को सटीकता से भेदा जा सके। उन्होंने गर्व से कहा कि, "इस ऑपरेशन में हमारा जोश हाई था जिसमें महिला और पुरुष दोनों ही बीएसएफ कर्मियों ने मिलकर बराबरी से अपनी ड्यूटी निभाई। हमारे पास चौकियां और बंकर हैं जो हमें रणनीतिक सुरक्षा प्रदान करते हैं।"
'हमने पाकिस्तान से सिंदूर का बदला लिया', BSF जवान शंकारी दास
इस ऑपरेशन में शामिल रही महिला बीएसएफ जवान शंकारी दास ने बेहद भावुक शब्दों में अपने अनुभव साझा किए। उन्होंने कहा, "हमने पाकिस्तान से उस 'सिंदूर' का बदला लिया है जो उन्होंने हमारी महिलाओं के माथे से मिटा दिया था।"
उनका यह बयान केवल भावनाओं का नहीं, बल्कि उस आत्मबल और नारी शक्ति का परिचायक है जो आज हर मोर्चे पर देश की रक्षा में अग्रणी भूमिका निभा रही है। शंकारी दास ने आगे कहा, "ऑपरेशन सिंदूर हमारे लिए सिर्फ एक सैन्य कार्रवाई नहीं थी, बल्कि यह हमारे सम्मान और आत्मगौरव की रक्षा का अभियान था। हम दिन-रात सीमा पर तैनात रहकर देश की रक्षा कर रहे हैं और हर चुनौती का मुकाबला करने के लिए तैयार हैं।"
Operation Sindoor बना महिला शक्ति की नई परिभाषा
ऑपरेशन सिंदूर एक ऐसा अभियान बना, जिसने दिखा दिया कि भारतीय महिलाओं की भूमिका अब सीमित नहीं है। वे अब सीमाओं की सुरक्षा में भी अग्रणी भूमिका निभा रही हैं। महिला अधिकारियों और जवानों की मौजूदगी और सक्रिय भागीदारी ने न केवल सैन्य बलों को सशक्त किया है, बल्कि पूरे देश को यह संदेश भी दिया है कि नारी शक्ति अब शौर्य की परिभाषा बदल रही है।
बीएसएफ की महिला अधिकारियों और जवानों की बहादुरी की कहानियाँ पूरे देश को प्रेरणा दे रही हैं। ऑपरेशन सिंदूर के माध्यम से उन्होंने यह सिद्ध कर दिया है कि जब देश पर संकट आता है, तो भारतीय महिला भी बंदूक उठाकर मोर्चा संभालने से पीछे नहीं हटती।
सहायक कमांडेंट नेहा भंडारी के शब्दों में, "जोश हाई था!" - यह केवल एक वाक्य नहीं, बल्कि भारतीय सेना और सुरक्षा बलों की भावना का प्रतीक बन गया है।












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